कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिले में 70 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. दिलीप सिकरवार ने बताया कि अब आयुष्मान कार्ड बनाना और अधिक सरल हो गया है, तथा लोग घर बैठे स्वयं भी कार्ड बना सकते हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार Ayushman App को प्ले स्टोर से डाउनलोड करके या beneficiary.nha.gov.in लिंक के माध्यम से आयुष्मान कार्ड बनाया जा सकता है। कार्ड बनाने के लिए केवल आधार कार्ड और मोबाइल नंबर (OTP के लिए) की आवश्यकता होगी।
70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान कार्ड उनके परिजन आसानी से ऑनलाइन एप के माध्यम से बना सकते हैं। इसके अलावा ग्राम की आशा कार्यकर्ता, सीएचओ, सचिव, जीआरएस आदि के माध्यम से भी कार्ड बनवाया जा सकता है।
यदि कार्ड बनाने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो आयुष्मान कोऑर्डिनेटर धर्मेन्द्र मीना से मोबाइल नंबर 7828289748 पर संपर्क किया जा सकता है।
गौरतलब है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
श्योपुर अनाज मंडी में ओवरलोड ट्रकों का खेल आखिर कब रुकेगा?
श्योपुर में ओवरलोड माफिया का खुला खेल… प्रशासन मौन क्यों?
श्योपुर अनाज मंडी से हर रात ओवरलोड ट्रक निकलते हैं—टनों भर के अनाज से लदे, दो-दो मंजिला ऊँचे, कई थानों के सामने से गुजरते हुए। जिला भर में जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद न तो पुलिस को दिखाई देते हैं, न मंडी प्रशासन को, और न ही जिला प्रशासन को। सवाल ये है—आखिर इतनी बड़ी गाड़ियां किस चादर में ओढ़कर निकल जाती हैं, जो दिखती ही नहीं?
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उधर, एक पत्रकार को धमकाते हुए एक व्यक्ति साफ कह रहा है—“ये काम आज का नहीं, सालों से चल रहा है।” यानी ओवरलोडिंग का खेल कोई नया नहीं, बल्कि संगठित तरीके से चलने वाला ‘रूटीन सिस्टम’ बन चुका है। सूत्रों के अनुसार मंडी के बाहर अनजान लोग ट्रकों को रोकते हैं, सेटिंग के बाद आगे बढ़ने का इशारा किया जाता है, और जब एक पत्रकार मौके पर पहुंचता है, तो उसे डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। ये सब कैमरे में साफ सुना जा रहा है।
❓ सबसे बड़ा सवाल
छोटी ओवरलोड पिकअप गाड़ियां पुलिस को तुरंत कैसे दिख जाती हैं?
लेकिन अनाज से भरे दो-दो मंजिला भारी ट्रक—वो भी लगातार—क्यों नहीं दिखते?
रेत के डंपर नहीं दिखते, ओवरलोड अनाज ट्रक नहीं दिखते, आखिर प्रशासन को नजर आता क्या है?
🚧 सड़कें क्यों टूटती हैं?
हर बार सड़क बनती है, और कुछ ही महीनों बाद ओवरलोड वाहनों की वजह से गड्ढों में तब्दील हो जाती है। फसल बेचने आने वाले किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लेकिन प्रशासन मौन है। न मंडी प्रशासन की तरफ से कोई बयान, न पुलिस विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई, न ही एसपी और कलेक्टर की ओर से कोई स्पष्ट संज्ञान।
जनता के मन में उठते सवाल
क्या ओवरलोडिंग पर कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होती है?
क्या बड़े ओवरलोड वाहनों पर कोई अदृश्य सुरक्षा कवच है?
पत्रकार को धमकाने की घटना पर अभी तक कोई कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं?
आखिर कोन हे ये व्यक्ति जिसके इशारे पर गाड़ी रुकी और चल भी दी
📢 अब ज़रूरत है खुली कार्रवाई की
अगर सीसीटीवी कैमरों के बीच से गुजरते हुए ओवरलोड ट्रक किसी को नहीं दिखते, अगर वर्षों से चल रहे इस खेल पर कोई रोक नहीं लग पा रही, और अगर पत्रकारों को धमकाया जा रहा है— तो ये केवल कर्तव्य का उल्लंघन नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता है।
आखिर क्या है पुरे शोसल मिडिया पर वायरल विडियो का सच
जनता जानना चाहती है— “आखिर यह पूरा मामला राज क्यों बना हुआ है?” “कौन हैं वो लोग जो इतने बड़े ट्रकों को अदृश्य बना देते हैं?”
