Friday, May 15, 2026
Home Blog Page 17

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ सख्त नगर पालिका प्रकरण में तीखे सवाल

श्योपुर नगर पालिका प्रकरण में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल, मुख्य सचिव को 15 दिन में रिपोर्ट का आदेश

श्योपुर | Crime National News

श्योपुर नगर पालिका परिषद से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य शासन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिविल रिवीजन क्रमांक 175/2024 (सुमेर सिंह बनाम रेनू गर्ग एवं अन्य) में 19 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिया कि पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नजर नहीं आती।


आयुक्त की कार्यशैली पर कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान चंबल संभाग, मुरैना के आयुक्त सुरेश कुमार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने पाया कि कोर्ट कार्यवाही का वीडियो लिंक अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा किया गया। इसे अदालत ने गंभीर कदाचार और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की श्रेणी का मामला माना।

व्यक्तिगत उपस्थिति में आयुक्त ने स्वीकार किया कि उन्होंने श्योपुर कलेक्टर को कोई विधिवत नोटिस जारी नहीं किया था। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि “सद्भावना” का अर्थ यह नहीं कि बिना तथ्यात्मक सत्यापन के निष्कर्ष निकाल दिए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी जांच में उचित सावधानी और विधिसम्मत प्रक्रिया अनिवार्य है।


क्लीन चिट पर कोर्ट की कड़ी नाराज़गी

राज्य शासन की ओर से 13 फरवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि श्योपुर कलेक्टर (रिटर्निंग ऑफिसर) को दोषमुक्त पाया गया है।

लेकिन अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पूछा—

  • क्या कलेक्टर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया?

  • क्या उनका विधिवत स्पष्टीकरण लिया गया?

इन प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। न्यायालय ने टिप्पणी की कि बिना समुचित जांच “क्लीन चिट” देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही या पक्षपात का संकेत है। अदालत ने जांच रिपोर्ट को प्रथम दृष्टया “दागी” बताते हुए असंतोष व्यक्त किया।


निर्वाचन प्रक्रिया में विरोधाभास उजागर

अदालत ने स्पष्ट किया कि रिटर्निंग ऑफिसर निर्वाचन आयोग के अधीन कार्य करता है। बिना निर्वाचन आयोग की अनुमति कोई भी ओआईसी उसका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।

इसके बावजूद—

  • राज्य शासन ने राजपत्र अधिसूचना से पूर्व पदभार ग्रहण को अनुचित बताया।

  • वहीं कलेक्टर-सह-रिटर्निंग ऑफिसर ने नगरपालिका अधिनियम की धारा 55 के तहत प्रथम बैठक के तुरंत बाद पदभार ग्रहण की अनुमति दे दी।

न्यायालय ने इस विरोधाभासी रुख को गंभीर प्रशासनिक विसंगति बताया।


मुख्य सचिव को सीधी जांच का आदेश

अदालत ने मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि—

  • श्योपुर कलेक्टर (रिटर्निंग ऑफिसर) के आचरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच करें।

  • स्पष्ट करें कि क्या निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना ओआईसी प्रतिनिधित्व कर सकता है?

  • चंबल आयुक्त की भूमिका और आचरण की समीक्षा करें।

  • 15 दिन के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। अंतिम निर्णय तक अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।


“न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश सहन नहीं”

खंडपीठ ने सख्त शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।

राज्य शासन द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत दायर आवेदन में ओआईसी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि आवेदन विधिवत स्वीकृति से दायर हुआ या नहीं। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास माना।


लंबित रखने की कोशिश पर भी टिप्पणी

अदालत ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार पूर्व में चुनाव अधिकरण के आदेश का समर्थन कर चुकी थी और अंतरिम आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी भी दायर की थी, जहां उसे सफलता नहीं मिली।

अब उसी आदेश से दूरी बनाना अदालत को संदिग्ध प्रतीत हुआ। न्यायालय ने संकेत दिया कि पूरा घटनाक्रम मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखने का प्रयास दर्शाता है।


जवाबदेही तय होना तय

इस आदेश के बाद साफ है कि उच्च न्यायालय प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के मूड में है। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

