गौमाता थीम पर सांस्कृतिक सर्किल का प्रस्ताव, सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी संगठन उठाने को तैयार
श्योपुर दिनांक 26/2/26
भीलवाड़ा। शहर को गौ-नगरी की पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गौसेवा मित्रमंडल एवं अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ के तत्वावधान में गौभक्तों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में काइन हाउस के समीप स्थित सर्किल को “कामधेनु सर्किल” के रूप में विकसित करने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में कहा गया कि भीलवाड़ा को धर्मनगरी और गौ-नगरी के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है, इसके बावजूद शहर में गौमाता के नाम पर कोई प्रमुख सर्किल या स्मारक नहीं है। अन्य शहरों की तर्ज पर भीलवाड़ा में भी एक आदर्श और प्रेरणादायी सर्किल विकसित किया जाना आवश्यक है।
संगठन के जिलाध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह ने बताया कि प्रस्तावित कामधेनु सर्किल को गौमाता की थीम पर सांस्कृतिक स्वरूप दिया जाएगा। इसमें गौमाता की प्रतिमा, आकर्षक सज्जा, हरियाली और सुव्यवस्थित लैंडस्केपिंग शामिल होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्किल के विकास और सौंदर्यीकरण की पूरी जिम्मेदारी संगठन स्वेच्छा से उठाएगा, जिससे नगर निगम पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा।
नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी ने पहल को सराहनीय बताते हुए प्रस्ताव पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
ज्ञापन सौंपते समय सुनील शर्मा, शुभम सोनी, शुभांशु जैन, अभिषेक चंडालिया, अमन शर्मा, देवराज सिंह चुण्डावत, सात्विक शर्मा, अनिल सोनी, दीपमाला, हर्षित ओझा, ऋतिक जैन, नरेंद्र बघेला सहित बड़ी संख्या में गौभक्त मौजूद रहे।
साफ संदेश—गौसंस्कृति को सम्मान, शहर को नई पहचान; ‘कामधेनु सर्किल’ बने भीलवाड़ा का गौरव।
रामेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार के लिए जुटे 4.06 लाख रुपए, जनसहयोग से गूंजा संकल्प
श्योपुर, 25 फरवरी 2026। छह दिन तक सीप नदी किनारे जनजागरण की अलख जगाने के बाद सीप संकल्प पदयात्रा का मंगलवार को रामेश्वर स्थित त्रिवेणी संगम पर समारोहपूर्वक समापन हुआ।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में 20 फरवरी से शुरू हुई यह पदयात्रा उद्गम स्थल पनवाड़ा से निकलकर विभिन्न ग्रामों में नदी संरक्षण का संदेश देती हुई रामेश्वर पहुंची।
समापन अवसर पर अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने त्रिवेणी संगम पर चुनरी चढ़ाकर पूजन-अर्चन किया और दीपदान कर सीप नदी संरक्षण का संकल्प दोहराया।
जनजागरण से जनसहयोग तक: 4 लाख से अधिक की निधि एकत्र
कार्यक्रम के दौरान रामेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 4 लाख 6 हजार 300 रुपए की सहयोग राशि जुटाई गई।
मुख्य सहयोग में—
बल्लू मीणा (जैनी) – 2 लाख रुपए
रामभरत मीणा (सरपंच जैनी) – 51 हजार रुपए
दीनबंधु मीणा (सोंठवा) – 51 हजार रुपए
बीपी सिंह सोई – 21 हजार रुपए
लक्ष्मीनारायण आर्य (सरपंच मानपुर) – 11 हजार रुपए
लोकेश तिवारी – 11 हजार रुपए
राममुकुट मीणा – 11 हजार रुपए
जगदीश शर्मा (मानपुर) – 11 हजार रुपए
विद्यासागर गौतम – 11 हजार रुपए
आदित्य चौहान – 11 हजार रुपए सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने भी सहयोग की घोषणा की।
पदयात्रा नेतृत्व का सम्मान, सहयात्रियों को प्रशस्ति पत्र
पदयात्रा का नेतृत्व करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश पाराशर, जयसिंह जादौन और आदित्य चौहान का साफा बांधकर सम्मान किया गया। यात्रा में शामिल सहयात्रियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके योगदान को सराहा गया।
नदी संरक्षण का संदेश