श्योपुर/बड़ौदा 27 नवंबर 2025 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़ौदा यात्रा के दौरान दोनों विधानसभा क्षेत्रों के चुने हुए जनप्रतिनिधियों — श्योपुर विधायक बाबू जंडेल और अन्य कांग्रेस नेताओं को पुलिस द्वारा सभा स्थल तक पहुँचने से रोक दिया गया। इस कार्रवाई ने जिले की राजनीति ही नहीं, बल्कि आम जनता के मन में भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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विधायक को नजरबंद, फिर थाने में ले जाया गया — जनप्रतिनिधि का सम्मान कहाँ गया?
सुबह 11 बजे से ही विधायक बाबू जंडेल को घर से बाहर निकलने नहीं दिया गया। कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें देहात थाने ले जाकर बैठा दिया।
विधायक का आरोप— “मैं शांतिपूर्वक किसानों की बात सीएम के सामने रखना चाहता था, पर मुझे जबरन थाने में बैठा दिया गया।”
इस पूरी कार्रवाई ने जनता के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि— अगर एक निर्वाचित विधायक की आवाज को इस तरह दबाया जा सकता है, तो आम आदमी को कौन सुनेगा?
दोनों विधानसभा क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को रोकना — भाजपा की हठधर्मिता बताई जा रही
स्थानीय लोग खुलकर कह रहे हैं कि—
“जब जनता के चुने हुए विधायक को ही मंच तक पहुँचने नहीं दिया गया…”
“जब जनप्रतिनिधि की बात सुनने में भाजपा को डर लग रहा है…”
“जब विपक्ष के एक भी नेता को कार्यक्रम में आने नहीं दिया गया…”
…तो ये सब लोकतांत्रिक परंपराओं की कमजोरी और सत्ता की हठधर्मिता को दर्शाता है।
कई ग्रामीणों का कहना है कि भाजपा को इस बात का डर था कि विधायक मंच पर किसानों की बिजली बिल, कर्ज माफी और फसल सर्वे की खामियां उठा सकते थे। इसलिए उन्हें दूर रखा गया।
लोकतंत्र का असली मतलब यह नहीं कि सिर्फ समर्थन करने वालों को ही बोलने दिया जाए
जिले में यह बहस तेज है कि— “विधायक मंच तक जाते ही सवाल उठाते, इसलिए प्रशासन ने पहले ही रास्ते रोक दिए।”
लेकिन लोग पूछ रहे हैं— ✔ क्या लोकतांत्रिक शासन में जनता के प्रतिनिधियों को रोकना जायज है? ✔ क्या विपक्ष की आवाज खत्म कर देने से सरकार की छवि बेहतर होती है? ✔ अगर विधायक की बात सुनने की हिम्मत नहीं, तो जनता की तकलीफ कौन सुनेगा?
🔥 आम नागरिकों की चर्चा — ‘जब विधायक की नहीं सुनी गई, तो हमारी कौन सुनेगा?’
लोग सोशल मीडिया और गाँवों में खुलकर कह रहे हैं कि—
“विधायक तक को पुलिस रोक ले, तो आम नागरिक तो और भी असुरक्षित हो गया।”
“अगर सत्ता पक्ष सवालों से इतना डरता है, तो यह लोकतंत्र का कौन-सा मॉडल है?”
“हमने जनप्रतिनिधि इसलिए चुने कि वो हमारी आवाज उठाएँ, लेकिन उन्हें ही चुप करा दिया जाता है।”
कई लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन का रवैया बताता है कि— स्थानीय अधिकारियों और भाजपा नेताओं का गठजोड़ अब किसी भी असहज सवाल को उठने नहीं देना चाहता।
सत्ता बनाम जनता — यह टकराव आगे और बढ़ सकता है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि— विधायकों को रोकने जैसी घटनाएँ आम जनता में असंतोष बढ़ाती हैं। किसानों के मुद्दों को लेकर पहले ही नाराजगी है, और अब प्रतिनिधियों को रोकने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
निष्कर्ष
भाजपा द्वारा लोगों के चुने हुए विधायकों को सीएम की सभा से दूर रखना सिर्फ राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि जनता की आवाज का अपमान माना जा रहा है। आम लोगों में यह बात तेजी से फैल रही है कि— “अगर विधायक की आवाज दबाई जा रही है, तो आम आदमी की क्या बिसात?”
