Monday, March 2, 2026
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होली पर शुष्क दिवस घोषित, 4 मार्च को शराब बिक्री पर पूरी तरह रोक

धुलेण्डी के दिन सुबह से शाम 4 बजे तक मदिरा दुकानें और बार बंद

श्योपुर, 02 मार्च 2026

 होली पर्व के मद्देनजर जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने शुष्क दिवस घोषित किया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 24(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया है।

जारी आदेश के अनुसार 04 मार्च 2026 (बुधवार) को होली (धुलेण्डी) के दिन प्रातः काल से अपरान्ह 04:00 बजे तक श्योपुर जिले की समस्त कम्पोजिट मदिरा दुकानें एवं एफएल-3 बार पूर्णतः बंद रहेंगे। इस अवधि में मदिरा का क्रय-विक्रय पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।


शांति व्यवस्था के लिए फैसला

यह आदेश मप्र राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 47, दिनांक 14 फरवरी 2025 में प्रकाशित कम्पोजिट मदिरा फुटकर बिक्री दुकानों के निष्पादन की व्यवस्था वर्ष 2025-26 की शर्तों की कण्डिका 48.1 के तहत जारी किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य होली पर्व के दौरान जिले में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।


उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

साफ संदेश—होली खुशियों का पर्व है, शांति भंग करने वालों पर सख्ती तय है।

होली की भाईदूज पर 05 मार्च को स्थानीय अवकाश घोषित

कलेक्टर के आदेश, बैंक–कोषालय व परीक्षाओं पर लागू नहीं होगा अवकाश

श्योपुर, 02 मार्च 2026

 होली पर्व के अवसर पर श्योपुर जिले में भाईदूज (05 मार्च 2026) को स्थानीय अवकाश रहेगा। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा द्वारा वर्ष 2026 के लिए घोषित स्थानीय अवकाशों के क्रम में यह निर्णय लिया गया है।

जारी आदेश के अनुसार श्योपुर जिले में 05 मार्च 2026 (होली की भाईदूज) तथा 11 नवंबर 2026 (दीपावली की भाईदूज) को संपूर्ण जिले में स्थानीय अवकाश प्रभावी रहेगा।


अन्य स्थानीय अवकाश भी घोषित

  • 12 सितंबर 2026 (शनिवार) — मेला छिमछिमा हनुमान जी मंदिर, विजयपुर के अवसर पर तहसील क्षेत्र विजयपुर एवं वीरपुर में स्थानीय अवकाश।

  • 22 सितंबर 2026डोल ग्यारस / जल झूलनी एकादशी पर तहसील क्षेत्र श्योपुर, बड़ौदा एवं कराहल में स्थानीय अवकाश।


इन पर नहीं होगा अवकाश लागू

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह स्थानीय अवकाश बैंक, कोषालय एवं उप-कोषालयों पर लागू नहीं होगा। साथ ही, जिन शैक्षणिक संस्थानों में इन तिथियों पर परीक्षाएं निर्धारित हैं, वहां भी यह अवकाश प्रभावशील नहीं रहेगा।

संदेश स्पष्ट—भाईदूज पर जिले में अवकाश, लेकिन आवश्यक सेवाएं और परीक्षाएं यथावत रहेंगी।

समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन: पंजीयन की अंतिम तिथि 07 मार्च

एमपी किसान ऐप से घर बैठे मुफ्त रजिस्ट्रेशन, जिले में 33 केंद्र सक्रिय

श्योपुर, 02 मार्च 2026

 रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देशन में जिले में पंजीयन 07 फरवरी से जारी है, जो 07 मार्च 2026 तक कराया जा सकता है।

प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए जिले में 33 पंजीयन केंद्र निर्धारित किए हैं, जहां निःशुल्क पंजीयन किया जा रहा है। इसके साथ ही किसान एमपी किसान ऐप के माध्यम से मोबाइल से घर बैठे भी मुफ्त पंजीयन करा सकते हैं।


