ग्राम मानपुर की 100 बीघा शासकीय भूमि पर फर्जी रिपोर्ट बनाकर कब्जा – पटवारी पर गंभीर आरोप

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श्योपुर, दिनांक 8/4/2025
श्योपुर जिले के ग्राम मानपुर में शासकीय भूमि पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 100 बीघा सरकारी भूमि को फर्जी दस्तावेज़ों और भ्रामक रिपोर्ट के ज़रिए निजी संपत्ति के रूप में दर्ज करवा लिया गया। इस गंभीर मामले में पूर्व पटवारी वीरसिंह पिप्पल, राजस्व निरीक्षक और नायब तहसीलदार की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मानपुर के खसरा नंबर 133/1, 133/2 और 133/3 में दर्ज भूमि, जो पहले प्रभूलाल काछी और उनकी बहनों के नाम थी, को वर्ष 2006 में शासकीय भूमि घोषित कर दिया गया था। इसके बावजूद, पूर्व सरपंच अशोक त्यागी ने कथित रूप से अपने परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर उक्त भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करवा लिया।

तहसीलदार न्यायलय प्रकरण क्रमांक 30 बी-121/2023-24 में 100 बीघा भूमि का फर्जी व झुटा भ्रामक जाँच प्रतिवेदन वीर सिंह पिप्पल पटवारी ने दिया जिसकी शिकायत कलेक्टर महोदय के टी एल पत्र क्रमांक 300794 दिनांक 28 /02/2023  प्रचलित है    

इस पूरे घोटाले का खुलासा उस वक्त हुआ जब हनुमानसिंह कुशवाह और ओमप्रकाश नामक शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर अर्पित वर्मा को लिखित शिकायत सौंपते हुए पटवारी वीरसिंह पिप्पल पर झूठी और भ्रामक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया है कि 18 फरवरी 2023 को दी गई रिपोर्ट में अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ कर भूमि को निजी स्वामित्व वाला बताया गया।

इतना ही नहीं, शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पटवारी पिप्पल ने अन्य स्थानों पर भी अवैध कॉलोनियों की प्लॉटिंग कर सरकारी भूमि बेचने का धंधा किया है। मुरैना और श्योपुर में करोड़ों की संपत्तियाँ अर्जित की गई हैं, जिनकी जांच की माँग की जा रही है।

हाल ही में श्योपुर शहर के एक पुराने प्रकरण में भी फर्जी रिपोर्ट के ज़रिए कंप्यूटर इन्द्राज करवाने का मामला सामने आया था, जिसके चलते उन्हें एसडीएम द्वारा निलंबित किया गया।

शिकायत में कलेक्टर से माँग की गई है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और सभी संदिग्ध भूमि प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दी जाए।

अब देखना यह होगा कि कलेक्टर अर्पित वर्मा इस भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं और क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के वादे धरातल पर उतरते हैं या फिर ऐसे ही भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलता रहेगा

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