चीता प्रोजेक्ट को नई रफ्तार, 28 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क पहुंचेंगे नए मेहमान
श्योपुर, 27 फरवरी 2026
मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में है। 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाए जा रहे 8 चीतों के आगमन के साथ ही चीता प्रोजेक्ट को नई ऊर्जा मिलने जा रही है।
गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क से चीता प्रोजेक्ट की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। बीते साढ़े तीन वर्षों में यह परियोजना लगातार सफलता की ओर बढ़ी है। बोत्सवाना से 8 नए चीतों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 47 हो जाएगी।
चीता प्रजनन के लिए कूनो सबसे अनुकूल
अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाड़ियों से घिरा कूनो नेशनल पार्क प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का अद्भुत संगम है। पार्क के बीचों-बीच बहने वाली कूनो नदी, चौड़े समतल तट और भरपूर धूप में अठखेलियां करते मगरमच्छ यहां के रोमांच को और बढ़ाते हैं।
कूनो में 174 से अधिक पक्षी प्रजातियां, जिनमें 12 दुर्लभ श्रेणी की हैं, तथा सैकड़ों वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। यही कारण है कि चीतों के प्रजनन के लिए कूनो का जंगल अत्यंत सकारात्मक साबित हुआ है।
2009 से 2010 के सर्वे में कूनो रहा सबसे आगे
भारत में 1952 में एशियाई चीतों के विलुप्त होने के बाद से उनके पुनर्स्थापन की योजना चल रही थी। सितंबर 2009 में राजस्थान के गजनेर में हुई विशेषज्ञ बैठक में चीता संरक्षण कोष की संस्थापक लॉरी मार्कर सहित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने दक्षिण अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद 2010 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किए गए सर्वेक्षण में नौरादेही, शाहगढ़ और कूनो पालपुर को उपयुक्त पाया गया, लेकिन इनमें भी कूनो सबसे अनुकूल सिद्ध हुआ।
750 वर्ग किमी कोर एरिया, 3000 वर्ग किमी विस्तार
कूनो नेशनल पार्क के 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चीतों के स्थायी रहवास की क्षमता है, जबकि श्योपुर और शिवपुरी जिलों के लगभग 3000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में उनके स्वच्छंद विचरण की संभावनाएं मौजूद हैं। आसपास के गांवों में लोगों को चीता मित्र बनाया गया है। पानी, शिकार घनत्व और आवश्यक सिविल कार्य पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।
चीतों की मौजूदा स्थिति
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वर्तमान में भारत में कुल 39 चीते
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36 कूनो नेशनल पार्क में
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3 गांधी सागर अभयारण्य में
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नामीबिया से लाए गए चीतों और उनके 17 भारतीय जन्मे शावकों सहित कुल आबादी 20
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दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों और उनके 11 शावकों सहित कुल आबादी 19
अब बोत्सवाना से आने वाले 8 चीतों के साथ भारत का चीता परिवार और मजबूत होगा।
संदेश साफ है—कूनो सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, बल्कि भारत में चीता पुनर्स्थापना का सबसे बड़ा और सफल मॉडल बन चुका है।