इन 33 केंद्रों पर हो रहा पंजीयन

आवदा, कराहल, बड़ौदा, बोरदादेव, नयागांव तेखण्ड, राडेप, लुहाड़, फिलोजपुरा, तलावड़ा, नयागांव ढोढपुर, उतनवाड़, ओछापुरा, रघुनाथपुर, वीरपुर, विजयपुर, सहसराम, श्योपुर, जलालपुरा, नागदा, सोईकलां, नागरगांवडा, आसीदा, बिजरपुर, ननावद, गोहेड़ा, दांतरदा कलां, मानपुर, सोठवा, जावदेश्वर, तलावदा, गुरूनावदा और पाण्डोला स्थित सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं पर पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है।


किसानों के लिए जरूरी सूचना

प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते पंजीयन कराकर समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय का लाभ सुनिश्चित करें।

स्पष्ट संदेश—07 मार्च से पहले पंजीयन अनिवार्य, तभी मिलेगा समर्थन मूल्य का लाभ।

होली पर सख्ती: कानून-व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं—कलेक्टर के कड़े निर्देश

अधिकारी मुख्यालय में रहेंगे तैनात, बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक

श्योपुर, 2 मार्च 2026

 होली एवं धुलेण्डी पर्व के मद्देनजर जिले में शांति, सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं के निर्बाध संचालन को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं।

जारी आदेश के अनुसार 03 मार्च और 04 मार्च 2026 को शासकीय अवकाश तथा 05 मार्च 2026 को स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद पर्व अवधि में सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।


बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कलेक्टर की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। कानून-व्यवस्था ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को अपने निर्धारित स्थल पर पूरी मुस्तैदी के साथ उपस्थित रहना होगा।


मोबाइल ऑन, आपात स्थिति में ही अवकाश

प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मोबाइल फोन ‘ऑन मोड’ में रखें। केवल अत्यंत गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति में ही मुख्यालय अवकाश पर विचार किया जाएगा, वह भी संबंधित विभाग प्रमुख की अनुशंसा और अनुमोदन के बाद।


आवश्यक सेवाओं पर विशेष फोकस

पर्व के दौरान स्वच्छता, जल प्रदाय, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

स्पष्ट संदेश—होली खुशी का पर्व है, लेकिन शांति और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा।

कूनो में ऐतिहासिक कार्यक्रम, लेकिन सवालों के घेरे में जनप्रतिनिधियों की गैरहाजिरी

पर्यावरण संरक्षण बना उपलब्धि, पर लोकतांत्रिक मर्यादा पर उठे सवाल—आमजन में गहरी चर्चा 

सोशल मीडिया पर भी दिखी गर्माहट, लोगों ने कमेंट कर जताया विरोध

श्योपुर दिनांक 1 मार्च 2026

 श्योपुर जिले में पर्यावरण और पर्यटन की दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र की कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं का रिलीज कार्यक्रम कर विलुप्तप्राय जीवों के संरक्षण का संकल्प लिया। पालपुर फोर्ट के सामने आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित श्योपुर से ग्वालियर और भोपाल तक के जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को पर्यावरण संरक्षण की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल आमजन के बीच चर्चा का विषय बन गया—जिस जिले में कार्यक्रम हुआ, उसी जिले की दोनों विधानसभा सीटों के निर्वाचित विधायक कार्यक्रम में नजर क्यों नहीं आए?


विधायकों की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, श्योपुर विधानसभा-1 से विधायक बाबू जड़ेल और श्योपुर विधानसभा-2 से विधायक मुकेश मल्होत्रा की अनुपस्थिति को लेकर आमजन में असमंजस है। लोगों का कहना है कि यह शासकीय कार्यक्रम था या किसी राजनीतिक दल का आयोजन? यदि यह सरकार का कार्यक्रम था, तो जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की मौजूदगी अपेक्षित थी।


‘शासकीय कार्यक्रम या पार्टी कार्यक्रम?’—जनता के बीच बहस

आम चर्चा यह है कि हालिया शासकीय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे यह संदेश जा रहा है कि कार्यक्रम जनता या प्रशासन के नहीं, बल्कि किसी दल विशेष के हैं। स्थानीय मत के अनुसार, इससे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भावना को ठेस पहुंचती है।

