रामेश्वर महादेव समेत प्रमुख देवस्थानों के जीर्णोद्धार हेतु समिति गठित, अपर कलेक्टर की निगरानी में होगा काम
श्योपुर | Crime National News 03 मार्च 2026
श्योपुर स्थित पवित्र तीर्थक्षेत्र श्री रामतीर्थ रामेश्वर त्रिवेणी संगम में देवस्थानों के संरक्षण और विकास को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने त्रिवेणी संगम क्षेत्र में स्थित प्रमुख मंदिरों और परिसर में मौजूद ऐतिहासिक संरचनाओं के जीर्णोद्धार, संधारण और अनुरक्षण के लिए एक प्रशासकीय समिति का गठन किया है।
यह समिति अपर कलेक्टर श्योपुर के पर्यवेक्षण में कार्य करेगी और तीर्थक्षेत्र में विकास कार्यों की सतत निगरानी और समीक्षा सुनिश्चित करेगी।
Ramteerth Rameshwar Triveni Sangam
इन देवस्थानों का होगा संरक्षण
गठित समिति द्वारा जिन प्रमुख देवस्थानों के संरक्षण और विकास कार्य कराए जाएंगे, उनमें शामिल हैं—
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श्री रामेश्वर महादेव मंदिर
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श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर
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श्री राधाकृष्ण मंदिर
इसके अलावा परिसर में स्थित लघु देवस्थानों, सिद्ध संतों-महापुरुषों की समाधियों, छतरियों, बावड़ी, धर्मशालाओं एवं अन्य भवनों का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
समिति में शामिल अधिकारी
जारी आदेश के अनुसार समिति में एसडीएम श्योपुर, अधीक्षक राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य श्योपुर, एसडीओ पीडब्ल्यूडी, तहसीलदार श्योपुर अथवा नायब तहसीलदार मानपुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत श्योपुर, रेंज ऑफिसर राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य गेम रेंज सबलगढ़, उपयंत्री जनपद पंचायत श्योपुर, आर्किटेक्ट श्योपुर, संबंधित मंदिरों के पुजारी, राजस्व निरीक्षक/पटवारी मानपुर तथा सचिव ग्राम पंचायत मानपुर को शामिल किया गया है।
जनसहयोग से होगा विकास
तीर्थक्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं विकसित करने और अन्य आनुषंगिक कार्य स्वैच्छिक जनसहयोग से प्राप्त राशि और सामग्री से कराए जाएंगे।
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जनसहयोग से प्राप्त राशि की विधिवत रसीद दी जाएगी।
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राशि भारतीय स्टेट बैंक, स्टेशन रोड श्योपुर शाखा के निर्धारित खाते में जमा कराई जाएगी।
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निर्माण सामग्री का सुरक्षित भंडारण किया जाएगा।
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खर्च का भुगतान अनुविभागीय अधिकारी श्योपुर की मांग अनुसार होगा।
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आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा समय-समय पर जनसमुदाय से गठित त्रिवेणी संगम सेवा समिति के संज्ञान में लाया जाएगा।
Temple Renovation Sheopur
मासिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
समिति द्वारा किए गए कार्यों की मासिक प्रगति रिपोर्ट अपर कलेक्टर के माध्यम से कलेक्टर को प्रस्तुत की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
तीर्थक्षेत्र के संरक्षण और सुव्यवस्थित विकास के लिए उठाया गया यह कदम श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