यह मुद्दा आने वाले समय में श्योपुर–बड़ौदा–विकासनगर की राजनीति में बड़ा रोल निभा सकता है।
श्योपुर/27 नवंबर 2025 बड़ौदा में आयोजित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम से ठीक पहले श्योपुर राजनीति में बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। स्थानीय कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को गुरुवार सुबह प्रशासन ने पहले घर पर नजरबंद किया, फिर कुछ देर बाद देहात थाने में बैठा लिया। कांग्रेस ने इसे “स्पष्ट राजनीतिक दमन” बताया है, जबकि प्रशासन ने इसे “कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की कार्रवाई” कहा है।
1 लाख से ज्यादा किसानों को 100 करोड़ 83 लाख रुपये का मुआवजा
मुख्यमंत्री ने बड़ौदा में आयोजित कार्यक्रम से जिले के 1,03,000+ किसानों के खातों में फसल क्षति का 100 करोड़ 83 लाख रुपए की राहत राशि ट्रांसफर की। सीएम ने इसे “किसानों को बड़ी राहत” बताया और भाजपा नेताओं को मंच पर खड़ा कर कहा— “किसानों को मुआवजा इन नेताओं के आग्रह पर मिला है, नौटंकी करने वालों की वजह से नहीं।”
मंच पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
🔥विधायक को सुबह 11 बजे घर पर रोका, फिर थाने ले जाया गया
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने बताया— “सुबह मुझे घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया। फिर कुछ देर बाद पुलिस जबरन थाने ले आई। न गिरफ्तारी बताया, न कारण। यह पूर्णतः प्रोटोकॉल और संविधान का उल्लंघन है।”
प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि— सरकारी मंच पर असहज सवाल न उठें, इसलिए विधायक को दूर रखा गया।
🔹 जंडेल किसानों के बिजली बिल, कर्ज माफी और मुआवजा सर्वे से जुड़ी शिकायतें सीएम के सामने रखना चाहते थे। 🔹 कांग्रेस नेताओं दिनेश सिकरवार और अन्य कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में रखा गया। 🔹 देर शाम तक थाने के बाहर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन चलता रहा।
🌧धान फसल खराब — सर्वे विवाद — और कांग्रेस की भूख हड़ताल पृष्ठभूमि में
अक्टूबर के अंत में लगातार बारिश से जिले में धान की फसल चौपट हुई थी। इसके बाद— ✔ विधायक जंडेल ने किसानों के मुद्दों पर धरना–प्रदर्शन व भूख हड़ताल की ✔ 21 नवंबर को जीतू पटवारी ने उनकी हड़ताल खत्म कराई ✔ चेतावनी दी गई कि 1 दिसंबर तक मुआवजा न मिला तो कांग्रेस विधायक विधानसभा में भूख हड़ताल पर बैठेंगे
इसी बीच भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ सीएम से मिले, जिसके बाद 27 नवंबर को मुआवजा वितरण की घोषणा हुई।
सीएम की घोषणाएँ और लोकार्पण/शिलान्यास
✦ घोषणाएँ
भट्टा महाराज के पास पुलिया
पुलिस थाने के पास नई पुलिया
बड़ौदा में गीता भवन
चन्द्रसागर पर्यटन केंद्र का PPP मॉडल पर विकास
बड़ौदा के जलभराव का स्थायी समाधान
✦ लोकार्पण/शिलान्यास
सेसईपुरा में 2.75 करोड़ का आदिवासी बालक आश्रम
श्योपुर में 14.80 करोड़ की नर्सिंग कॉलेज बिल्डिंग
14.95 करोड़ की 50 बिस्तर आयुष हॉस्पिटल
96 लाख की लागत से खाद–प्रसंस्करण केंद्र
लहरौनी, बलावनी और डाबीपुरा में 33/11 KV उपकेंद्र
सभा में सीएम का कांग्रेस पर हमला: ‘जाओ मथुरा, गोपाल कृष्ण की जय बोलकर दिखाओ’
सीएम यादव ने कांग्रेस पर राम मंदिर और भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा— “कांग्रेसी मथुरा में जाकर गोपाल कृष्ण की जय बोलकर दिखाएं, ऐसा वे एक खास वोट बैंक के डर से नहीं कर सकते।”
सभा के अंत में उन्होंने उपचुनाव में भाजपा की हार का जिक्र करते हुए रामनिवास रावत का भी नाम लिया।
