श्योपुर 31/12/25
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 25 से 31 दिसंबर 2025 तक पुलिस स्टेशन ग्राउंड (कथा स्थल), बड़ोदा, जिला श्योपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस पर भागवताचार्या महामनस्विनी साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का आध्यात्मिक सार भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया।
साध्वी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण साक्षात परमात्मा हैं और रुक्मणी जी जीवात्मा का प्रतीक हैं, जो परमात्मा की प्राप्ति करना चाहती है। उनका मिलन तभी संभव हो पाया, जब एक पंडित उनके और भगवान श्रीकृष्ण के बीच माध्यम बने। इसी प्रकार जीवात्मा का लक्ष्य भी परमात्मा की प्राप्ति है, लेकिन यह तभी संभव होता है जब वह एक पूर्ण गुरु की शरण प्राप्त करती है।
उन्होंने कहा कि संत-महापुरुषों ने स्पष्ट किया है कि आत्मा और परमात्मा का मिलन केवल पूर्ण गुरु के मा
ध्यम से ही संभव है। पूर्ण गुरु वही है, जो इस मानव तन के भीतर ही ईश्वर का साक्षात्कार करा दे। गुरु गीता का उल्लेख करते हुए साध्वी जी ने बताया कि भगवान शिव ने पार्वती को गुरु की विभिन्न श्रेणियों का वर्णन किया है, जिनमें अंततः परम गुरु ही जीवात्मा को मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
साध्वी मेरुदेवा भारती जी ने कहा कि कुछ गुरु केवल मंत्र, शिक्षा या उपदेश देते हैं, परंतु जब तक जीवात्मा पूर्ण गुरु की शरण नहीं लेती, तब तक उसका वास्तविक कल्याण नहीं हो पाता। पूर्ण गुरु की कृपा से ही ईश्वर के आलौकिक रूप का दर्शन, उनके प्रकाश का अनुभव, ईश्वरीय संगीत का श्रवण तथा शाश्वत अमृत की अनुभूति संभव होती है।
उन्होंने संत वाणी के माध्यम से कहा कि पूर्ण गुरु की कृपा से अंधा भी देख सकता है, गूंगा बोल सकता है और लंगड़ा भी काशी पहुंच सकता है, क्योंकि काशी कोई स्थान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अवस्था है, जो पूर्ण गुरु द्वारा ही प्राप्त होती है।
साध्वी जी ने कहा कि गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से आज अनेकों जीवात्माएं सहज रूप से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर अपने भीतर ईश्वर का दर्शन कर पा रही हैं और सच्चे आनंद की अनुभूति कर रही हैं। यही भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का आध्यात्मिक संदेश है।
कथा का समापन हवन एवं भंडारे के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