श्योपुर की सियासत और प्रशासन—दोनों के लिए यह प्रकरण निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

(Crime National News | high Court News | MP High Court Gwalior Bench | Sheopur Nagar Palika Case | Administrative Accountability | Election Dispute 2026)

सीप मैया को चुनरी चढ़ाकर हुआ पूजन-अर्चन, घाट-घाट गूंजा नदी संरक्षण का संकल्प

शहर के घाटों पर पहुंची सीप संकल्प पदयात्रा, जनभागीदारी से मजबूत हो रहा ‘नदी बचाओ’ अभियान

श्योपुर, 23 फरवरी 2026

सीप नदी संरक्षण को लेकर जारी सीप संकल्प पदयात्रा चौथे दिन शहर के विभिन्न घाटों पर पहुंची, जहां श्रद्धा और जनजागरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। पदयात्रियों ने सीप नदी को चुनरी चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया और नदी संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।

यह पदयात्रा कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में संचालित हो रही है, जिसका उद्देश्य जनसहभागिता से नदी और जल स्रोतों के संरक्षण को जनआंदोलन बनाना है।


मलपुरा से शुरू होकर शहर के घाटों तक पहुंची यात्रा

चौथे दिन पदयात्रा मलपुरा से प्रारंभ होकर सोनेश्वर महादेव सोनघाटा पहुंची, जहां स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया। इसके बाद पंडित घाट, जती घाट और गिर्राज घाट सहित विभिन्न स्थानों पर यात्रियों का पारंपरिक अभिनंदन किया गया।
हर पड़ाव पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया गया।


घाटों पर संगोष्ठी, जल स्वच्छता और संरक्षण पर जोर

जती घाट पर आयोजित संगोष्ठी में नदी संरक्षण, जल स्वच्छता और प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने पर विस्तार से चर्चा हुई। उपस्थित नागरिकों ने संकल्प लिया कि

  • नदी में गंदगी और प्लास्टिक नहीं डालेंगे,

  • जल स्रोतों को संरक्षित रखेंगे,

  • सामूहिक जिम्मेदारी से पर्यावरण संतुलन बनाएंगे।


बंजारा डैम से रायपुरा तक जागरूकता का सिलसिला

पदयात्रा आगे बढ़ते हुए बंजारा डैम के रंग घाट और शंकर जी मंदिर पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। भोजन अवकाश के बाद यात्रा रायपुरा के लिए रवाना हुई और शासकीय हाईस्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को जल संरक्षण का संदेश दिया गया।
जाटखेड़ा में जन अभियान परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत कर अभियान को समर्थन दिया।


सीप नदी के जति घाट पर समिति अध्यक्ष #कुंजबिहारी सर्राफ के नेतृत्व में सीप संकल्प पदयात्रा के सहभागियों का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान #नाथूलाल सोनी, #डॉ_शंभु_गुप्ता, #रामबाबू_बाथम, #देवी_सिंह_कुशवाह सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। यहां आयोजित संगोष्ठी में नदी संरक्षण, जल स्वच्छता तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम से पूर्व श्रद्धालुओं ने सीप मैया को चुनरी चढ़ाकर विधिवत पूजन-अर्चन किया।


इसके उपरांत पदयात्रा गिर्राज घाट होते हुए बंजारा डैम पहुंची। बंजारा डैम के रंग घाट एवं शंकर जी मंदिर पर आयोजित कार्यक्रम में #विनोद_हरदैनिया, #महेश_शिवहरे, #सुनील_बाथम, #राहुल_शिवहरे, #सागर_सुमन, #महेन्द्र_आर्य, #पं_सूरज_शर्मा, #देशराज_जाट सहित स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का स्वागत किया।


बंजारा डैम पर भोजन अवकाश के बाद यात्रा अगले पड़ाव रायपुरा के लिए रवाना हुई, जहां शासकीय हाईस्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य #ओपी_भाटिया, #बृजराज_सिंह_जाट एवं #चन्द्रप्रकाश_गुप्ता ने माल्यार्पण कर पदयात्रियों का अभिनंदन किया।


आस्था और पर्यावरण का अनोखा संगम

पूरे मार्ग में पदयात्रा ने यह संदेश दिया कि नदी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन, कृषि और संस्कृति की आधारशिला है।
जनभागीदारी से ही जल स्रोतों का पुनर्जीवन संभव है और यही इस यात्रा का मूल उद्देश्य है।


25 फरवरी को होगा भव्य समापन

सीप संरक्षण का यह जनअभियान 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर सामूहिक संकल्प कार्यक्रम के साथ सम्पन्न होगा।


 Seep Sankalp Yatra Sheopur, Seep River Puja News, River Conservation Campaign MP, Jal Sanrakshan Abhiyan, Sheopur Environment News, Banjara Dam Sheopur, Save River Movement India.