सीएम के कार्यक्रम में पेंशनर गिरे — वीडियो वायरल
सीएम को ज्ञापन देने के दौरान प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन के ओमप्रकाश टकसाली धक्का लगने से गिर पड़े। कांग्रेस ने वीडियो को “सीएम की गाड़ी चढ़ने” की तरह प्रचारित किया, लेकिन मौके के पेंशनर्स ने इसे गलत बताया— “वह केवल धक्का लगने से गिरे थे, उन्हें कोई चोट नहीं आई।”
नतीजा: प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक तकरार केंद्र में
सीएम के कार्यक्रम ने जहाँ किसानों को राहत की सौगात दी, वहीं दूसरी ओर— स्थानीय प्रशासन, कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच श्रेय–विवाद, नजरबंदी और राजनीतिक टकराव दिनभर चर्चा में रहा।
आम नागरिकों की चर्चा — ‘जब विधायक की नहीं सुनी गई, तो हमारी कौन सुनेगा?’
लोग सोशल मीडिया और गाँवों में खुलकर कह रहे हैं कि—
“विधायक तक को पुलिस रोक ले, तो आम नागरिक तो और भी असुरक्षित हो गया।”
“अगर सत्ता पक्ष सवालों से इतना डरता है, तो यह लोकतंत्र का कौन-सा मॉडल है?”
“हमने जनप्रतिनिधि इसलिए चुने कि वो हमारी आवाज उठाएँ, लेकिन उन्हें ही चुप करा दिया जाता है।”
कई लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन का रवैया बताता है कि— स्थानीय अधिकारियों और भाजपा नेताओं का गठजोड़ अब किसी भी असहज सवाल को उठने नहीं देना चाहता।
श्योपुर/27 नवंबर 2025 श्योपुर जिले के बड़ौदा में गुरुवार को आयोजित विशाल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के 6 जिलों के 3 लाख से अधिक किसानों को फसल क्षति राहत राशि का 238 करोड़ रुपये का भुगतान सिंगल क्लिक से किया। मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे और किसानों को राहत राशि देने के साथ-साथ जिले में कई विकास परियोजनाओं की भी सौगात दी।
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किसानों को राहत: 1,03,048 श्योपुर किसानों को मिला मुआवजा
कार्यक्रम में श्योपुर जिले के 1,03,048 किसानों को अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति का मुआवजा बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। सीएम ने कहा— “किसानों को उनकी हर कठिनाई में हम साथ देंगे, एक क्लिक से राशि सीधे आपके खातों में पहुंच रही है।”
करोड़ों के विकास कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया ये ऐलान
सीएम ने इन प्रमुख परियोजनाओं की घोषणा की—
नर्सिंग कॉलेज निर्माण
बड़ौदा में बड़ा नाला प्रोजेक्ट
चंद्र सागर तालाब पर पर्यटन केंद्र
जिलेभर में कई सड़क और जनसुविधा कार्य
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर और कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।
राहुल गांधी, जीतू पटवारी और विधायक बाबू जंडेल पर सीएम का तंज
मुख्यमंत्री ने भाषण के दौरान राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें “लल्लू-पप्पू” कहा। वहीं श्योपुर–बड़ौदा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल को उन्होंने “नौटंकीबाज” बताया।
जीतू पटवारी पर निशाना साधते हुए कहा— “मैं किसी के कहने पर नहीं, किसानों की समस्या को समझते हुए यहां आया हूँ।”
बाबू जंडेल पर बड़ा हमला: “चप्पल छोड़ने और कपड़े फाड़ने से पैसा नहीं मिलता”
सीएम ने विधायक बाबू जंडेल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा— “चप्पल छोड़ने और कपड़े फाड़ने से पैसा नहीं मिलता… पैसा तो हमारे प्रभारी मंत्री लेकर आए हैं, जो आज किसानों के खाते में जा रहा है।”
उन्होंने जनता से यह भी पूछा कि— दोनों बार श्योपुर की जनता ने कांग्रेस को क्यों चुना?
