ईश्वर की प्राप्ति ही शाश्वत सुख का मार्ग : साध्वी मेरुदेवा भारती
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा मंगल कलश यात्रा निकाली गई। और आज कथा वाचन हुआ
श्योपुर | बड़ोदा24/ 25 दिसम्बर 25
ईश्वर की प्राप्ति ही शाश्वत सुख का मार्ग : साध्वी मेरुदेवा भारती


मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य सांसारिक सुख नहीं, बल्कि ईश्वर का दर्शन कर जन्म–मरण के बंधन से मुक्त होना है। यह विचार साध्वी सुश्री मेरुदेवा भारती जी ने सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यक्त किए। कथा का आयोजन श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में पुलिस स्टेशन ग्राउंड, बड़ोदा (जिला श्योपुर) में 25 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक किया जा रहा है।
कथा के पहले दिन साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने आत्मदेव के प्रसंग के माध्यम से जीवन की सच्चाई को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि आत्मदेव ने जीवन भर ईश्वर से संतान और सांसारिक सुख की कामना की, किंतु संतों के उपदेश के बावजूद वह भक्ति मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सके। परिणामस्वरूप उन्हें अपने ही परिवार और पुत्र से दुख तथा अशांति का सामना करना पड़ा।
कथा व्यास ने कहा कि संसार का सुख स्थायी नहीं होता, वह केवल बाहरी आवरण है, जिसके भीतर दुख छिपा रहता है। संतों का मत है कि जिसने भी ईश्वर से केवल सांसारिक सुख मांगा, वह अंततः दुखी ही रहा। उन्होंने तुलसीदास जी के दोहे का उल्लेख करते हुए बताया कि सुख की खोज में किया गया हर प्रयास अंततः दुख को ही बढ़ाता है।
साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सच्चा सुख केवल ईश्वर की प्राप्ति में ही निहित है। जब मनुष्य ईश्वर से जुड़ जाता है, तब वह दुख की स्थिति में भी आनंद का अनुभव करता है और हर परिस्थिति में ईश्वर की उपस्थिति महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि मानव तन बड़े पुण्य से प्राप्त होता है, इसलिए इसे व्यर्थ न जाने दें। ईश्वर से सांसारिक वस्तुओं की नहीं, बल्कि स्वयं ईश्वर की ही कामना करें। शाश्वत सुख प्राप्त कर, ईश्वर का दर्शन कर ही मानव जीवन सार्थक होता है और इसी से आवागमन के बंधन से मुक्ति संभव है।
श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।


