किसानों के साथ बैठक में कलेक्टर ने तय किया टाइमलाइन, डीपीआर अनुसार होगा पूरा क्रियान्वयन
श्योपुर, 15 जनवरी 2026
चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को लेकर प्रशासन ने अब निर्णायक रुख अपना लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा की अध्यक्षता में कमांड क्षेत्र के किसानों और विभागीय अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया कि परियोजना का क्रियान्वयन डीपीआर के अनुरूप शत-प्रतिशत कराया जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने क्रियान्वयन एजेंसी को निर्देश दिए कि अगले 15 दिवस में कम से कम 10 ग्रामों के किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाकर दिखाया जाए। इसके लिए मौके पर पानी चलाकर प्रदर्शन किया जाएगा। 15 दिवस बाद पुनः बैठक आयोजित कर फील्ड स्तर पर पानी पहुंचने की वास्तविक समीक्षा की जाएगी।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री चैतन्य चौहान, उप संचालक कृषि जीके पचौरिया, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी डब्ल्यूपीआईएल के प्रतिनिधि दिग्विजय सिंह, अन्य अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
12 हजार हेक्टेयर सिंचाई लक्ष्य पर फोकस
कलेक्टर ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का उद्देश्य 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराया जाएगा। कमांड क्षेत्र के किसानों की सभी समस्याओं का समाधान कर हर खेत तक पानी पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि परियोजना को सफल बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। 15 दिवस में 10 ग्रामों में पानी पहुंचने के बाद स्वयं फील्ड निरीक्षण किया जाएगा और किसानों से फीडबैक लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इजरायली तकनीक से बनी है परियोजना
डब्ल्यूपीआईएल कंपनी द्वारा निर्मित यह सूक्ष्म सिंचाई परियोजना इजरायली तकनीक पर आधारित है। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए प्रेशर और दबाव तकनीक से पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसमें स्प्रिंकलर सिस्टम के माध्यम से सिंचाई का प्रावधान है।
परियोजना अंतर्गत हिरनीखेड़ा में इंटेक वेल और पंप हाउस, जबकि लून्ड में बूस्टर पंप स्थापित किया गया है। कंपनी को 5 वर्षों तक परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। कुल 782.43 किलोमीटर ग्रेविटी लाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि मैन लाइन का कार्य अलग से किया गया है।
जल वितरण के लिए 413 बॉक्स प्रस्तावित हैं, जिनमें से 404 बॉक्स स्थापित किए जा चुके हैं। प्रत्येक 30 हेक्टेयर क्षेत्र पर एक बॉक्स लगाया गया है, जिससे 4 से 5 आउटलेट दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जीएम-1 और जीएम-2 की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है, जबकि जीएम-3 की ट्रायल टेस्टिंग जारी है।
प्रशासन का साफ संदेश:
अब केवल कागजी प्रगति नहीं चलेगी, खेतों तक पानी पहुंचे—यही सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की सफलता का असली पैमाना होगा।