लोग यह भी याद दिला रहे हैं कि श्योपुर की जनता ने बार-बार विधानसभा में कांग्रेस को चुना, यहां तक कि उपचुनाव में भी पार्टी बदलने के बाद उम्मीदवार को जनता ने स्वीकार नहीं किया। “यहां चेहरा नहीं, जनता ने पार्टी चुनी”—ऐसी धारणा लंबे समय से बनी रही है।

कूनो कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की गैरहाजिरी बनी बहस का मुद्दा

कूनो नेशनल पार्क में आयोजित घड़ियाल–कछुआ रिलीज कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल अब सोशल मीडिया तक पहुंच गए हैं। फेसबुक, और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर लोगों ने खुलकर कमेंट और पोस्ट के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया

यूजर्स का कहना है कि जिस जिले में शासकीय कार्यक्रम आयोजित हुआ, उसी जिले के जनता द्वारा चुने गए विधायकों की गैरमौजूदगी समझ से परे है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यह सरकारी कार्यक्रम था या किसी राजनीतिक दल का, क्योंकि मंच और उपस्थिति से जनता में अलग ही संदेश गया।

कमेंट्स में यह भी लिखा गया कि

  • जनता के प्रतिनिधियों को बुलाए बिना कार्यक्रम करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है”

  • “शासकीय आयोजन को पार्टी कार्यक्रम की तरह पेश किया जा रहा है”

  • “श्योपुर की जनता को हल्के में लिया जा रहा है”

सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं से साफ है कि मामला सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं


राजनीतिक छवि और आने वाले संकेत

स्थानीय मत यह भी है कि यदि निर्वाचित विधायकों की उपेक्षा की छवि मजबूत होती गई, तो इसका असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। लोग इसे जनता के प्रतिनिधियों का नहीं, बल्कि जनता का तिरस्कार मान रहे हैं—यह बात हम नहीं, आम श्योपुरवासी कह रहे हैं, ऐसा स्थानीय चर्चा में सुनाई दे रहा है।


निष्कर्ष:
कूनो में घड़ियाल–कछुआ रिलीज जैसे कार्यक्रमों ने श्योपुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से रखा है। लेकिन लोकतंत्र की आत्मा—जनप्रतिनिधियों की सहभागिता—पर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि उपलब्धियों के साथ समावेश और प्रतिनिधित्व भी उतना ही जरूरी है।

कूनो नदी में मुख्यमंत्री ने छोड़े घड़ियाल–कछुए, जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती

पर्यावरण और पर्यटन की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम – मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

शासकीय कार्यक्रम या पार्टी कार्यक्रम?’—जनता के बीच बहस तो सोशल मीडिया पर भी दिखी गर्माहट

श्योपुर 1मार्च 2026

मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क स्थित कूनो नदी में 53 घड़ियाल और 25 कछुओं को रिलीज किया। मुख्यमंत्री ने इसे पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर बताया और कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है, इस वर्ष प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।


विलुप्तप्राय जीवों के संरक्षण का संकल्प

राष्ट्रीय चंबल राष्ट्रीय अभयारण्य के तत्वावधान में आयोजित घड़ियाल रिलीज कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि घड़ियाल और कछुओं का संरक्षण–संवर्धन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। विलुप्त होते जीवों के संरक्षण के संकल्प के साथ सरकार लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट कूनो में निरंतर सफलता की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में बोत्सवाना से आए 9 चीतों के बाद प्रदेश में चीतों की संख्या 48 हो गई है।


पालपुर फोर्ट के सामने हुआ रिलीज कार्यक्रम

कूनो नेशनल पार्क के भीतर पालपुर फोर्ट के सामने कूनो नदी किनारे आयोजित कार्यक्रम में

  • 53 घड़ियाल (Gavialis gangeticus) — जिनमें 28 नर और 25 मादाएं

  • 25 कछुए (Three Striped Roofed Turtle – Batagur dhongoka)
    नदी में छोड़े गए।

इस अवसर पर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, देवरी (मुरैना) की ओर से स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी किए घड़ियाल रिलीज

