Friday, July 3, 2026
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जल गंगा संवर्धन अभियान: श्योपुर की प्राचीन बावड़ियों को मिला नवजीवन, 5 जून को होगा “बावड़ी उत्सव”

श्योपुर, 03 जून 2025।
श्योपुर जिले में जल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत प्राचीन बावड़ियों के जीर्णोद्धार और संरक्षण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में इस अभियान ने जिले की जल धरोहरों को नवजीवन देने का कार्य किया है।

मनरेगा योजना के अंतर्गत इन बावड़ियों की सफाई, झाड़-झंखाड़ हटाना, मिट्टी निकालना, रंग-रोगन कर उन्हें फिर से उपयोगी और आकर्षक बनाया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप जिले की कई ऐतिहासिक बावड़ियाँ आज फिर से आम जनमानस के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं।

5 जून को ‘बावड़ी उत्सव’ का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का उत्सव 5 जून को “बावड़ी उत्सव” के रूप में मनाया जाएगा। यह आयोजन सायंकाल ग्राम रायपुरा स्थित ऐतिहासिक बावड़ी पर किया जाएगा।

जिला पंचायत के सीईओ अतेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों की कुल 24 और शहरी क्षेत्रों की 17 बावड़ियों का चयन जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के लिए किया गया है। उन्होंने बताया कि अगरा-मदनपुर, पहेला, खिरखिरी, बावड़ीचापा, बरदुला, बर्धा बुजुर्ग, सोईकला, जैदा, गुरनावदा, फिलोजपुरा, ननावद, रतोदन, रायपुरा, और अजापुरा सहित अन्य गांवों में यह कार्य जारी है।

शहर की ऐतिहासिक बावड़ियां भी बनीं मिशन का हिस्सा

शहरी क्षेत्र में स्थित राजा मनोहरदास की बावड़ी, सब्जी मंडी बावड़ी, शीतला माता बावड़ी, बीबीजी की बावड़ी, सोहन बावड़ी, शिव बावड़ी, बड़ौदा कुंड सहित कुल 17 बावड़ियां इस अभियान के तहत सूचीबद्ध की गई हैं। इनके जीर्णोद्धार से न केवल वर्षाजल का संग्रहण होगा, बल्कि भूजल स्तर में भी वृद्धि की संभावना जताई गई है।

इतिहास से जुड़ीं हैं ये बावड़ियाँ

श्योपुर जिले की बावड़ियाँ न केवल जल संरक्षण का साधन रही हैं, बल्कि ये ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक हैं। अधिकांश बावड़ियाँ 16वीं-17वीं शताब्दी की हैं और वास्तुशिल्प की दृष्टि से “नंदा” शैली की मानी जाती हैं। इनमें एक ही रास्ते से प्रवेश और निकास होता है।

ग्राम रायपुरा की बावड़ी, जिसका निर्माण सन् 1734 में गोंड राजा इंदर सिंह के दीवान श्री शिवनाथ जी कायस्थ ने कराया था, आज भी ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है। वहीं बर्धा बुजुर्ग और सोईकला गांव की बावड़ियाँ भी गौड़ राजाओं की स्थापत्य कला का प्रमाण हैं।

स्थानीय प्रशासन की ऐतिहासिक पहल

मनरेगा परियोजना अधिकारी  विक्रम जाट ने बताया कि अभियान के तहत न सिर्फ बावड़ियों की साफ-सफाई की जा रही है, बल्कि उन्हें सौंदर्यीकृत कर पुनः सामुदायिक उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों में भी इन बावड़ियों को लेकर नई चेतना और जागरूकता देखी जा रही है।

निष्कर्ष: पुनर्जीवन की ओर प्राचीन जल धरोहरें

“जल गंगा संवर्धन अभियान” श्योपुर जिले के लिए न केवल जल संरक्षण का प्रयास है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम भी है। 5 जून को होने वाला “बावड़ी उत्सव” इस जन-जागरूकता और प्रशासनिक संकल्प का प्रतीक बनेगा।

टर्राकलों की संकीर्ण रेलवे पुलिया बनी ग्रामीणों के लिए मुसीबत, नहीं निकल पा रहे बड़े वाहन