विरासत मध्यप्रदेश न्याय चैप्टर श्योपुर के बैनर तले आयोजित इस पदयात्रा ने सीप नदी के किनारे बसे गांवों में पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की स्वच्छता का संदेश दिया।
संदेश स्पष्ट है—सीप बचेगी तो संस्कृति बचेगी, विरासत बचेगी और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
नामांतरण, सीमांकन और बटवारा मामलों की कड़ी समीक्षा, लापरवाही पर वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश
श्योपुर, 25 फरवरी 2026
राजस्व मामलों में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने दो टूक कहा है कि सभी राजस्व अधिकारी अपने-अपने न्यायालयों में नियमित रूप से बैठें और नामांतरण, सीमांकन तथा बटवारा प्रकरणों का समयसीमा में निराकरण सुनिश्चित करें।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित राजस्व अधिकारियों की बैठक में डीएम ने लंबित प्रकरणों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जनता को अनावश्यक चक्कर न लगवाए जाएं।
बैठक में अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय, एसडीएम श्योपुर गगन सिंह मीणा, डिप्टी कलेक्टर संजय जैन, विजय शाक्य सहित सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौजूद रहे।
नामांतरण में गोरस सबसे पीछे, मानपुर अव्वल
अविवादित नामांतरण प्रकरणों की समीक्षा में गोरस वृत्त का निराकरण प्रतिशत 81.91 पाया गया, जबकि मानपुर वृत्त 93.33 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा। डीएम ने सभी अधिकारियों को 100 प्रतिशत निराकरण का लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए।
बटवारा और सीमांकन में मिश्रित तस्वीर
अविवादित बटवारा प्रकरणों में पहेला का निराकरण प्रतिशत 59.46 रहा, जबकि गोरस और रघुनाथपुर में 100 प्रतिशत निराकरण दर्ज किया गया।
सीमांकन प्रकरणों का कुल निराकरण 98.86 प्रतिशत रहा। बड़ौदा, विजयपुर, प्रेमसर, वीरपुर, अगरा, मानपुर और रघुनाथपुर में शत-प्रतिशत निराकरण दर्ज किया गया, जिसे डीएम ने सराहा।
अतिक्रमण रिपोर्ट नहीं देने पर नोटिस
डीएम ने पूर्व में मांगी गई अतिक्रमण रिपोर्ट प्रस्तुत न करने वाले तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के खिलाफ एक-एक वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
साथ ही राजस्व वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अब तक 4 करोड़ 58 लाख 31 हजार 730 रुपये की वसूली हो चुकी है। फसल गिरदावरी का कार्य भी शत-प्रतिशत पूर्ण करने के आदेश दिए गए।
संदेश साफ—राजस्व कामकाज में सुस्ती नहीं चलेगी, जनता को समय पर न्याय मिलना ही प्रशासन की प्राथमिकता है।
खेल प्रतिभाओं की धरती श्योपुर से एक और शानदार उपलब्धि सामने आई है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय श्योपुर के छात्र दिलीप शर्मा ने इंदौर में आयोजित महाविद्यालयीन राज्य स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में 88 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
दिलीप शर्मा इससे पहले जीवाजी विश्वविद्यालय की वेटलिफ्टिंग टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि ने महाविद्यालय और जिले दोनों को गौरवान्वित किया है।
इस उपलब्धि पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओपी शर्मा, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रमेश भारद्वाज, डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. लोकेंद्र सिंह जाट, खेल संयोजक प्रो. गुमान सिंह तथा जिला वेटलिफ्टिंग संघ के प्रतिनिधि सूरज भदौरिया ने दिलीप को सम्मानित किया।
प्राचार्य डॉ. ओपी शर्मा ने दिलीप को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
दिलीप की मेहनत और जज्बे ने साबित कर दिया—मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है।