दोनों बार दोनों बिधन सभा पता नहीं उनको दोनों बार दे दी है?
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी – ‘स्थानीय नेता दबाते हैं, अधिकारी काम नहीं करते’
सूत्रों के अनुसार ग्रामीणों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा—
“सरकार काम कर रही है, पर स्थानीय नेता लोगों को दबाते हैं।”
“किसी भी सरकारी काम के लिए कार्यालयों में बिना नेता के फोन के फाइल नहीं चलती।”
“कांग्रेस शासन में शिकायत पर कार्रवाई होती थी, आज शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।”
“कर्मचारी काम रोककर किसानों को परेशान करते हैं।”
जनता का कहना है कि यही नाराजगी दोनों विधानसभा सीटों पर BJP की हार का बड़ा कारण बनी।
निष्कर्ष
बड़ौदा में आयोजित मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम ने किसानों को वित्तीय राहत देने के साथ-साथ राजनीतिक माहौल को भी गर्म कर दिया। एक तरफ 238 करोड़ की सौगात, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पर सीएम की तीखी टिप्पणियाँ — दोनों कारणों से यह कार्यक्रम चर्चा का केंद्र बना रहा।
श्योपुर सहित 6 जिलों के किसानों को मिलेगा मुआवजा, 3 लाख किसानों के खातों में पहुँचेगी 238 करोड़ से अधिक राशि
श्योपुर, 26 नवंबर 2025 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 नवंबर को श्योपुर जिले की तहसील बड़ौदा में पुलिस थाना परिसर के पास स्थित ग्राउंड में आयोजित विशाल कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्योपुर सहित 6 जिलों के किसानों को फसल क्षति मुआवजा राशि का वितरण करेंगे।
सरकार की विशेष राहत योजना के तहत सिंगल क्लिक से 3 लाख 5 हजार 410 किसानों के बैंक खातों में कुल 238 करोड़ 78 लाख रुपये की मुआवजा राशि अंतरित की जाएगी। यह राशि अतिवृष्टि, बाढ़ और पीला मौजेक कीट व्याधि से प्रभावित फसलों की क्षति की भरपाई के रूप में दी जा रही है।
श्योपुर के 1 लाख 3 हजार किसानों को मिलेगा 100 करोड़ से अधिक मुआवजा
श्योपुर जिले के 428 ग्रामों के 1,03,78 किसानों को धान की फसल में हुए नुकसान के लिए 100 करोड़ 83 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा अन्य जिलों के किसानों को निम्नानुसार राशि दी जाएगी—
अन्य जिलों के मुआवजा विवरण
हरदा – 95,989 किसानों को सोयाबीन फसल क्षति पर 71 करोड़ 52 लाख रुपये
विदिशा – 51,830 किसानों को सोयाबीन व उड़द क्षति पर 29 करोड़ 15 लाख रुपये
नर्मदापुरम – 22,779 किसानों को सोयाबीन क्षति पर 19 करोड़ 84 लाख रुपये
धार – 19,173 किसानों को सोयाबीन व मक्का क्षति पर 10 करोड़ 31 लाख रुपये
खण्डवा – 12,961 किसानों को सोयाबीन में पीला मौजेक कीट क्षति पर 7 करोड़ 13 लाख रुपये
विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे मुख्यमंत्री
बड़ौदा में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जाएगा। इनमें प्रमुख हैं—
लोकार्पण
सेसईपुरा में 2 करोड़ 75 लाख की लागत से निर्मित आदिवासी बालक आश्रम
शिलान्यास
श्योपुर नर्सिंग कॉलेज भवन — 14 करोड़ 80 लाख
50 बिस्तरीय एकीकृत आयुष चिकित्सालय — 14 करोड़ 95 लाख
बागवानी व खाद प्रसंस्करण ज्ञान प्रसार केंद्र — 96 लाख
नवीन 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र
ग्राम लहरौनी — 2 करोड़ 61 लाख
ग्राम बलावनी — 2 करोड़ 53 लाख
ग्राम डाबीपुरा — 2 करोड़ 49 लाख
कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को भी लाभ वितरित किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर भारी विरोध का सामना कर रहे हैं। उनके हालिया विवादित बयान के बाद श्योपुर में ब्राह्मण समाज ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। समाज के लोग श्रीराम धर्मशाला से गोलंबर तक रैली निकालते हुए ”ब्राह्मण एकता जिन्दा बाद” “संतोष वर्मा मुर्दाबाद” के नारे लगाते जयस्तंभ चौक पहुंचे, जहां उनका पुतला दहन किया गया।
ब्राह्मण समाज के युवा पत्रकार बंटी उपाध्याय ने कहा कि “वर्मा का बयान बहन-बेटियों को लेकर पूरी तरह गलत था, समाज इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा।” श्योपुर में इस विरोध में सैकड़ों की भीड़ उमड़ी और समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए कार्रवाई की मांग की।