#कुंजबिहारी_सर्राफ
#नाथूलाल_सोनी

#CrimeNationalNews

#रामबाबू_बाथम
#विनोद_हरदैनिया
#देशराज_जाट
#बृजराज_सिंह_जाट

मलपुरा पहुंची सीप संकल्प पदयात्रा, गीतों के साथ गूंजा ‘नदी बचाओ’ का जनसंदेश

गांव-गांव मिल रहा जनसमर्थन, पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल

श्योपुर, 22 फरवरी 2026

जिले की जीवनरेखा सीप नदी के संरक्षण के लिए निकली सीप संकल्प पदयात्रा तीसरे दिन मलपुरा पहुंच गई। पदयात्री नयागांव से यात्रा प्रारंभ कर फतेहपुर, जानपुरा और मऊ होते हुए रात्रि पड़ाव के लिए मलपुरा पहुंचे। यात्रा के दौरान पदयात्री सीप के गीत गाते हुए आगे बढ़ रहे हैं और ग्रामीणों को नदी संरक्षण व पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं।

यह पदयात्रा कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी से नदी पुनर्जीवन की भावना को मजबूत करना है।


रास्तेभर स्वागत, परंपराओं के साथ जुड़ रहा जनसमर्थन

यात्रा जहां-जहां पहुंच रही है, वहां ग्रामीण पारंपरिक तरीके से स्वागत कर रहे हैं। फतेहपुर, सेमल्दा और आसपास के गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया और अभियान को समर्थन दिया।
नायब तहसीलदार सहित विभिन्न अधिकारी भी यात्रा में शामिल होकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।


अपर कलेक्टर भी हुए शामिल, दिया संरक्षण का संदेश

मऊ से मलपुरा तक यात्रा में अपर कलेक्टर #रूपेश उपाध्याय भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य केवल यात्रा करना नहीं, बल्कि समाज में नदियों और प्राचीन जलस्रोतों को सहेजने की चेतना जगाना है।
उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से संवाद करते हुए प्रकृति संरक्षण, बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।


मानस मंडलों को भेंट की गई रामचरितमानस

ग्राम मऊ और मलपुरा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान मंदिरों में नियमित पाठ करने वाले मानस मंडलों को श्रीरामचरित मानस भेंट की गई। इसके माध्यम से सांस्कृतिक परंपरा और पर्यावरण चेतना को साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।


जागरूकता से जनभागीदारी तक — अभियान बन रहा आंदोलन

ग्रामीणों को समझाया गया कि

  • नदी संरक्षण सीधे जीवन और कृषि से जुड़ा है,

  • जल स्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है,

  • स्वच्छता, वृक्षारोपण और जल बचत से ही नदी का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा।

मऊ में कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने पदयात्रियों को सम्मानपूर्वक मलपुरा के लिए विदा किया, जहां प्रवेश पर आत्मीय स्वागत हुआ।


25 फरवरी को त्रिवेणी संगम पर होगा समापन

सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों के नेतृत्व में जारी यह पदयात्रा 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर समापन के साथ एक बड़े सामूहिक संकल्प में परिवर्तित होगी।


 Seep Sankalp Yatra Malpura, Seep River Awareness Sheopur, Environment Campaign MP, River Conservation Movement, Jal Sanrakshan Sheopur, Padyatra News Madhya Pradesh, Rural Environment Awareness.