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे और उन्होंने भी घड़ियाल रिलीज किए।

शासकीय कार्यक्रम या पार्टी कार्यक्रम?’—जनता के बीच बहस

आम चर्चा यह है कि हालिया शासकीय कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे यह संदेश जा रहा है कि कार्यक्रम जनता या प्रशासन के नहीं, बल्कि किसी दल विशेष के हैं। स्थानीय मत के अनुसार, इससे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भावना को ठेस पहुंचती है।

लोग यह भी याद दिला रहे हैं कि श्योपुर की जनता ने बार-बार विधानसभा में कांग्रेस को चुना, यहां तक कि उपचुनाव में भी पार्टी बदलने के बाद उम्मीदवार को जनता ने स्वीकार नहीं किया। “यहां चेहरा नहीं, जनता ने पार्टी चुनी”—ऐसी धारणा लंबे समय से बनी रही है। सोशल मिडिया पर भी लोग तंज कसते दिखे 


जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अमला रहा मौजूद

कार्यक्रम में पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा तुरसनपाल बरिया, उपाध्याय राज्य मंत्री दर्जा सीताराम आदिवासी, जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी, भाजपा जिला अध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

प्रशासनिक स्तर पर एसीएस वन संदीप यादव, कमिश्नर सुरेश कुमार, आईजी चंबल सचिन अतुलकर, कलेक्टर अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल

‘पिस्टल फंस गई वरना दुल्हन मर जाती’—जयमाला पर फायरिंग करने वाले आशिक ने कबूला जुर्म

यूपी से 32 हजार में खरीदी पिस्टल, 1300 किमी दूर पंजाब में रची साजिस 

श्योपुर दिनांक 1/3/26

बक्सर  एकतरफा प्यार में अंधे आशिक की दरिंदगी ने शादी की खुशियों को खून से लाल कर दिया। जयमाला की रस्म के दौरान दुल्हन को गोली मारने वाले आरोपी दीनबंधु (24) ने पुलिस पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी ने बताया कि वह दुल्हन को जान से मारने के इरादे से आया था—दूसरी गोली चलानी थी, लेकिन पिस्टल फंस गई


बचपन की जान-पहचान, 15 साल बाद एकतरफा प्यार

पुलिस के अनुसार, आरोपी और पीड़िता आरती (22) एक ही मोहल्ले में महज 150 मीटर की दूरी पर रहते थे। बचपन में साथ खेलते थे, लेकिन बाद में संपर्क टूट गया। 2024 में जब आरोपी ने आरती को देखा तो उसने एकतरफा प्यार कर लिया। आरती ने साफ इंकार किया—यहीं से नफरत और बदले की कहानी शुरू हुई।


बीच सड़क प्रपोजल, फिर पीछा और धमकियां

इंकार के बाद आरोपी का व्यवहार बदल गया। वह आरती का पीछा करने लगा। परिवार को जानकारी मिलने पर तनाव बढ़ा। करीब एक साल पहले आरती की पहली शादी तय हुई तो आरोपी दूल्हे के घर धमकी देने पहुंचा—सगाई तुड़वा दी। इसके बाद परिवार ने आरोपी को काम के लिए पंजाब भेज दिया।


1300 किमी दूर बैठकर रची हत्या की साजिश

पुलिस के मुताबिक, अगस्त 2025 में आरती की दूसरी शादी तय होते ही आरोपी ने पंजाब से साजिश रचनी शुरू की।

  • 20 फरवरी: पंजाब से गाजीपुर के गहमर गांव पहुंचा

  • 32,000 रुपये में अवैध पिस्टल खरीदी

  • 22 फरवरी: चुपके से गांव लौटा, दोस्त के यहां छिपा


जयमाला के बाद फायर, निशाना सीने पर—गोली पेट में लगी

शादी के दिन आरोपी मेहमानों में घुल-मिल गया। जयमाला पूरी होते ही उसने पिस्टल निकाली और फायर किया। आरोपी का बयान—

“मैं उसे मारना चाहता था। निशाना सीने पर था, लेकिन गोली पेट में लग गई। दूसरी गोली चलानी चाही, पिस्टल फंस गई, वरना वह वहीं मर जाती।”