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विवादित बयान के बाद पुराने केस दोबारा सुर्खियों में
IAS संतोष वर्मा, जिन्हें हाल ही में AJAKS का नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, ने भोपाल में दिए एक बयान में ब्राह्मण समाज को लेकर टिप्पणी की थी। बयान वायरल होते ही प्रदेशभर में नाराजगी फैल गई और इसी के साथ उनके पुराने फर्जी दस्तावेज़ और गिरफ्तारी से जुड़े मामले फिर चर्चा में आ गए।
केस के डायरेक्ट लिंक (Stable / Permalink)
NDTV: IAS संतोष वर्मा के विवादित बयान और पुराने केस पर रिपोर्ट — डाइरेक्ट लिंक
Navbharat Times: फर्जी दस्तावेज़ और गिरफ्तारी का केस — डाइरेक्ट लिंक
Times of India: प्रमोशन और कोर्ट में फर्जी दस्तावेज़ — डाइरेक्ट लिंक
प्रमोशन के दौरान फर्जी दस्तावेज़ का आरोप
संतोष वर्मा ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा से IAS कैडर में प्रमोशन लिया था।
आरोप है कि उन्होंने इंदौर कोर्ट में दो संदिग्ध दस्तावेज़ जमा किए थे।
जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई थी।
इसी कारण उनकी पात्रता और प्रमोशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
गिरफ्तारी और लंबित केस
एमजी रोड थाना, इंदौर में FIR दर्ज है।
2021 में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, बाद में जमानत मिली।
केस की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी ने की थी।
चालान आज भी कोर्ट में पेश होने की प्रक्रिया में है।
नए बयान ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी
भोपाल में दिया गया उनका ताज़ा बयान प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयान की व्यापक निंदा हो रही है, और लोग पुराने मामलों को जोड़कर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि “इस तरह के रिकॉर्ड वाले अधिकारी को संवेदनशील जिम्मेदारी देना सिस्टम की गंभीर कमी को उजागर करता है।”
नए बयान ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी
भोपाल में दिया गया उनका ताज़ा बयान प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयान की व्यापक निंदा हो रही है, लेकिन वर्मा के अनुसार पूरा भाषण गलत ढंग से पेश किया गया था।
IAS संतोष वर्मा पर फिर विवादों के बादल, फर्जी दस्तावेज और गिरफ्तारी के पुराने केस आए सामने
भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश में अजाक्स (AJAKS) के नवनियुक्त अधिकारी IAS संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दिए गए उनके बयान ने राज्य के सामाजिक माहौल में हलचल मचा दी है। बयान के वायरल होते ही उनके पुराने फर्जीवाड़ा और गिरफ्तारी से जुड़े मामले एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे प्रशासनिक हलकों में चिंता गहरा गई है।
🔗 विस्तृत रिपोर्ट
https://www.aajtak.in/madhya-pradesh/story/mp-ias-santosh-verma-controversy-old-cases-resurface-lclar-strc-2396272-2025-11-25
प्रमोशन प्रक्रिया पर सबसे बड़े सवाल
संतोष वर्मा ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा से IAS कैडर में प्रमोशन लिया था। आरोप यह है कि इस प्रमोशन के दौरान उन्होंने इंदौर कोर्ट में दो संदिग्ध दस्तावेज़ जमा किए, जिनमें गलत जानकारी दिए जाने की बात जांच में सामने आई थी।
इन दस्तावेज़ों के चलते उनकी पात्रता और प्रमोशन प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।
गिरफ्तारी भी दर्ज, केस आज भी लंबित
एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज इस मामले में पुलिस ने संतोष वर्मा को 2021 में गिरफ्तार भी किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन केस की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा की गई और अब भी मामले का चालान कोर्ट में पेश होने की प्रक्रिया जारी है।
भोपाल में दिया गया उनका हालिया बयान विवादों का कारण बना। सोशल मीडिया पर बयान की निंदा होने लगी और इसी के साथ उनके फर्जी दस्तावेज व गिरफ्तारी से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के रिकॉर्ड वाले अधिकारी को जिम्मेदारी देना “सिस्टम की कमजोरी” को उजागर करता है।
