ईश्वर की प्राप्ति ही शाश्वत सुख का मार्ग : साध्वी मेरुदेवा भारती

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  ईश्वर की प्राप्ति ही शाश्वत सुख का मार्ग : साध्वी मेरुदेवा भारती

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा मंगल कलश यात्रा निकाली गई। और आज कथा वाचन हुआ

श्योपुर | बड़ोदा24/ 25 दिसम्बर 25

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने निकाली भव्य मंगल कलश यात्रा

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व नगर में भव्य मंगल कलश यात्रा का आयोजन किया गया। यह कलश यात्रा धार्मिक उत्सव के पावन आगमन का प्रतीक मानी जाती है, जो सकारात्मक ऊर्जा और मंगल भाव का संचार करती है।

कलश को सृष्टि, सृजन और एकता का प्रतीक बताते हुए आयोजकों ने कहा कि इसमें पवित्र नदियों का जल सत्य और अनंत ज्ञान का संकेत माना जाता है। इसी कारण कलश को अमरता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी कहा जाता है।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, जो एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन है और जिसके संस्थापक व संचालक सर्वश्री आशुतोष महाराज जी हैं, द्वारा 25 दिसंबर 2025 से पुलिस स्टेशन ग्राउंड, श्योपुर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक आयोजित होगी।

कथा से पूर्व निकाली गई मंगल कलश यात्रा प्रातः 10 बजे गायत्री मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख बाजार मार्गों से होती हुई पुलिस स्टेशन ग्राउंड (कथा स्थल) पहुंची। यात्रा में 200 से अधिक महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर प्रभु नाम के जयघोष लगाए, जिससे पूरे नगर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

आयोजकों ने बताया कि यह श्रीमद्भागवत कथा ‘महाज्ञान यज्ञ संस्थान’ द्वारा संचालित 9 प्रकल्पों में से एक विशेष प्रकल्प “कामधेनु – भारतीय गाय नस्ल सुधार एवं संरक्षण कार्यक्रम” को समर्पित है। इस प्रकल्प के माध्यम से देशी गायों की स्वदेशी नस्लों के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

कलश यात्रा में श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही और नगरवासियों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। आयोजन को लेकर क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

विडियो देखे कथा सुने 

  ईश्वर की प्राप्ति ही शाश्वत सुख का मार्ग : साध्वी मेरुदेवा भारती 


मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य सांसारिक सुख नहीं, बल्कि ईश्वर का दर्शन कर जन्म–मरण के बंधन से मुक्त होना है। यह विचार साध्वी सुश्री मेरुदेवा भारती जी ने सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यक्त किए। कथा का आयोजन श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में पुलिस स्टेशन ग्राउंड, बड़ोदा (जिला श्योपुर) में 25 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक किया जा रहा है।

कथा के पहले दिन साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने आत्मदेव के प्रसंग के माध्यम से जीवन की सच्चाई को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि आत्मदेव ने जीवन भर ईश्वर से संतान और सांसारिक सुख की कामना की, किंतु संतों के उपदेश के बावजूद वह भक्ति मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सके। परिणामस्वरूप उन्हें अपने ही परिवार और पुत्र से दुख तथा अशांति का सामना करना पड़ा।

कथा व्यास ने कहा कि संसार का सुख स्थायी नहीं होता, वह केवल बाहरी आवरण है, जिसके भीतर दुख छिपा रहता है। संतों का मत है कि जिसने भी ईश्वर से केवल सांसारिक सुख मांगा, वह अंततः दुखी ही रहा। उन्होंने तुलसीदास जी के दोहे का उल्लेख करते हुए बताया कि सुख की खोज में किया गया हर प्रयास अंततः दुख को ही बढ़ाता है।

साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि सच्चा सुख केवल ईश्वर की प्राप्ति में ही निहित है। जब मनुष्य ईश्वर से जुड़ जाता है, तब वह दुख की स्थिति में भी आनंद का अनुभव करता है और हर परिस्थिति में ईश्वर की उपस्थिति महसूस करता है।

उन्होंने कहा कि मानव तन बड़े पुण्य से प्राप्त होता है, इसलिए इसे व्यर्थ न जाने दें। ईश्वर से सांसारिक वस्तुओं की नहीं, बल्कि स्वयं ईश्वर की ही कामना करें। शाश्वत सुख प्राप्त कर, ईश्वर का दर्शन कर ही मानव जीवन सार्थक होता है और इसी से आवागमन के बंधन से मुक्ति संभव है।

श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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