श्योपुर, 06 सितंबर 2025
जिले के किसानों के लिए खुशखबरी है। अब हैप्पी सीडर, सुपर सीडर एवं स्मार्ट सीडर को अनुदान पर खरीदने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक किसान ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल (👉 farmer.mpdage.org) पर 02 सितंबर से आवेदन कर सकते हैं।
सीडर की खासियत
ये यंत्र धान कटाई के बाद बिना जुताई किए गेहूँ व अन्य फसलों की बोनी करने में सहायक हैं। खेत में बची नरवाई व पराली को मिट्टी में मिला देते हैं, जिससे पराली जलाने की जरूरत नहीं होती और वही खेत में खाद का काम करती है।
कीमत व अनुदान
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हैप्पी सीडर: कीमत ₹2–2.50 लाख | अनुदान 40% या अधिकतम ₹86,400
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सुपर सीडर: कीमत ₹2.50–3 लाख | अनुदान 40% या अधिकतम ₹1,20,000
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स्मार्ट सीडर: कीमत ₹2–2.50 लाख | अनुदान 40% या अधिकतम ₹90,200
आवश्यक दस्तावेज
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आधार कार्ड
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जमीन की खतौनी व बी-1
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4500 रुपये का बैंक डिमांड ड्राफ्ट (सहायक कृषि यंत्री श्योपुर के नाम, किसान के स्वयं के खाते से)
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ट्रैक्टर का पंजीयन (45 एचपी से अधिक)
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बैंक खाते की प्रति
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एससी/एसटी किसानों हेतु जाति प्रमाण पत्र
आवेदन एमपी ऑनलाइन कियोस्क या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किए जा सकते हैं।
उप संचालक कृषि जी.के. पचौरिया ने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ और खेतों में पराली न जलाएँ।
पराली प्रबंधन बैठक
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में पंजाब से आए बेलर संचालकों और बायोफ्यूल प्लांट संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय हुआ कि:
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एनआरएलएम समूहों द्वारा 100 यूनिट पराली प्रबंधन सिस्टम (बेलर, सुपर सीडर, हे-रेक) खरीदे जाएंगे।
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पंजाब के संचालक 22 बेलर मशीनें उपलब्ध कराएंगे, जो प्रतिदिन करीब 2000 बीघा पराली काटकर बंडल बनाएंगे और इन्हें श्योपुर के बायोफ्यूल प्लांट को देंगे।
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एनआरएलएम समूहों को 80% सब्सिडी पर मशीनें दी जाएंगी, जिनसे प्रतिदिन लगभग 5000 बीघा पराली प्रबंधन होगा।
कलेक्टर का संदेश व दंड का प्रावधान
कलेक्टर वर्मा ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएँ, क्योंकि इससे भूमि की उर्वरता घटती है और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि पराली जलाने वालों पर अर्थदंड लगाया जाएगा –
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2 एकड़ तक – ₹2,500
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2 से 5 एकड़ – ₹5,000
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5 एकड़ से अधिक – ₹15,000
जागरूकता अभियान
कृषि विभाग गांव-गांव में शिविर लगाकर किसानों को जागरूक कर रहा है। साथ ही एनआरएलएम की महिलाएं भी समूहों के माध्यम से गांवों में जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करेंगी।
👉 जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष “नो पराली संकल्प” के साथ काम किया जा रहा है। किसानों को अनुदान व आधुनिक यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्यवाही भी होगी।