श्योपुर जिले से 200 यात्रियों का कोटा, द्वारिका-सोमनाथ जायेगी यात्रा
श्योपुर, 23 नवंबर 2025 धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत श्योपुर जिले को द्वारिका-सोमनाथ तीर्थ यात्रा हेतु 200 यात्रियों का कोटा आवंटित किया गया है। यह तीर्थ यात्रा 11 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी। योजना का लाभ लेने के इच्छुक वरिष्ठ नागरिक 28 दिसंबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार श्योपुर तहसील क्षेत्र (नगरीय एवं ग्रामीण) के आवेदन जिला पंचायत श्योपुर में प्राप्त किए जाएंगे। जबकि अन्य तहसीलों के आवेदनों के लिए संबंधित तहसीलों में पृथक काउंटर स्थापित किए जाएंगे। इस कार्य के लिए नायब तहसीलदार स्तर के प्रभारी अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने बताया कि तीर्थ यात्रा दल 11 जनवरी 2026 को शिवपुरी से रवाना होगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, तथा महिला यात्रियों के लिए दो वर्ष की आयु छूट का प्रावधान है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि आवेदक आयकरदाता न हों।
आवश्यक पात्रता दस्तावेजों सहित आवेदन निर्धारित स्थानों पर प्रस्तुत कर योजना का लाभ लिया जा सकता है।
श्योपुर, 23 नवंबर 2025 एसआईआर-2026 के अंतर्गत गणना पत्रक भरने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के ओटीपी की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को जागरूक करते हुए कहा कि बीएलओ या किसी अन्य अधिकारी द्वारा फोन कॉल, मैसेज अथवा किसी माध्यम से ओटीपी, आधार नंबर या मोबाइल नंबर मांगना निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना, माता-पिता या दादा-दादी का विवरण प्राप्त करने के लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ या निकटतम हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त यह जानकारी ऑनलाइन voters.eci.gov.in एवं ceoelection.mp.gov.in पर भी उपलब्ध है।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि गणना पत्रक भरते समय केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट का ही उपयोग किया जाए तथा सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
ये रखें सावधानियाँ
ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी भी व्यक्ति से साझा न करें
प्रक्रिया के दौरान शुल्क, प्रोसेसिंग चार्ज या भुगतान माँगने वाले कॉल/मैसेज धोखाधड़ी हो सकते हैं
व्हॉट्सऐप/सोशल मीडिया पर प्राप्त संदिग्ध लिंक क्लिक न करें
“वोटर कार्ड रद्द हो जाएगा”, “तुरंत एसआईआर भरें” जैसे संदेशों से सतर्क रहें
साइबर कैफे में एसआईआर भरते समय ऑटो-सेव बंद रखें, ब्राउज़र इतिहास/कैश साफ करें और लॉगआउट करें
शिकायत कहाँ करें
संदिग्ध कॉल, लिंक या गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें:
श्योपुर, 22 नवंबर 2025 राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार त्रिस्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकायों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत 21 नवंबर को मतदान केन्द्रों पर मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया। इसी क्रम में शनिवार को अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय की अध्यक्षता में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित हुई, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को अंतिम मतदाता सूचियों की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) संजय जैन, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मांगीलाल फौजी, भाजपा से कैलाश नारायण गुप्ता, बसपा से कांशीराम सेंगर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी देते हुए उप जिला निर्वाचन अधिकारी संजय जैन ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत के अधीन वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य (मानपुर क्षेत्र) का 01 पद, सरपंच के 02 पद (नागदा एवं बैचाई) तथा पंच के 146 पद रिक्त हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन रिक्त पदों पर शीघ्र ही निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।