सीप बचाने निकली जनचेतना की पदयात्रा, गांव-गांव गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश

पनार में जागरूकता सभा, ग्रामीणों ने लिया नदी बचाने का संकल्प — 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर होगा समापन

बंजारा डेम पर बोट क्लब करोड़ों खर्च नासेल्चियों और अय्यासी का अड्डा बना हुआ है गंदे नाले प्रशासन ने डाले कर गंदगी मचाई है उसे तो साफ करवा लेते प्रशासन

श्योपुर, 20 फरवरी 2026

जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली सीप नदी के संरक्षण को लेकर निकली “सीप संकल्प पदयात्रा” पूरे उत्साह और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ रही है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में आयोजित यह पदयात्रा नदी किनारे बसे गांवों में पर्यावरण चेतना की अलख जगा रही है।


उद्गम स्थल से शुरू होकर गांव-गांव पहुंच रहा संदेश

पदयात्रा का शुभारंभ उद्गम स्थल पनवाड़ा से हुआ था। दो दिन की यात्रा के बाद पदयात्री नयागांव पहुंच गए हैं। रास्ते में गोरस में रात्रि विश्राम के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक स्वागत कर यात्रा को आगे रवाना किया।
तटवर्ती मार्गों से गुजरती यह यात्रा जब पनार पहुंची तो स्थानीय नागरिकों ने फूलों से स्वागत किया और सामुदायिक बैठक आयोजित कर नदी संरक्षण का संकल्प लिया।

श्योपुर में सीप की असल हालत देखो लिंक टच करो


जल, जंगल और जीवन बचाने का जन अभियान

पनार में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ग्रामीणों को समझाया गया कि

  • नदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा है।

  • स्वच्छता, नशामुक्ति और पर्यावरण संतुलन से ही जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे।

  • सामुदायिक सहभागिता से ही नदी पुनर्जीवन संभव है।

यात्रा के दौरान गांवों में संवाद, शपथ और जनसंपर्क के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त तट और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया जा रहा है।


रामेश्वर मंदिर में हुआ जलाभिषेक, नदी पूजन

मठ होते हुए यात्रा नयागांव स्थित रामेश्वर मंदिर पहुंची, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पदयात्रियों की अगवानी की। यहां सीप नदी का पूजन कर महादेव का जलाभिषेक किया गया तथा जल स्वच्छता और संरक्षण पर संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ।


सामाजिक कार्यकर्ताओं की अगुवाई में सतत अभियान

पदयात्रा सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से निरंतर आगे बढ़ रही है। अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता नहीं, बल्कि जनसहभागिता से नदी संरक्षण को जनांदोलन बनाना है।


25 फरवरी को होगा संगम पर समापन

यह जनजागरण यात्रा 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर समापन के साथ पूर्ण होगी, जहां सामूहिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।


 Seep Sankalp Padyatra Sheopur, Seep River Conservation, Environment Awareness MP, River Protection Campaign, Sheopur Environmental Movement, Jal Sanrakshan Abhiyan, Madhya Pradesh Ecology News.

विधानसभा घेराव को लेकर श्योपुर में कांग्रेस की हुंकार, जिला अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खोला मोर्चा

किसानों के हितों पर ‘समझौता नहीं’ — सोयाबीन, मक्का, कपास पर खतरे का आरोप

24 फरवरी के भोपाल कूच का ऐलान, किसानों के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई का दावा

श्योपुर दिनांक 21/2/26

श्योपुर मध्य प्रदेश कांग्रेस द्वारा 24 फरवरी को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर श्योपुर में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष #मांगीलाल फोजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आंदोलन की रणनीति और उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी।

फोजी ने कहा कि प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भोपाल पहुँचकर विधानसभा का घेराव करेंगे। यह आंदोलन प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध, किसानों के हितों की रक्षा और प्रदेश सरकार पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर किया जा रहा है।


“ट्रेड डील से प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा सीधा असर”

जिला अध्यक्ष ने कहा कि यदि कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी होती है तो मध्य प्रदेश के सोयाबीन, मक्का और कपास उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कृषि उत्पादों की आमद बढ़ने से स्थानीय मंडियों में दाम गिरेंगे, जिससे किसान, व्यापारी और कृषि आधारित उद्योग तीनों प्रभावित होंगे।