20 मार्च तक मौका, जिले में 33 केन्द्र तय—ऑनलाइन भी कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन
श्योपुर, 25 फरवरी 2026
रबी सीजन में सरसों उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। भारत सरकार की डिफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) के तहत विपणन रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) के लिए सरसों फसल विक्रय हेतु पंजीयन प्रक्रिया 26 फरवरी से 20 मार्च तक चलेगी।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन के लिए जिले में 33 केन्द्र निर्धारित किए हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ ले सकें।
इन केन्द्रों पर होगा पंजीयन
उप संचालक कृषि जीके पचौरिया के अनुसार निम्न सहकारी संस्थाओं में पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी—
आवदा, कराहल, बड़ौदा, बोरदादेव, नयागांव तेहखण्ड, राडेप, लुहाड़, फिलोजपुरा, तलावड़ा, नयागांव ढोढपुर, उतनवाड़, ओछापुरा, रघुनाथपुर, वीरपुर, विजयपुर, सहसराम, श्योपुर, जलालपुरा, नागदा, सोंईकलां, नागरगावड़ा, आसीदा, वीजरपुर, ननावद, गोहेड़ा, दातरदा, मानपुर, सोंठवा, जावदेश्वर, तलावदा, गुरुनावदा और पाण्डोला सहित कुल 33 केन्द्रों पर किसान पंजीयन करा सकेंगे।
ऑनलाइन भी उपलब्ध सुविधा
किसान एमपी किसान ऐप के माध्यम से भी पंजीयन कर सकते हैं। इसके अलावा एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), लोकसेवा केन्द्र और निजी साइबर कैफे के जरिए भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।
क्यों जरूरी है पंजीयन?
भावांतर योजना के तहत यदि बाजार मूल्य और निर्धारित समर्थन मूल्य में अंतर आता है, तो उस अंतर की राशि किसानों के खाते में दी जाती है। इसलिए समय सीमा के भीतर पंजीयन कराना जरूरी है, ताकि फसल विक्रय के समय किसी तरह की परेशानी न हो।
किसानों के लिए साफ संदेश—20 मार्च से पहले पंजीयन कराएं, वरना योजना का लाभ छूट सकता है।
02 मार्च होलिका दहन, 03 मार्च रंगोत्सव; शांति समिति बैठक में प्रशासन अलर्ट
श्योपुर, 25 फरवरी 2026
रंग और गुलाल के पावन पर्व को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने साफ कहा है कि होली का त्योहार हर्ष, उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाए। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित शांति समिति की बैठक में उन्होंने सभी समुदायों से सौहार्दपूर्ण परंपरा को कायम रखने की अपील की।
बैठक में तय किया गया कि 02 मार्च को होलिका दहन और 03 मार्च को धुलेंडी (रंगोत्सव) मनाया जाएगा।
बिजली, स्वास्थ्य और सफाई व्यवस्था पर सख्त निर्देश
कलेक्टर ने बिजली विभाग को निर्देश दिए कि त्योहार के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो। होलिका दहन से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि स्थल के ऊपर बिजली के तार न हों। जहां तारों से खतरा हो, वहां पहले से सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों में इमरजेंसी सेवाएं सक्रिय रखने और चिकित्सकों की ड्यूटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सीएमओ को निर्देशित किया गया कि होली स्थलों पर मिट्टी डलवाने, साफ-सफाई और पानी के टैंकर की व्यवस्था की जाए। फायर स्टेशन पर दमकल वाहन अलर्ट मोड में रहेंगे।
आबकारी विभाग को शासन निर्देशानुसार होली के दिन शुष्क दिवस लागू करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने अपील की कि हानिकारक रंगों से बचें और सुरक्षित तरीके से पर्व मनाएं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, सोशल मीडिया पर भी नजर
पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल ने कहा कि परंपरागत स्थलों पर ही होलिका दहन किया जाए। पुलिस की निरंतर गश्त रहेगी और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर भी कड़ी निगरानी रहेगी। थाना स्तर पर होलिका दहन समितियों के साथ समन्वय बैठक के निर्देश दिए गए हैं।