श्योपुर, 03 जून 2025

श्योपुर जिले के ग्राम टर्राकलों में ग्वालियर-श्योपुर रेल मार्ग के अंतर्गत हाल ही में रेलवे द्वारा निर्मित एक भूमिगत पुलिया अब ग्रामीणों के लिए गहरी परेशानी का कारण बन गई है। पुलिया की ऊँचाई और चौड़ाई इतनी कम है कि इसके नीचे से बड़े और आवश्यक वाहन गुजर ही नहीं पा रहे हैं।

खेती, व्यापार और यात्रियों को हो रही भारी दिक्कत

ग्राम टर्राकलों से औछणुपरा मार्ग पर बनी इस संकीर्ण पुलिया के कारण वीडियो कोच बसें, हार्वेस्टर, बोरिंग मशीन और बड़े ट्रक जैसे महत्वपूर्ण वाहन नहीं निकल पा रहे हैं। इससे न केवल ग्रामीणों की खेती प्रभावित हो रही है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियाँ और यात्रियों की आवाजाही भी बाधित हो रही है।

शादी की बारात भी हुई प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के बेटे की बारात जब श्योपुर आई थी, तो उसकी बस इस पुलिया के नीचे से नहीं गुजर सकी। मजबूरी में बारात को वापस मोड़कर गोरस रोड होते हुए शिवपुर पहुंचाया गया। यह घटना पुलिया की अक्षमता को उजागर करती है।

निर्माण में लापरवाही का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास की अन्य रेलवे पुलियाएं इस पुलिया की तुलना में कहीं अधिक ऊँची और चौड़ी हैं। ऐसे में टर्राकलों की पुलिया के निर्माण में लापरवाही बरती गई है। रेलवे के ठेकेदार ने आवागमन शुरू करने की कोशिश की, लेकिन उनके स्वयं के वाहन भी फँस गए।

बायपास बना, पर स्थायी समाधान नहीं

फिलहाल बायपास मार्ग बनाकर अस्थायी राहत दी गई है, लेकिन मूल पुलिया को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक तात्कालिक हल है, जब तक स्थायी समाधान नहीं किया जाता, समस्या बनी रहेगी।

ग्रामीणों की प्रशासन से मांग

एक सेकड़ा ग्रामवासियों – नारायण, समाराम, श्रीनिवास, दिनेश, सुदेश, रामो, घदम और केदार –आदि  ने जिलाधीश महोदय से निवेदन किया है कि या तो इस पुलिया की ऊँचाई और चौड़ाई बढ़ाई जाए या फिर समीप ही एक नई व पर्याप्त ऊँचाई की पुलिया का निर्माण कराया जाए।

क्या प्रशासन उठाएगा ठोस कदम?

अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और प्रभावित ग्रामीणों को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

 इस मुद्दे से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा

श्योपुर में आदिवासी किसानों की जीवनरेखा पर संकट: दबंगों ने किया सार्वजनिक नहर पर कब्जा, सिंचाई व्यवस्था ठप

श्योपुर, कराहल तहसील 

दिनांक 3/6/2025

श्योपुर जिले की कराहल तहसील के ग्राम सूंसवाडा और रजपुरा के आदिवासी किसानों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों पुरानी सार्वजनिक कच्ची नहर (स्थानीय भाषा में ‘सारण’) पर कुछ दबंगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर उसे मिट्टी और पत्थरों से बंद कर दिया गया है। इस मामले की शिकायत लेकर दर्जनों आदिवासी महिला-पुरुष श्योपुर कलेक्टर की जन सुनवाई में पहुँचे, जहाँ उन्होंने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

 एक दर्जन से अधिक आए ग्रामीणों द्वारा  पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को सौंपी गई लिखित शिकायत में कृपाशंकर, भानु जाट, बंटी जाट तथा सिंडी ऊर्फ निहाल नामक दबंगों पर नहर को ट्रैक्टर से बंद करने और विरोध करने पर गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह नहर दशकों से बरसात के पानी को खेतों तक पहुँचाने में सहायक रही है और इसकी सफाई सामूहिक श्रमदान से होती रही है। लेकिन इस बार दबंगों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते इसे जबरन बंद कर दिया, जिससे सैकड़ों बीघा भूमि की सिंचाई प्रभावित हो गई है।