छोटे किसान बनाम बड़े विदेशी फार्म — असमान प्रतिस्पर्धा

फोजी ने कहा कि भारत में औसत जोत 1 से 1.5 हेक्टेयर है, जबकि अमेरिका में सैकड़ों हेक्टेयर में खेती होती है और वहां किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है।
ऐसी स्थिति में खुला आयात भारतीय किसानों को असमान प्रतिस्पर्धा में धकेल देगा।


ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट की चेतावनी

प्रेस वार्ता में कहा गया कि इस प्रकार के व्यापार समझौते से

  • मंडी व्यवस्था कमजोर होगी,

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा,

  • ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी संकट गहराएगा,

  • रोजगार और कृषि आधारित कारोबार प्रभावित होंगे।


कार्यकर्ताओं से भोपाल पहुंचने का आह्वान

जिला कांग्रेस ने श्योपुर जिले के कार्यकर्ताओं, किसानों और आमजन से 24 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में भोपाल पहुंचकर लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
फोजी ने कहा कि यह आंदोलन किसानों की आजीविका और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था बचाने की लड़ाई है।


 Sheopur Congress News, Mangi Lal Foji Press Conference, Bhopal Vidhan Sabha Gherao, MP Farmers Protest 2026, India US Trade Deal Impact, Soybean Farmers MP, Political News Sheopur, Congress Protest Madhya Pradesh.

हर शिशु का जीवन अनमोल, असुरक्षित स्थान पर छोड़ना अपराध — डीएम की सख्त अपील

नवजात मिले तो तुरंत अस्पताल पहुँचाएँ, मदद करने वाले को नहीं होगी कोई कानूनी परेशानी

श्योपुर, 21 फरवरी 2026

जिले में नवजात शिशुओं को झाड़ियों, सुनसान स्थानों और खुले में छोड़ने की घटनाओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा ने इसे समाज और मानवता के लिए गंभीर चिंता बताते हुए कहा है कि प्रत्येक शिशु का जीवन, सुरक्षा और संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।

डीएम ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं कोई नवजात शिशु परित्यक्त अवस्था में मिले तो सबसे पहले उसे नजदीकी अस्पताल पहुँचाकर मानव धर्म निभाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चे को अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, इसलिए लोग डरें नहीं बल्कि आगे आकर जीवन बचाने में सहयोग करें।


पालन-पोषण में असमर्थ हैं तो सुरक्षित विकल्प अपनाएँ

महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी कारणवश माता-पिता बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं, तो उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ना दण्डनीय अपराध है।
ऐसी स्थिति में शिशु को निम्न सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा सकता है—

  • वन स्टॉप सेंटर

  • जिला अस्पताल

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र

  • पुलिस थाना या डायल 112 के माध्यम से सूचना

  • 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन

  • बाल कल्याण समिति को जानकारी


पहचान रहेगी पूरी तरह गोपनीय

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षित स्थान पर शिशु छोड़ने वाले व्यक्ति या संभावित माता-पिता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

  • बच्चे को तुरंत स्वास्थ्य परीक्षण व देखभाल दी जाएगी।

  • 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

  • अभिभावक द्वारा नहीं अपनाने की स्थिति में बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण हेतु मुक्त घोषित किया जाएगा।

  • विशेषज्ञ शिशु गृह में उसका पालन-पोषण किया जाएगा और वैधानिक प्रक्रिया से गोद दिलाया जाएगा।


अमानवीय त्याग नहीं, सुरक्षित जीवन का विकल्प चुनें”

जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि बच्चे को असुरक्षित स्थान पर छोड़ना न केवल अमानवीय है बल्कि कानूनन अपराध भी है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर बच्चे को सौंपना उसे नया जीवन देने और खतरे से बचाने का संवेदनशील व जिम्मेदार तरीका है।


Sheopur News, नवजात शिशु परित्याग कानून, Child Helpline 1098, बाल संरक्षण मध्यप्रदेश, Adoption Process India, District Administration Appeal, Women and Child Development Advisory.