ढेगदा डिपो से मिलेगी लकड़ी
शांति समिति की बैठक में लकड़ी की उपलब्धता को लेकर सुझाव सामने आए। डीएफओ केएस रंधा ने बताया कि वन विभाग के ढेगदा डिपो से 1890 रुपये प्रति चट्टा या 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से लकड़ी खरीदी जा सकती है। होलिका दहन समितियां निर्धारित शुल्क जमा कर लकड़ी प्राप्त कर सकेंगी।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डी बाई आदिवासी, अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय, एसडीएम गगन सिंह मीणा, बृजराज सिंह चौहान सहित विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, धर्मगुरु और अधिकारी मौजूद रहे।
संदेश साफ है—होली खुशियों की हो, लेकिन कानून और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं।
किन्तु अफ़सोस यह है की श्योपुर की जनता द्वारा चुना गया जन प्रतिनिधि वर्तमान बिधायक बाबु जण्डेल ही इन मीटिंगों में भाग नहीं ले पाते जब की पूर्व सभी आते है तो क्या बुलाते नहीं या आते नहीं अगर आते नहीं तो उनकी कमी उजागर होती है किन्तु बुलाया नहीं जाना प्रशाशन पर गहरे प्रश्न चिन्ह खड़े करता है
116 आवेदनों का मौके पर निराकरण, सलापुरा में मिट्टी-गिट्टी सड़क बनाने के निर्देश
श्योपुर 24 फरवरी 2026
श्योपुर में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न योजनाओं से जुड़े आवेदनों का मौके पर निराकरण किया। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सौम्या आनंद और अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों और मांगों पर सुनवाई की।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आवास योजना, पोषण आहार और खाद्यान पात्रता पर्ची से जुड़े मामलों में तत्काल निराकरण कर आवेदकों को लाभ की जानकारी दी गई। जनसुनवाई में कुल 116 आवेदन प्राप्त हुए।
तीन हितग्राहियों को 2-2 लाख की सहायता
जनसुनवाई में तीन हितग्राहियों को मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत की गई।
पाली रोड श्योपुर निवासी कल्याणी बैरवा, राडेप निवासी बबलू आदिवासी और ढोटी निवासी रामहेत बैरवा के आवेदनों का निराकरण करते हुए बताया गया कि ईपीओ जारी हो चुका है और शीघ्र ही राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
तीनों ने अपने परिजनों की सामान्य मृत्यु पर संबल योजना के तहत सहायता की मांग की थी। प्रशासन की इस कार्रवाई से संबंधित परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
सलापुरा में सड़क निर्माण के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान कलारना पंचायत अंतर्गत ग्राम सलापुरा के ग्रामीणों ने मार्ग की समस्या को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने ग्रामीण विकास विभाग को निर्देश दिए कि मिट्टी-गिट्टी डालकर सड़क निर्माण की कार्रवाई शीघ्र शुरू की जाए, ताकि आवागमन सुगम हो सके।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने से रोजमर्रा के कामकाज और आवागमन में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने समस्या के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।
जनसुनवाई में अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में एसडीएम गगन सिंह मीणा, डिप्टी कलेक्टर संजय जैन, विजय शाक्य सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
तालाब की पार काटकर सड़क निकालने की तैयारी? जल निकासी के नाम पर जमीन का खेल गरम
श्योपुर दिनांक 24/2/26
श्योपुर शहर में इन दिनों एक नई “खिचड़ी” पकने की चर्चा जोरों पर है। सवाल उठ रहा है—डॉक्टर कॉलोनी की जल निकासी के लिए प्रस्तावित नाला निर्माण वास्तव में जनहित की योजना है या फिर तालाब की पार से नई सड़क निकालकर कॉलोनाइजरों को सीधा लाभ पहुंचाने की रणनीति?