फ्त्थर लगाकर बंद किया बरसती नाला (नहर) सारण 

      आदिवासियों के खेत 

पंचनामा से हुई पुष्टि, फसल बर्बादी की आशंका

ग्राम रजपुरा के पंचगण और आदिवासी  ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत पंचनामा में भी आरोपों की पुष्टि की गई है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी वर्षा ऋतु में खेतों में पानी नहीं पहुँच पाएगा और धान की फसल पूरी तरह चौपट हो जाएगी। इससे विशेष रूप से आदिवासी समुदाय को भारी आर्थिक क्षति हो सकती है।

प्रशासन से की गई मांगें

प्रार्थी और ग्रामवासियों ने प्रशासन से चार मुख्य मांगें रखी हैं:

  1. सार्वजनिक नहर को दबंगों के कब्जे से तत्काल मुक्त कराया जाए।

  2. नहर की सफाई कर उसे पूर्ववत बहाल किया जाए।

  3. दोषियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, धमकी देने और गाली-गलौज करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जाए।

  4. ग्राम में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस बल की तैनाती की जाए।

ग्रामीणों की चेतावनी: कार्रवाई नहीं हुई तो बिगड़ सकता है माहौल

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला जनहित से जुड़ा है और यदि समय रहते प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो इससे सामाजिक तनाव और किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

मनोहरथाना तहसीलदार को देवस्थान विभाग के नाम सौंपा गया ज्ञापन


जनजागरण संदेश: जितेंद्र सिंह राजपूत, मनोहरथाना

दिनांक 2/6/2025

मनोहरथाना, झालावाड़ — अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ राजस्थान द्वारा आज मनोहरथाना तहसील कार्यालय में देवस्थान विभाग के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर संगठन के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष श्री जितेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि मनोहरथाना क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों की उपेक्षा लंबे समय से हो रही है।

उन्होंने कहा कि कोटा दरबार के समय राजा रजवाड़ों द्वारा स्थापित मंदिरों में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई थी और भव्य मंदिरों का निर्माण कराया गया था। ब्रह्मचारी पंडित कृष्णदास जी व गुरु मथुरादास जी जैसे संतों को मंदिर की सेवा हेतु ज़मीन दी गई थी, जो लगभग 2000 बीघा थी। उस काल में धार्मिक उद्देश्यों से इस भूमि का उपयोग किया जाता था।

पंवार ने बताया कि मनोहरथाना क्षेत्र में ऐसे लगभग 100 मंदिर हैं, जिनकी सेवा पूजा अब भी स्थानीय समाज व मंदिर समितियों द्वारा की जा रही है। विशेषकर श्री गिरधारी जी (रामटेक) मंदिर और श्री राघव जी न्यूटी मंदिर की स्थिति चिंताजनक है। वर्ष 2012 से सेवानिवृत्त शिक्षक श्री कृष्णानंद शर्मा (उम्र 82 वर्ष) अपनी पेंशन से इन मंदिरों की सेवा पूजा का कार्य कर रहे हैं।

ज्ञापन में देवस्थान विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया गया कि न तो सेवा राशि में कोई वृद्धि की गई है, न ही मंदिर के लिए किसी बजट का निर्धारण किया गया है। संगठन ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि:

  • दोनों मंदिरों को सेवा राशि वर्तमान बजट अनुसार प्रदान की जाए।

  • मंदिर में निर्माण एवं मरम्मत कार्य हेतु विशेष बजट आवंटित किया जाए।

  • पूजा करने वाले पुजारी को ₹6000 मासिक सहायता शीघ्र प्रदान की जाए।

  • मंदिर के पास भूमि न होने की स्थिति में देवस्थान विभाग द्वारा भूमि आवंटन सुनिश्चित किया जाए।

  • संबंधित दस्तावेज़ों की छानबीन कर मंदिर को सहयोग राशि प्रदान की जाए।

यह ज्ञापन राजस्थान के मुख्यमंत्री, देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत, जिला कलेक्टर, एसडीएम मनोहरथाना सहित सभी संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है। संगठन ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 से संबंधित फाइल तहसील कार्यालय में लंबित पड़ी है।

तहसीलदार  बाबूलाल मीणा ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए भरोसा दिलाया कि मंदिर के दस्तावेजों की जल्द जांच कर मंदिर का निरीक्षण किया जाएगा तथा हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

ITI श्योपुर में प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ी, अब 16 जून तक करें आवेदन! तकनीकी शिक्षा की

तकनीकी शिक्षा की ओर पहला कदम – मौका न गवाएं!