सपना हुआ साकार: हेलीकॉप्टर से बहू को घर लाया किसान परिवार, भावुक कर गया अनोखा विवाह

श्योपुर दिनांक 21/2/26

श्योपुर जिले में एक किसान परिवार का वर्षों पुराना सपना उस समय साकार हो गया, जब बहू की विदाई हेलीकॉप्टर से हुई और पूरा गांव इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना।
बड़ौदा क्षेत्र के राजपुरा निवासी परम्परागत पटेल भैरूलाल जी के बेटे शिवराज सिंह की पुत्री रीना का विवाह रामसिंह मीणा के पुत्र अजय के साथ हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं था, बल्कि एक दादा के उस सपने की पूर्ति थी, जिसमें वे अपनी बहू को हेलीकॉप्टर से घर लाना चाहते थे। वर्षों पहले देखा गया यह सपना अब हकीकत बन चुका था।

विवाह उपरांत जब दूल्हा-दुल्हन हेलीकॉप्टर में सवार हुए, तो आसपास के ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई इस अद्भुत क्षण को अपनी आंखों में कैद करना चाहता था। हेलीकॉप्टर से उड़ान भरकर नवदंपति जेदा पहुंचे, जहां उनका स्वागत देखने लायक था। पूरा परिवार हेलीकॉप्टर के पास मौजूद रहा और लोगों के चेहरों पर शांतिपूर्वक संपन्न हुए विवाह की खुशी साफ झलक रही थी।

                              वीडियो देखें 

दूल्हे के चाचा धारा सिंह ने भावुक स्वर में बताया कि दूल्हे के दादा की हमेशा यही इच्छा थी—“हमारी बहू पहली बार घर आए तो हेलीकॉप्टर से आए।” आज एक साधारण किसान परिवार ने अपनी मेहनत और संकल्प से उस सपना को सच कर दिखाया।

गांव में यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था। खेतों में काम करने वाले हाथ आज आशीर्वाद देने उठे थे, बुजुर्गों की आंखें नम थीं, और युवाओं में उत्साह था कि उनके गांव में ऐसा अनोखा विवाह हुआ है।
इस अनूठी बारात और विदाई ने पूरे श्योपुर जिले में चर्चा का विषय बनकर यह संदेश दिया कि सपने बड़े हों तो साधन नहीं, संकल्प मायने रखता है।

यह शादी आधुनिकता और ग्रामीण संस्कारों का ऐसा संगम बन गई, जिसने हर दिल को छू लिया—जहां हेलीकॉप्टर की उड़ान में भी मिट्टी की खुशबू साथ रही।

हेलीकॉप्टर से निकली बारात, भावनाओं और परंपरा के संग यादगार बना विवाह

श्योपुर  20 फरवरी 2026

ग्रामीण अंचल की सादगी भरी धरती पर उस समय एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब श्योपुर जिले के जेदा गांव में दूल्हा हेलीकॉप्टर से बारात लेकर रवाना हुआ। यह केवल एक शादी नहीं थी, बल्कि एक पिता के सपने, परिवार की खुशियों और परंपराओं के सम्मान का संगम बन गई।  

दूल्हे के पिता राम सिंह मीणा की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि उनके बेटे की बारात कुछ अलग हो—ऐसी जिसे लोग याद रखें, और जिसमें बेटे की नई जिंदगी की शुरुआत आसमान की ऊंचाइयों जितनी शुभ मानी जाए। पुत्र अजय के विवाह पर परिवार ने इस सपने को साकार किया। जैसे ही हेलीकॉप्टर गांव में उतरा, खेत-खलिहानों से लोग दौड़ पड़े। बच्चों की आंखों में कौतूहल था, बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान, और माहौल में उत्सव की सजीव धड़कन।

प्रशासन भी इस विशेष आयोजन में पूरी तरह सजग रहा। सुरक्षा व्यवस्था, आवश्यक प्रबंधन और एहतियातन दमकल दस्ता मौके पर तैनात किया गया, ताकि खुशी के इस अवसर में कोई व्यवधान न आए। इसके बाद दूल्हा हेलीकॉप्टर में सवार होकर बारात सहित राजपुरा के लिए रवाना हुआ—एक ऐसा दृश्य जिसे देखने लोग देर तक आसमान निहारते रहे।

