मध्यस्थता से त्वरित न्याय का संदेश, एडीआर भवन में जागरूकता कार्यक्रम

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समय और धन की बचत का प्रभावी माध्यम है मध्यस्थता – प्रधान जिला न्यायाधीश

श्योपुर, 28 फरवरी 2026

 न्यायालयीन प्रक्रिया के वैकल्पिक और प्रभावी समाधान के रूप में मध्यस्थता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कपिल मेहता ने की।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने प्रशिक्षित मीडिएटर्स, पैनल अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स और पैरालीगल वालेंटियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायालयों के माध्यम से प्रकरणों के निराकरण में समय अधिक लगता है, जबकि मध्यस्थता के जरिए मामलों का समाधान तेजी से होता है, जिससे पक्षकारों का अनावश्यक समय और धन दोनों की बचत होती है।

उन्होंने 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत को लेकर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि यदि वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, एनआई एक्ट तथा अन्य राजीनामा योग्य प्रकरणों को पूर्व में ही चिन्हित कर लिया जाए, तो उनके सफल निराकरण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।


अधिवक्ताओं की भूमिका अहम

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय संजय गोयल ने मध्यस्थता प्रक्रिया की जानकारी देते हुए इसके लाभों पर प्रकाश डाला और अधिवक्ताओं से मध्यस्थता के माध्यम से प्रकरणों के समाधान में सक्रिय सहयोग की अपील की।

जिला अभिभाषक संघ श्योपुर के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सफल मध्यस्थता में अधिवक्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और उनके सहयोग से ही अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है।


ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में सचिव जिला अभिभाषक संघ, जिला विधिक सहायता अधिकारी, प्रशिक्षित मध्यस्थ अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस श्योपुर के चीफ, डिप्टी चीफ, असिस्टेंट, पैनल लॉयर्स और पैरालीगल वालेंटियर्स बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

संदेश स्पष्ट—मध्यस्थता अपनाइए, विवाद घटाइए और न्याय को तेज व सरल बनाइए।

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