श्योपुर, 02 जून 2025
उन युवाओं के लिए बड़ी खबर है जो तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) श्योपुर में प्रवेश की प्रक्रिया अब 31 मई से बढ़ाकर 16 जून तक कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी अब अपने कंप्यूटर, मोबाइल या किसी ऑनलाइन सहायता केंद्र के माध्यम से https://mpiticounseling.co.in पोर्टल पर पंजीयन और च्वॉइस फिलिंग कर सकते हैं।

प्राचार्य  आशीष जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि अभ्यर्थी पंजीयन के बाद संस्थाओं और व्यवसायों का क्रम चयन 16 जून तक कर सकेंगे।

 प्रवेश प्रक्रिया की प्रमुख तिथियाँ इस प्रकार हैं:
17 जून: लॉगइन पर कॉमन रैंक प्रदर्शित
17-18 जून: त्रुटि सुधार का अवसर (ईमेल: mpiticounseling2025@gmail.com)
23 जून: प्रथम चयन सूची जारी
24 से 26 जून: चयनित अभ्यर्थियों की संस्था में उपस्थिति व प्रवेश
01 जुलाई: द्वितीय चयन सूची जारी

👉 विस्तृत जानकारी के लिए संपर्क करें:
प्रवेश प्रभारी श्री अतुल चतुर्वेदी – 📞 7047515000

🎓 आईटीआई श्योपुर में संचालित 5 प्रमुख व्यवसायिक पाठ्यक्रम:

1️⃣ कोपा (कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट)
2️⃣ इलेक्ट्रीशियन
3️⃣ फिटर
4️⃣ मैकेनिक डीजल
5️⃣ स्टेनोग्राफर (हिंदी)

🎯 अब देर न करें! तकनीकी शिक्षा के साथ रोजगार के द्वार खोलें!

श्योपुर बना युवाओं के लिए उम्मीद की किरण, रोजगार में प्रदेश में नंबर-1

कलेक्टर अर्पित वर्मा को मिला राज्यस्तरीय प्रशंसा पत्र

श्योपुर, 2 जून 2025।
मध्यप्रदेश का सीमावर्ती जिला श्योपुर अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता या सांस्कृतिक विरासत के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर देने के लिए भी पहचाना जा रहा है। जिले ने रोजगार उपलब्ध कराने के क्षेत्र में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर एक नया कीर्तिमान रचा है।

कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के नेतृत्व में जिले ने 30 मई को निषादराज भवन में आयोजित “रोजगार, स्वरोजगार एवं अप्रेंटिसशिप युवा संगम मेला” का सफल आयोजन किया, जिसने प्रदेश भर में श्योपुर को कौशल विकास के क्षेत्र में नंबर-वन जिला बना दिया।

इस अद्वितीय प्रयास के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के आयुक्त श्री गिरीश शर्मा ने कलेक्टर श्री वर्मा को प्रशंसा पत्र भेजा है, जिसमें युवाओं के लिए उनके द्वारा किए गए “उल्लेखनीय कार्यों” की सराहना की गई है।

आंकड़े जो सफलता की गवाही देते हैं

मेले के दौरान कुल 1589 हितग्राहियों को ₹4.08 करोड़ की ऋण सहायता स्वरोजगार योजनाओं के तहत दी गई। ये योजनाएं थीं:

  • मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना

  • डेयरी और बकरी पालन योजना

  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना

  • डॉ. अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना

  • सीसीएल प्रदाय योजना (एनआरएलएम)

12+ बड़ी कंपनियों की भागीदारी, 163 युवाओं को मिला सीधा रोजगार

इस मेले में 12 से अधिक नामी कंपनियों ने भाग लिया, जैसे:

  • साईवेट प्रा. लि.

  • मदरसन ऑटोमेटिव, गुजरात

  • इंडियन एम्प्लॉयमेंट, गुना

  • चेकमेट सर्विसेज, गुजरात

  • नौकरीफाई डॉट कॉम, नोएडा

इन कंपनियों द्वारा साक्षात्कार के माध्यम से 252 युवाओं का प्रारंभिक चयन किया गया, जिनमें से 163 को मौके पर ही जॉब ऑफर लेटर प्रदान किए गए।

कलेक्टर की मेहनत लाई रंग

कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इस मेले के सफल आयोजन के लिए पिछले एक महीने से सतत समीक्षा, बैठकें और प्रयास किए। कंपनियों को आमंत्रित करने से लेकर योजनाओं के समन्वयन तक, हर बिंदु पर उनकी सक्रिय निगरानी रही।

