कलमी, गोरस सहित कई आदिवासी ग्रामों में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित

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श्योपुर, 15 अप्रैल 2025

आदिवासी अंचल कराहल के अंतर्गत आने वाले ग्रामों – कलमी, गोरस, चितारा, झरेर, डाबली, पातालगढ़, बुढेरा, कोटागढ़, खूटका और खाड़ी – में ग्रामीणों के लिए पेयजल की पर्याप्त और सुसंगठित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यह जानकारी कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) शुभम अग्रवाल द्वारा दी गई।

कलमी:

ग्राम कलमी में 50 किलोलीटर क्षमता की उच्च स्तरीय जल टंकी के माध्यम से आदिवासी बस्ती के सभी परिवारों को पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति की जा रही है। गुर्जर और मारवाड़ी बस्तियों में छह सिंगल फेस मोटरपंप आधारित नलकूप कार्यरत हैं। मवेशियों के लिए तीन पशुहोद (पशुओं के लिए जल स्रोत) स्थापित किए गए हैं।

गोरस:

ग्राम गोरस में नलजल योजना पूर्ण रूप से चालू है और इसका नियमित संचालन ग्राम पंचायत द्वारा किया जा रहा है। यहां भी मवेशियों के लिए तीन पशुहोद स्थापित हैं।

चितारा:

ग्राम चितारा में नलजल योजना सुचारू रूप से संचालित है और गांववासियों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिल रहा है। साथ ही एक पशुहोद भी कार्यरत है।

झरेर और डाबली:

इन ग्रामों में नलजल योजना प्रगति पर है। झरेर की मारवाड़ी बस्ती के 40 परिवारों को दो सिंगल फेस मोटरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। डाबली में 65 परिवारों के लिए तीन मोटर आधारित नलकूपों से पानी उपलब्ध है। दोनों गांवों में पशुहोद स्थापित किए जा चुके हैं।

पातालगढ़, बुढेरा, कोटागढ़:

इन ग्रामों में सिंगल फेस मोटरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। पातालगढ़ में एक पशुहोद भी कार्यरत है।

खूटका और खाड़ी:

खूटका की 25 घरों की बस्ती में हैंडपंप से जलापूर्ति हो रही है तथा मवेशियों के लिए समीपवर्ती नदी का उपयोग किया जा रहा है। ग्राम खाड़ी के 20 परिवारों को भी हैंडपंप से पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

सारांश:
इन सभी ग्रामों में शासन द्वारा ग्रामीणों और मवेशियों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया गया है। पीएचई विभाग द्वारा की गई यह पहल ग्रामीण जनजीवन की गुणवत्ता में निश्चित ही सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

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