14 घंटे बाद सरेंडर, फूट-फूटकर रोया

घटना के 14 घंटे बाद पुलिस दबाव में आरोपी ने सरेंडर किया। पूछताछ में वह रोता रहा और एकतरफा प्यार का हवाला देता रहा।


एसपी का बयान, गंभीर धाराओं में केस

बक्सर एसपी शुभम आर्य ने बताया कि आरोपी पूरी तैयारी से आया था और घटना के बाद दूसरे राज्य भागने की योजना थी। आरोपी पर धारा 307 (हत्या की कोशिश), आर्म्स एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेजा गया है।
घायल आरती का इलाज जारी है।

निष्कर्ष:शादी के मंच पर खून—एकतरफा प्यार की हिंसक परिणति ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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जैव विविधता संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: बोत्सवाना से कूनो पहुंचे 9 चीते

केंद्रीय वन मंत्री ने 3 चीतों को क्वारंटाइन बाड़े में किया रिलीज, भारत में चीतों की संख्या 48 हुई

श्योपुर, 28 फरवरी 2026

 भारत में चीता पुनर्वास की ऐतिहासिक पहल को नई मजबूती मिली है। बोत्सवाना से लाए गए 9 चीते (6 मादा, 3 नर) आज सुबह करीब 9.30 बजे कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। ग्वालियर एयरपोर्ट से भारतीय वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टरों के माध्यम से चीतों को सुरक्षित रूप से कूनो लाया गया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोत्सवाना से आए 9 चीतों में से 3 चीतों को प्रतीकात्मक रूप से क्वारंटाइन बाड़े में रिलीज किया। शेष चीतों को भी निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत कुछ समय तक निगरानी (ऑब्जर्वेशन) में रखा जाएगा।


प्रभारी मंत्री, सांसद सहित कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, सहरिया विकास प्राधिकरण अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा तुरसनपाल बरैया, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रशासनिक स्तर पर डीजी वन्यजीव भारत सरकार सुशील कुमार अवस्थी, एसीएस वन संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स वीएन अम्बाडे, कलेक्टर अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, डीएफओ कूनो आर. थिरूकुराल, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।


भारत–बोत्सवाना की ऐतिहासिक साझेदारी

चीता रिलीज कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह भारत और बोत्सवाना के बीच जैव विविधता संरक्षण की ऐतिहासिक साझेदारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल से चीता प्रोजेक्ट को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों से आज 97 देश जैव विविधता संरक्षण मंच से जुड़ चुके हैं।


भारत में चीतों की वर्तमान स्थिति

  • बोत्सवाना से 9 चीतों के आगमन के बाद देश में कुल चीते: 48

  • 45 चीते कूनो नेशनल पार्क में

  • 3 चीते गांधी सागर अभयारण्य में

  • नामीबिया मूल की स्थापित आबादी: 20 (17 भारतीय जन्मे शावक सहित)

  • दक्षिण अफ्रीकी मूल की स्थापित आबादी: 19 (11 भारतीय जन्मे शावक सहित)


साफ संदेश—कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर चीता संरक्षण का सबसे सफल मॉडल बनकर उभरा है।

मध्यस्थता से त्वरित न्याय का संदेश, एडीआर भवन में जागरूकता कार्यक्रम

समय और धन की बचत का प्रभावी माध्यम है मध्यस्थता – प्रधान जिला न्यायाधीश

श्योपुर, 28 फरवरी 2026

 न्यायालयीन प्रक्रिया के वैकल्पिक और प्रभावी समाधान के रूप में मध्यस्थता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कपिल मेहता ने की।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने प्रशिक्षित मीडिएटर्स, पैनल अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स और पैरालीगल वालेंटियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायालयों के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण में समय अधिक लगता है, जबकि मध्यस्थता के जरिए मामलों का समाधान तेजी से होता है, जिससे पक्षकारों का अनावश्यक समय और धन दोनों की बचत होती है।