आगे की राह: तकनीकी शिक्षा और बड़ा विजन

कलेक्टर वर्मा अब युवाओं को आईटीआई, पॉलीटेक्निक जैसे संस्थानों में दाखिला लेने और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर स्वरोजगार की दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में श्योपुर के युवा न केवल अपना भविष्य गढ़ेंगे, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाले “युवा उद्यमी” बनकर उभरेंगे।

“श्योपुर अब सिर्फ जिला नहीं, एक उम्मीद है हर उस युवा के लिए जो अपने सपनों को जमीन पर उतारना चाहता है।”

विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत किसानों को दी जा रही उन्नत खेती की जानकारी श्योपुर,


श्योपुर, 01 जून 2025

कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा के निर्देशन में श्योपुर जिले में विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत किसानों को गांव-गांव जाकर खेती-किसानी की उन्नत तकनीकों एवं नवाचारों से अवगत कराया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित करना और सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी देना है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. कायम सिंह ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र बड़ौदा के वैज्ञानिकों, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों तथा प्रगतिशील किसानों व एफपीओ प्रतिनिधियों की टीम ने विकासखण्ड श्योपुर के ग्राम माखनखेड़ी, दलारनाकलां एवं बड़ौदाराम में पहुंचकर 348 किसानों को जानकारी दी।

टीम ने किसानों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं, कृषि की उन्नत तकनीकों, फसल विविधिकरण, प्राकृतिक खेती, संतुलित रासायनिक खाद के उपयोग, नरवाई न जलाने जैसे विषयों पर विस्तार से समझाया। साथ ही ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल जैसी फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन के तरीके भी बताए गए।

विकासखण्ड कराहल की टीम ने ग्राम कालीतलाई कलमी एवं ककरधा में 114 किसानों को जानकारी प्रदान की, जबकि विजयपुर विकासखण्ड की टीम ने ग्राम अगरा, पैरा पालपुर एवं शाहपुरा में 177 किसानों से संवाद किया।

02 जून को इन गांवों में पहुंचेगी टीमें
अभियान की आगामी कड़ी में सोमवार, 02 जून को श्योपुर विकासखण्ड की टीम ग्राम जावदेश्वर, जैनी एवं मानपुर में किसानों से मिलेगी। कराहल विकासखण्ड की टीम गोरस, पिपरानी एवं कर्राई का भ्रमण करेगी। विजयपुर विकासखण्ड की टीम इकलौद, लाडपुरा एवं लोहसगानी में खेती की नवीन तकनीक और उन्नत फसलों की जानकारी प्रदान करेगी।

इस अभियान से किसानों में खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

तीन महीने का एकमुश्त राशन देंगे – कलेक्टर के निर्देश पर श्योपुर में विशेष व्यवस्था


श्योपुर, 31 मई 2025

मानसून सीजन में संभावित बाढ़, जलभराव और परिवहन संबंधी बाधाओं को देखते हुए श्योपुर जिले में उपभोक्ताओं को तीन महीने का राशन एकमुश्त वितरित किया जाएगा। यह निर्णय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट  अर्पित वर्मा द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत लिया गया है।

जिला खाद्य अधिकारी सुनील शर्मा ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के अंतर्गत पात्र परिवारों को जून, जुलाई और अगस्त 2025 का राशन एकसाथ उपलब्ध कराया जाएगा।

इस व्यवस्था के तहत जिले की सभी शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर तीन माह का राशन पहले से उपलब्ध करा दिया गया है। पात्र हितग्राही जून 2025 के वितरण के दौरान जून से अगस्त तक का खाद्यान्न प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी उपभोक्ता को राशन प्राप्त करने में कोई समस्या आती है, तो वह जिला कलेक्ट्रेट स्थित खाद्य कार्यालय या संबंधित अनुविभागीय कार्यालय में सहायक अथवा कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

सावधानी और तैयारी से राहत
प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम संभावित आपदा की स्थिति में राशन वितरण की बाधाओं को कम करेगा और हितग्राहियों को समय पर राहत सुनिश्चित करेगा।

मनोहरथाना में गौ हत्या प्रकरण को लेकर गौ भक्तों का आक्रोश, उपखंड अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

 

दिनांक 31/5/2025 मनोहरथाना (झालावाड़) 