मामला केवल 80 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित नाले का नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जमीनों के संभावित व्यावसायिक फायदे का भी है। जानकारों का दावा है कि यदि तालाब की पार काटकर 50-60 फीट चौड़ा मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 552 से जोड़ दिया जाता है, तो आसपास की जमीनों की कीमत 10 लाख से सीधे 40-50 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
अब बड़ा सवाल—नाला सरकार बनाए, सड़क सरकार दे, और मुनाफा किसकी जेब में जाए?
जलभराव की असली पीड़ा
डॉक्टर कॉलोनी वर्षों से बरसात में जलभराव की त्रासदी झेल रही है। कई-कई दिन तक घरों से बाहर निकलना मुश्किल, मच्छरों का प्रकोप, बीमारियों का खतरा—ये सब वहां के रहवासियों की रोजमर्रा की हकीकत रही है।
कॉलोनी बसाने वाला कॉलोनाइजर प्लॉट बेचकर गायब हो गया, और लोग जलभराव की सजा भुगतते रहे। ऐसे में जब जिला प्रशासन ने नाला निर्माण की बात कही तो कॉलोनीवासियों ने कलेक्टर अर्पित वर्मा का स्वागत कर राहत की उम्मीद जताई।
लेकिन शहर में चर्चा इससे आगे बढ़ चुकी है।
तालाब की पार पर ‘रास्ता’ या ‘रिश्ता’?
सूत्रों के अनुसार डॉक्टर कॉलोनी से सटी सरका तालाब की पार के पीछे 40-50 बीघा भूमि पहले से खरीदी जा चुकी है। योजना है—तालाब की पार काटकर सीधा मार्ग निकाला जाए, जिससे नई कॉलोनियां राष्ट्रीय राजमार्ग 552 से जुड़ जाएं।
तालाब की पार काटना केवल राजस्व का विषय नहीं, यह पर्यावरणीय संतुलन का भी सवाल है।
क्या पर्यावरणीय अनुमति ली गई?
क्या जल संतुलन पर प्रभाव का अध्ययन हुआ?
क्या बाढ़ और जलभराव की नई आशंका पर कोई तकनीकी रिपोर्ट है?
या फिर पहले बुलडोजर चलेगा और कागज बाद में आएंगे?
डंडा दिखाने की सख्ती या स्थायी कार्रवाई?
दिसंबर में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सख्ती चर्चा में थी। बुलडोजर चले, नोटिस जारी हुए, कॉलोनाइजरों में हड़कंप मचा। लेकिन फरवरी आते-आते सन्नाटा क्यों?
अब शहर में सवाल उठ रहे हैं—
क्या सख्ती केवल ‘दिसंबर ड्राइव’ थी?
कितनी कॉलोनियों पर अंतिम कार्रवाई हुई?
कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई?
कितनी जमीन सरकारी खाते में वापस आई?
यदि कार्रवाई निर्णायक है तो आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं?
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
राज्य स्तर की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन का कथित बयान—“कोई कलेक्टर बिना पैसे के काम नहीं करता”—व्यवस्था पर तीखा व्यंग माना गया। अब यह सवाल श्योपुर के संदर्भ में और गूंज रहा है—क्या सख्ती की धार दबाव की राजनीति में कुंद हो गई?
राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पहले डर दिखाया जाता है, फिर बातचीत होती है, और अंत
श्योपुर नगर पालिका प्रकरण में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल, मुख्य सचिव को 15 दिन में रिपोर्ट का आदेश
श्योपुर | Crime National News
श्योपुर नगर पालिका परिषद से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिविल रिवीजन क्रमांक 175/2024 (सुमेर सिंह बनाम रेनू गर्ग एवं अन्य) में 19 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिया कि पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नजर नहीं आती।
आयुक्त की कार्यशैली पर कोर्ट की फटकार
सुनवाई के दौरान चंबल संभाग, मुरैना के आयुक्त सुरेश कुमार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने पाया कि कोर्ट कार्यवाही का वीडियो लिंक अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा किया गया। इसे अदालत ने गंभीर कदाचार और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की श्रेणी का मामला माना।
व्यक्तिगत उपस्थिति में आयुक्त ने स्वीकार किया कि उन्होंने श्योपुर कलेक्टर को कोई विधिवत नोटिस जारी नहीं किया था। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि “सद्भावना” का अर्थ यह नहीं कि बिना तथ्यात्मक सत्यापन के निष्कर्ष निकाल दिए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी जांच में उचित सावधानी और विधिसम्मत प्रक्रिया अनिवार्य है।
क्लीन चिट पर कोर्ट की कड़ी नाराज़गी
राज्य शासन की ओर से 13 फरवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि श्योपुर कलेक्टर (रिटर्निंग ऑफिसर) को दोषमुक्त पाया गया है।
लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पूछा—
क्या कलेक्टर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया?
क्या उनका विधिवत स्पष्टीकरण लिया गया?
इन प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। न्यायालय ने टिप्पणी की कि बिना समुचित जांच “क्लीन चिट” देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही या पक्षपात का संकेत है। अदालत ने जांच रिपोर्ट को प्रथम दृष्टया “दागी” बताते हुए असंतोष व्यक्त किया।
निर्वाचन प्रक्रिया में विरोधाभास उजागर
अदालत ने स्पष्ट किया कि रिटर्निंग ऑफिसर निर्वाचन आयोग के अधीन कार्य करता है। बिना निर्वाचन आयोग की अनुमति कोई भी ओआईसी उसका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
इसके बावजूद—
राज्य शासन ने राजपत्र अधिसूचना से पूर्व पदभार ग्रहण को अनुचित बताया।
वहीं कलेक्टर-सह-रिटर्निंग ऑफिसर ने नगरपालिका अधिनियम की धारा 55 के तहत प्रथम बैठक के तुरंत बाद पदभार ग्रहण की अनुमति दे दी।
न्यायालय ने इस विरोधाभासी रुख को गंभीर प्रशासनिक विसंगति बताया।
मुख्य सचिव को सीधी जांच का आदेश
अदालत ने मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि—
श्योपुर कलेक्टर (रिटर्निंग ऑफिसर) के आचरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करें।
स्पष्ट करें कि क्या निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना ओआईसी प्रतिनिधित्व कर सकता है?
चंबल आयुक्त की भूमिका और आचरण की समीक्षा करें।
15 दिन के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। अंतिम निर्णय तक अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।
“न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश सहन नहीं”
खंडपीठ ने सख्त शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।
राज्य शासन द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत दायर आवेदन में ओआईसी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आवेदन विधिवत स्वीकृति से दायर हुआ या नहीं। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास माना।
लंबित रखने की कोशिश पर भी टिप्पणी
अदालत ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार पूर्व में चुनाव अधिकरण के आदेश का समर्थन कर चुकी थी और अंतरिम आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी भी दायर की थी, जहां उसे सफलता नहीं मिली।
अब उसी आदेश से दूरी बनाना अदालत को संदिग्ध प्रतीत हुआ। न्यायालय ने संकेत दिया कि पूरा घटनाक्रम मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखने का प्रयास दर्शाता है।
