सूंसवाड़ा पंचायत में आरटीआई दबाने का आरोप, अधिकारी मौन – मिलीभगत की आशंका गहराई
श्योपुर, 06 फरवरी 2026
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए श्योपुर जिले की ग्राम पंचायतों से लेकर जनपद कार्यालयों तक आरटीआई आवेदनों को दबाने का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्राम पंचायत सूंसवाड़ा में दायर एक आरटीआई प्रकरण ने पूरे पंचायत तंत्र पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत के सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आरटीआई दी, शुल्क भरा, अपीलें कीं… फिर भी जवाब शून्य
आवेदक द्वारा ग्राम पंचायत सूंसवाड़ा में 09 अगस्त 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ₹20 के भारतीय पोस्टल ऑर्डर के साथ आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया गया। तय समयसीमा बीतने के बावजूद जब कोई जानकारी नहीं दी गई, तो 11 अक्टूबर 2025 को जनपद पंचायत करहल के अपीलीय अधिकारी और सीईओ राकेश शर्मा को प्रथम अपील सशुल्क 50 रूपये पोस्टलआर्डर के साथ डाक से भेजी गई।
इसके बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो 29 दिसंबर 2025 को ₹100 शुल्क के साथ राज्य सूचना आयोग भोपाल में द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई, जो दिनांक 2/2/26 को वितरण हुई, लेकिन आज तक जनपद पंचायत की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

धारा 18 के तहत शिकायत भी दबाई गई?
मामला यहीं नहीं रुका। आवेदक ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 18(1) के तहत जनसुनवाई मंगलवार 03 फरवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय श्योपुर में शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन
➡️ आवेदन लेने से कथित तौर पर परहेज किया गया
➡️ न ऑनलाइन दर्ज किया गया
➡️ न कोई रिसीविंग दी गई
आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर विजय शाक्य ने “आरटीआई एक्ट पढ़ने” की नसीहत देकर मामले को दबाने की कोशिश की।
आरटीआई मांगने पर दबाव, धमकी और गलत जवाब देने के आरोप
आवेदक का आरोप है कि—
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आरटीआई आवेदन लेने से ही अधिकारी इनकार करते हैं
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पीआईओ समय पर जवाब नहीं देते
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अपीलीय अधिकारी भी मौन साध लेते हैं
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कई मामलों में गलत और भ्रामक जानकारी दी जाती है
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संबंधित पक्ष को पहले ही सूचना देकर दबाव, धमकी और विवाद की स्थिति बनवाई जाती है
यह सब सूचना देने से बचने की सुनियोजित रणनीति की ओर इशारा करता है।
महिला बाल विकास सहित कई विभागों में सैकड़ों आरटीआई लंबित
सूत्रों के मुताबिक
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केवल महिला बाल विकास विभाग में 50 से अधिक आरटीआई लंबित हैं
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ग्राम पंचायत स्तर पर सैकड़ों आवेदन वर्षों से दबे पड़े हैं
- ऊर्जा विभाग में भी गलत भ्रामक जानकारी उपलब्ध करने का मामला सामने आया है
यह स्थिति साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही या सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करती है।
प्रभारी मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
इस गंभीर मुद्दे को लेकर Crime National News की टीम ने प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला से सवाल किया। प्रभारी मंत्री ने मामले की जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सवाल यह है…
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क्या आरटीआई अधिनियम केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
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क्या पंचायत से जनपद तक अधिकारी एक-दूसरे को बचा रहे हैं?
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क्या सूचना मांगना अब अपराध बन गया है?
जब सूचना का अधिकार ही सुरक्षित नहीं, तो भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा?
