IAS संतोष वर्मा के खिलाफ श्योपुर में गुस्सा: फर्जी दस्तावेज़, गिरफ्तारी और विवादित बयान के बाद पुतला दहन

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श्योपुर/भोपाल/इंदौर दिनक 25/11/2025

मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर भारी विरोध का सामना कर रहे हैं। उनके हालिया विवादित बयान के बाद श्योपुर में ब्राह्मण समाज ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया। समाज के लोग श्रीराम धर्मशाला से गोलंबर तक रैली निकालते हुए ”ब्राह्मण एकता जिन्दा बाद” “संतोष वर्मा मुर्दाबाद” के नारे लगाते जयस्तंभ चौक पहुंचे, जहां उनका पुतला दहन किया गया।

ब्राह्मण समाज के युवा पत्रकार बंटी उपाध्याय ने कहा कि “वर्मा का बयान बहन-बेटियों को लेकर पूरी तरह गलत था, समाज इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा।”
श्योपुर में इस विरोध में सैकड़ों की भीड़ उमड़ी और समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए कार्रवाई की मांग की।

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विवादित बयान के बाद पुराने केस दोबारा सुर्खियों में

IAS संतोष वर्मा, जिन्हें हाल ही में AJAKS का नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, ने भोपाल में दिए एक बयान में ब्राह्मण समाज को लेकर टिप्पणी की थी। बयान वायरल होते ही प्रदेशभर में नाराजगी फैल गई और इसी के साथ उनके पुराने फर्जी दस्तावेज़ और गिरफ्तारी से जुड़े मामले फिर चर्चा में आ गए।

केस के डायरेक्ट लिंक (Stable / Permalink)


प्रमोशन के दौरान फर्जी दस्तावेज़ का आरोप

  • संतोष वर्मा ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा से IAS कैडर में प्रमोशन लिया था।

  • आरोप है कि उन्होंने इंदौर कोर्ट में दो संदिग्ध दस्तावेज़ जमा किए थे।

  • जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई थी।

  • इसी कारण उनकी पात्रता और प्रमोशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।


गिरफ्तारी और लंबित केस

  • एमजी रोड थाना, इंदौर में FIR दर्ज है।

  • 2021 में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था, बाद में जमानत मिली।

  • केस की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी ने की थी।

  • चालान आज भी कोर्ट में पेश होने की प्रक्रिया में है।


नए बयान ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी

भोपाल में दिया गया उनका ताज़ा बयान प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयान की व्यापक निंदा हो रही है, और लोग पुराने मामलों को जोड़कर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि “इस तरह के रिकॉर्ड वाले अधिकारी को संवेदनशील जिम्मेदारी देना सिस्टम की गंभीर कमी को उजागर करता है।”

नए बयान ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी

भोपाल में दिया गया उनका ताज़ा बयान प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके बयान की व्यापक निंदा हो रही है, लेकिन वर्मा के अनुसार पूरा भाषण गलत ढंग से पेश किया गया था।

 

 

 

IAS संतोष वर्मा पर फिर विवादों के बादल, फर्जी दस्तावेज और गिरफ्तारी के पुराने केस आए सामने

भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश में अजाक्स (AJAKS) के नवनियुक्त अधिकारी IAS संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में दिए गए उनके बयान ने राज्य के सामाजिक माहौल में हलचल मचा दी है। बयान के वायरल होते ही उनके पुराने फर्जीवाड़ा और गिरफ्तारी से जुड़े मामले एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे प्रशासनिक हलकों में चिंता गहरा गई है।

🔗 विस्तृत रिपोर्ट
https://www.aajtak.in/madhya-pradesh/story/mp-ias-santosh-verma-controversy-old-cases-resurface-lclar-strc-2396272-2025-11-25

प्रमोशन प्रक्रिया पर सबसे बड़े सवाल

संतोष वर्मा ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा से IAS कैडर में प्रमोशन लिया था। आरोप यह है कि इस प्रमोशन के दौरान उन्होंने इंदौर कोर्ट में दो संदिग्ध दस्तावेज़ जमा किए, जिनमें गलत जानकारी दिए जाने की बात जांच में सामने आई थी।
इन दस्तावेज़ों के चलते उनकी पात्रता और प्रमोशन प्रक्रिया दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं।

गिरफ्तारी भी दर्ज, केस आज भी लंबित

एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज इस मामले में पुलिस ने संतोष वर्मा को 2021 में गिरफ्तार भी किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन केस की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा की गई और अब भी मामले का चालान कोर्ट में पेश होने की प्रक्रिया जारी है।

🔗 केस विवरण
https://www.aajtak.in/madhya-pradesh/story/mp-ias-santosh-verma-controversy-old-cases-resurface-lclar-strc-2396272-2025-11-25

नए बयान ने फिर छेड़ दी पुरानी बहस

भोपाल में दिया गया उनका हालिया बयान विवादों का कारण बना। सोशल मीडिया पर बयान की निंदा होने लगी और इसी के साथ उनके फर्जी दस्तावेज व गिरफ्तारी से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के रिकॉर्ड वाले अधिकारी को जिम्मेदारी देना “सिस्टम की कमजोरी” को उजागर करता है।

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