जवाबदेही तय होना तय
इस आदेश के बाद साफ है कि उच्च न्यायालय प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के मूड में है। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
श्योपुर की सियासत और प्रशासन—दोनों के लिए यह प्रकरण निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
शहर के घाटों पर पहुंची सीप संकल्प पदयात्रा, जनभागीदारी से मजबूत हो रहा ‘नदी बचाओ’ अभियान
श्योपुर, 23 फरवरी 2026
सीप नदी संरक्षण को लेकर जारी सीप संकल्प पदयात्रा चौथे दिन शहर के विभिन्न घाटों पर पहुंची, जहां श्रद्धा और जनजागरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। पदयात्रियों ने सीप नदी को चुनरी चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और नदी संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
यह पदयात्रा कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में संचालित हो रही है, जिसका उद्देश्य जनसहभागिता से नदी और जल स्रोतों के संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है।
मलपुरा से शुरू होकर शहर के घाटों तक पहुंची यात्रा
चौथे दिन पदयात्रा मलपुरा से प्रारंभ होकर सोनेश्वर महादेव सोनघाटा पहुंची, जहां स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया। इसके बाद पंडित घाट, जती घाट और गिर्राज घाट सहित विभिन्न स्थानों पर यात्रियों का पारंपरिक अभिनंदन किया गया। हर पड़ाव पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया गया।
घाटों पर संगोष्ठी, जल स्वच्छता और संरक्षण पर जोर
जती घाट पर आयोजित संगोष्ठी में नदी संरक्षण, जल स्वच्छता और प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने पर विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित नागरिकों ने संकल्प लिया कि
नदी में गंदगी और प्लास्टिक नहीं डालेंगे,
जल स्रोतों को संरक्षित रखेंगे,
सामूहिक जिम्मेदारी से पर्यावरण संतुलन बनाएंगे।
बंजारा डैम से रायपुरा तक जागरूकता का सिलसिला
पदयात्रा आगे बढ़ते हुए बंजारा डैम के रंग घाट और शंकर जी मंदिर पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। भोजन अवकाश के बाद यात्रा रायपुरा के लिए रवाना हुई और शासकीय हाईस्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को जल संरक्षण का संदेश दिया गया। जाटखेड़ा में जन अभियान परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत कर अभियान को समर्थन दिया।
सीप नदी के जति घाट पर समिति अध्यक्ष #कुंजबिहारी सर्राफ के नेतृत्व में सीप संकल्प पदयात्रा के सहभागियों का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान #नाथूलाल सोनी, #डॉ_शंभु_गुप्ता, #रामबाबू_बाथम, #देवी_सिंह_कुशवाह सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। यहां आयोजित संगोष्ठी में नदी संरक्षण, जल स्वच्छता तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम से पूर्व श्रद्धालुओं ने सीप मैया को चुनरी चढ़ाकर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
इसके उपरांत पदयात्रा गिर्राज घाट होते हुए बंजारा डैम पहुंची। बंजारा डैम के रंग घाट एवं शंकर जी मंदिर पर आयोजित कार्यक्रम में #विनोद_हरदैनिया, #महेश_शिवहरे, #सुनील_बाथम, #राहुल_शिवहरे, #सागर_सुमन, #महेन्द्र_आर्य, #पं_सूरज_शर्मा, #देशराज_जाट सहित स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का स्वागत किया।
बंजारा डैम पर भोजन अवकाश के बाद यात्रा अगले पड़ाव रायपुरा के लिए रवाना हुई, जहां शासकीय हाईस्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य #ओपी_भाटिया, #बृजराज_सिंह_जाट एवं #चन्द्रप्रकाश_गुप्ता ने माल्यार्पण कर पदयात्रियों का अभिनंदन किया।
आस्था और पर्यावरण का अनोखा संगम
पूरे मार्ग में पदयात्रा ने यह संदेश दिया कि नदी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन, कृषि और संस्कृति की आधारशिला है। जनभागीदारी से ही जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव है और यही इस यात्रा का मूल उद्देश्य है।
25 फरवरी को होगा भव्य समापन
सीप संरक्षण का यह जनअभियान 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर सामूहिक संकल्प कार्यक्रम के साथ सम्पन्न होगा।
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