दुल्हन पक्ष ने भी सादगी और संस्कारों की मिसाल पेश की।

दुल्हन पक्ष की ओर से बड़ौदा क्षेत्र में सम्मान और सादगी से जीवन जीने वाले परम्परागत पटेल भेरूलाल जी का परिवार सामाजिक आदर्श के रूप में जाना जाता है। भेरूलाल जी सदैव बिना दिखावे के, गांव और समाज के हित को प्राथमिकता देने वाले व्यक्तित्व रहे हैं। उनका परिवार संपन्न होते हुए भी सरल जीवन और परम्पराओं के पालन के लिए क्षेत्र में विशेष सम्मान रखता है। यही विश्वास और सामाजिक सेवा की विरासत आगे बढ़ाते हुए ग्रामवासियों ने उनके पुत्र शिवराज सिंह को सरपंच पद पर विजय दिलाई, जो आज भी उसी सादगी और जिम्मेदारी के साथ गांव के विकास और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

वर्तमान सरपंच शिवराज मीणा के परिवार ने पूरे समारोह को परंपरागत रीति-रिवाजों और आत्मीयता के साथ संपन्न कराया। परिवार अपनी सादगी, सामाजिक सम्मान और बिना दिखावे के जीवन के लिए क्षेत्र में जाना जाता है। यही कारण रहा कि आधुनिकता के इस अनोखे माध्यम के बावजूद विवाह की आत्मा पूरी तरह भारतीय संस्कारों में रची-बसी रही।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले दिन सुबह हेलीकॉप्टर द्वारा गणेश जी मंदिर, श्योपुर तथा चंद्रसागर तालाब महादेव मंदिर पर पुष्प वर्षा की गई। यह दृश्य आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया—मानो आशीर्वाद स्वयं आकाश से बरस रहा हो।

विदाई का क्षण भावुक कर देने वाला था। परिजनों की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे खुशी से दमक रहे थे। दूल्हा-दुल्हन अपने माता-पिता के साथ हेलीकॉप्टर से वापस श्योपुर क्षेत्र स्थित अपने गृह ग्राम लौटे। गांव में उनके स्वागत के लिए लोग पहले से इंतजार कर रहे थे—जैसे कोई उत्सव फिर से लौट आया हो।

यह विवाह केवल एक अनूठी बारात नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि आधुनिक साधनों को अपनाते हुए भी अपनी जड़ों, संस्कारों और सादगी को संजोकर रखा जा सकता है। ग्रामीण जीवन की आत्मीयता और नई सोच का यह संगम लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।

रायपुरा–वर्धाबुजुर्ग में जमीन रजिस्ट्री पर नई गाइडलाइन: सड़क से 45 फीट छोड़कर ही होगा क्रय-विक्रय

श्योपुर, 19 फरवरी 2026
श्योपुर जिले में भविष्य की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने उप पंजीयक, मुद्रांक एवं पंजीयन कार्यालय को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि ग्राम रायपुरा एवं वर्धाबुजुर्ग क्षेत्र में सड़क किनारे होने वाले भूमि क्रय-विक्रय पंजीयन अब मध्य सड़क से 45 फीट दूरी छोड़कर ही किए जाएंगे।

रेलवे स्टेशन को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला

जारी निर्देशों के अनुसार वर्धाबुजुर्ग में ब्रॉडगेज लाइन पर नया रेलवे स्टेशन निर्माणाधीन है। निकट भविष्य में इस स्टेशन तक पहुंचने के लिए वर्धाबुजुर्ग से एनएच पाली रोड तक का ग्रामीण मार्ग मुख्य संपर्क मार्ग बनेगा, जहां भारी यातायात और भीड़भाड़ की संभावना है।

सड़क चौड़ीकरण के मानकों का पालन अनिवार्य

प्रशासन ने “जियोमैट्रिक डिजाइन स्टैंडर्ड फॉर रूरल नॉन-अर्बन हाईवे” का हवाला देते हुए बताया कि ग्रामीण मार्गों में—

  • सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई: 25 मीटर

  • नियंत्रण रेखाओं के बीच कुल चौड़ाई: 30 मीटर
    का प्रावधान है।

इसी मानक को सुरक्षित रखने के लिए सड़क किनारे होने वाली प्लॉटिंग और कृषि भूमि की रजिस्ट्री में 45 फीट का सेटबैक अनिवार्य किया गया है।