मनोहरथाना विधानसभा क्षेत्र के कामखेड़ा इलाके में सरेड़ी और खुरी गांवों के बीच कथित रूप से गौ हत्या कर मांस खाने की एक वीडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। बताया जा रहा है कि यह घटना किसी दावत के दौरान घटित हुई, जिसमें कई लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

वायरल वीडियो के आधार पर गौ भक्तों और गौरक्षक संगठनों में रोष व्याप्त है। इस मामले को लेकर अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ, श्री राजस्थान गौ सेवा समिति, बजरंग दल सहित अन्य संगठनों ने उपखंड अधिकारी, मनोहरथाना को ज्ञापन सौंपा और सख्त कार्रवाई की मांग की।

गौ रक्षा महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह पंवार ने इस विषय में कामखेड़ा थाना प्रभारी सुनील वर्मा से चर्चा की, जिन्होंने बताया कि वायरल वीडियो के आरोपी, पिपलिया निवासी इकरार खां उर्फ बाबू, घीसे खां का पुत्र अजीज, को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि मांस भैंस या पाड़े का हो सकता है, लेकिन अंतिम पुष्टि अनुसंधान के पश्चात ही हो सकेगी।

इस बीच जिले के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में गौ भक्त, गौशाला संचालक और गौरक्षक संगठन के कार्यकर्ता मनोहरथाना उपखंड कार्यालय पहुंचे और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उपखंड अधिकारी ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया और कहा कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस अवसर पर झालावाड़, असनावर, झालरापाटन, अकलेरा, घाटोली, एवं संपूर्ण मनोहरथाना क्षेत्र से श्री मुरलीधर गौशाला, श्री कृष्ण गौशाला समिति, बजरंग दल, तथा विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

इस संवेदनशील प्रकरण पर पुलिस एवं प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जारी है, वहीं क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है

एम.पी. ट्रांसको का नवाचार: अत्याधुनिक ‘फोटे तकनीक’ से सबस्टेशनों में ऑटोमेशन को मिलेगी नई मजबूती

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बोले – रियल टाइम मॉनिटरिंग और टेलीप्रोटेक्शन अब और बेहतर

भोपाल, 30 मई2025
देश की अग्रणी विद्युत ट्रांसमिशन कंपनी एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (एम.पी. ट्रांसको) ने विद्युत ट्रांसमिशन क्षेत्र में एक और अहम नवाचार करते हुए अत्याधुनिक फाइबर ऑप्टिक टर्मिनल इक्विपमेंट (FOTE) तकनीक को अपनाया है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इस तकनीक से प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशनों में ऑटोमेशन, टेलीप्रोटेक्शन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था और भी अधिक सशक्त होगी।

तीन जोनों में चरणबद्ध क्रियान्वयन

इस नवाचार को तीन जोनों में बाँटकर प्रदेश भर में लागू किया जा रहा है। सबसे पहले इसे उच्चदाब सबस्टेशनों और एम.पी. ट्रांसको से जुड़े पावर जनरेशन केंद्रों में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है।

 क्या है FOTE तकनीक

एफओटीई (FOTE) एक ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के ज़रिए सबस्टेशनों में लगे ट्रांसफॉर्मर, प्रोटेक्शन रिले और अन्य अहम उपकरणों की रियल टाइम निगरानी और डेटा संप्रेषण की क्षमता देता है।
अधीक्षण अभियंता श्री मनीष खरे के अनुसार, इस तकनीक के माध्यम से भविष्य में फॉल्ट रिपोर्ट और रिले सेटिंग्स को भी सेंटरलाइज्ड किया जा सकेगा।

OPGW से ट्रांसमिशन नेटवर्क को मिली नई गति

ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (OPGW) के माध्यम से FOTE सिस्टम को जोड़ा गया है। चूंकि ट्रांसको का स्वयं का डेडिकेटेड कम्युनिकेशन नेटवर्क है, इसलिए अब ट्रांसमिशन सिस्टम को मिले हैं:

 तेज और सुरक्षित डेटा ट्रांसफर

 साइबर खतरों से सुरक्षा

 स्वचालित निगरानी और फॉल्ट डिटेक्शन

 केंद्रीकृत नियंत्रण एवं निर्णय क्षमता

ऊर्जा मंत्री तोमर ने इस पहल को “प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सुदृढ़ता की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है।