उन्होंने 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को लेकर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि यदि वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, एनआई एक्ट तथा अन्य राजीनामा योग्य प्रकरणों को पूर्व में ही चिन्हित कर लिया जाए, तो उनके सफल निराकरण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।


अधिवक्ताओं की भूमिका अहम

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय संजय गोयल ने मध्यस्थता प्रक्रिया की जानकारी देते हुए इसके लाभों पर प्रकाश डाला और अधिवक्ताओं से मध्यस्थता के माध्यम से प्रकरणों के समाधान में सक्रिय सहयोग की अपील की।

जिला अभिभाषक संघ श्योपुर के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सफल मध्यस्थता में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और उनके सहयोग से ही अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है।


ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सचिव जिला अभिभाषक संघ, जिला विधिक सहायता अधिकारी, प्रशिक्षित मध्यस्थ अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस श्योपुर के चीफ, डिप्टी चीफ, असिस्टेंट, पैनल लॉयर्स और पैरालीगल वालेंटियर्स बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

संदेश स्पष्ट—मध्यस्थता अपनाइए, विवाद घटाइए और न्याय को तेज व सरल बनाइए।

बोत्सवाना से 8 चीते, कूनो फिर बना अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में

चीता प्रोजेक्ट को नई रफ्तार, 28 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क पहुंचेंगे नए मेहमान

श्योपुर, 27 फरवरी 2026

 मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में है। 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाए जा रहे 8 चीतों के आगमन के साथ ही चीता प्रोजेक्ट को नई ऊर्जा मिलने जा रही है।

गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क से चीता प्रोजेक्ट की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। बीते साढ़े तीन वर्षों में यह परियोजना लगातार सफलता की ओर बढ़ी है। बोत्सवाना से 8 नए चीतों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी।


चीता प्रजनन के लिए कूनो सबसे अनुकूल

अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाड़ियों से घिरा कूनो नेशनल पार्क प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का अद्भुत संगम है। पार्क के बीचों-बीच बहने वाली कूनो नदी, चौड़े समतल तट और भरपूर धूप में अठखेलियां करते मगरमच्छ यहां के रोमांच को और बढ़ाते हैं।

कूनो में 174 से अधिक पक्षी प्रजातियां, जिनमें 12 दुर्लभ श्रेणी की हैं, तथा सैकड़ों वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। यही कारण है कि चीतों के प्रजनन के लिए कूनो का जंगल अत्यंत सकारात्मक साबित हुआ है।


2009 से 2010 के सर्वे में कूनो रहा सबसे आगे

भारत में 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से उनके पुनर्स्थापन की योजना चल रही थी। सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में हुई विशेषज्ञ बैठक में चीता संरक्षण कोष की संस्थापक लॉरी मार्कर सहित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी।

इसके बाद 2010 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किए गए सर्वेक्षण में नौरादेही, शाहगढ़ और कूनो पालपुर को उपयुक्त पाया गया, लेकिन इनमें भी कूनो सबसे अनुकूल सिद्ध हुआ।


750 वर्ग किमी कोर एरिया, 3000 वर्ग किमी विस्तार

कूनो नेशनल पार्क के 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चीतों के स्थायी रहवास की क्षमता है, जबकि श्योपुर और शिवपुरी जिलों के लगभग 3000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में उनके स्वच्छंद विचरण की संभावनाएं मौजूद हैं। आसपास के गांवों में लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। पानी, शिकार घनत्व और आवश्यक सिविल कार्य पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।


चीतों की मौजूदा स्थिति

  • वर्तमान में भारत में कुल 39 चीते

  • 36 कूनो नेशनल पार्क में

  • 3 गांधी सागर अभयारण्य में

  • नामीबिया से लाए गए चीतों और उनके 17 भारतीय जन्मे शावकों सहित कुल आबादी 20

  • दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों और उनके 11 शावकों सहित कुल आबादी 19

अब बोत्सवाना से आने वाले 8 चीतों के साथ भारत का चीता परिवार और मजबूत होगा।


संदेश साफ है—कूनो सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, बल्कि भारत में चीता पुनर्स्थापना का सबसे बड़ा और सफल मॉडल बन चुका है।