रजिस्ट्री दस्तावेज में करना होगा स्पष्ट उल्लेख

निर्देश दिए गए हैं कि:

  • सड़क से 45 फीट दूरी छोड़कर ही भूमि का क्रय-विक्रय पंजीयन किया जाए।

  • यह शर्त रजिस्ट्री दस्तावेज में स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए।

  • नियमों की अनदेखी भविष्य में मार्ग को संकीर्ण बना सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होगा

भविष्य की योजना, अभी से नियंत्रण

प्रशासन का मानना है कि अभी से नियमन नहीं किया गया तो रेलवे स्टेशन शुरू होने के बाद अनियंत्रित निर्माण से मार्ग बाधित हो सकता है। इस निर्णय को भविष्य के ट्रैफिक दबाव और क्षेत्रीय विकास को देखते हुए अहम माना जा रहा है।


Crime National News – विश्लेषण

अक्सर विकास कार्यों के बाद सड़कें संकरी पड़ जाती हैं और फिर अतिक्रमण हटाने की नौबत आती है। इस बार प्रशासन ने पहले ही लाइन खींच दी है—ताकि आने वाले समय में रेलवे कनेक्टिविटी सुचारू रहे और अव्यवस्थित बसाहट विकास में बाधा न बने।


#SheopurNews #Raipura #WardhaBuzurg #LandRegistrationRule #RailwayDevelopment #MPNews #InfrastructurePlanning #RoadWidthRule #PropertyRegistration #UrbanPlanning #MadhyaPradesh #NationalNews #DevelopmentPolicy

राजपुरा में पानी को तरसते आदिवासी: 6 महीने से खराब पड़ी मोटर, राजस्थान से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण

श्योपुर, 18 फरवरी 2026
श्योपुर जिले की कराहल तहसील अंतर्गत सूंसवाड़ा ग्राम पंचायत के रजपुरा गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग सरकारी योजनाओं के कागजी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच पिसने को मजबूर हैं। यहां गरीब आदिवासी परिवार पिछले करीब छह महीने से पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार दीपावली के समय खराब हुई पेयजल मोटर आज तक ठीक नहीं कराई गई। मोटर पानी की टंकी के पास ही बाहर पड़ी है, लेकिन उसे सुधारने की दिशा में पंचायत ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पाइपलाइन भी जर्जर हालत में है, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है।

विडंबना देखिए—
रहते मध्यप्रदेश में हैं, लेकिन पानी पीने के लिए राजस्थान जाना पड़ रहा है।

ग्रामीण रोजाना सीमा पार जाकर पानी भरते हैं। वहां भी उन्हें ताने सुनने पड़ते हैं—

“अपनी मोटर ठीक नहीं करा सकते और हमारे यहां पानी लेने आ जाते हो।”

गांव के लोगों का सवाल है कि क्या गरीब होना ही उनकी सबसे बड़ी सजा है?

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत सचिव सुरेश जोशी को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। न मोटर सुधरी, न पाइपलाइन बदली, न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

एक ओर सरकार जल जीवन मिशन के माध्यम से “हर घर नल से जल” का दावा कर रही है, वहीं रजपुरा के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
यहां विकास के नल नहीं, बल्कि लापरवाही की पाइपलाइन बह रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मोटर मरम्मत, पाइपलाइन सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। 

दो से चार दिन में मोटर निकलवाकर मागवता हु और ठीक करके व्यवस्था कर देता हूँ 

पंचायत सचिव सुरेश जोषी


Crime National News – जमीनी सच

कागजों में बहता पानी और जमीन पर सूखी प्यास—
योजनाएं तब तक अधूरी हैं, जब तक आखिरी गांव तक पानी नहीं पहुंचता।
रजपुरा की प्यास आज सिस्टम से जवाब मांग रही है।



#Sheopur #Karahal #Rajpura #WaterCrisis #JalJeevanMission #TribalVillage #GroundReport #MPNews #RuralIndia #WaterProblem #CrimeNationalNews #DevelopmentVsReality #LocalIssue #PublicVoice