श्योपुर आरटीओ में रिश्वत का नंगा नाच! बाबू कैमरे में कैद, फिर भी बेखौफ — प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

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श्योपुर 22 दिसम्बर 2025
आरटीओ कार्यालय श्योपुर में भ्रष्टाचार अब परदे के पीछे नहीं, बल्कि खुलेआम कैमरों के सामने खेला जा रहा है। कार्यालय के बाबू संतोष माहौर को ऑफिस के अंदर ही रुपए लेते हुए कमरे में कैद किया गया, जिसके वीडियो अब सार्वजनिक हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि वाहन ट्रांसफर जैसे कामों के नाम पर वकीलों तक से रिश्वत मांगी जाती रही, और इसके भी वीडियो सामने आए हैं।

पूरे आरटीओ कार्यालय में दलालों का ऐसा साम्राज्य खड़ा हो चुका है कि बिना रिश्वत कोई भी फाइल आगे बढ़ने का नाम नहीं लेती। जब पढ़े-लिखे, समझदार लोगों का काम बिना पैसे के नहीं होता, तो सवाल उठता है कि ग्रामीण इलाकों से आए भोले-भाले लोगों का इस दफ्तर में क्या हाल होता होगा?

        वीडियो देखें 

अधिकारी के दर्शन ईद के चां द जैसे

आरटीओ अधिकारी रंजना कुशवाह से मिलना हो तो मानो ईद का चांद देखने जैसा दुर्लभ हो गया है।
पत्रकारों ने कई बार फोन कर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार या तो घंटी बजकर कट जाती है, या फोन स्विच ऑफ मिलता है। सवालों से बचना और जवाब न देना अब आदत बन चुकी है।

कलेक्टर को अवगत कराया, फिर भी कार्रवाई शून्य

इस गंभीर मामले को लेकर श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को भी पूरी जानकारी दी गई।
लेकिन इसके बावजूद सरेआम रिश्वत लेते कैमरे में कैद बाबू पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना, पूरे सिस्टम को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
👉 क्या वीडियो सामने आने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
👉 क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?

आरटीओ बना ‘बंदरबांट’ का अड्डा

आरटीओ ऑफिस में चल रहा यह खेल किसी ‘बंदरबांट’ से कम नहीं।
एक भ्रष्ट बाबू पर कार्रवाई न होना, पूरे विभाग के लिए जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
नतीजा यह है कि बाबू और दलाल निडर होकर सरेआम रिश्वत मांग रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि शिकायत चाहे कहीं भी करो—कोई सुनवाई नहीं होगी।

दलालों की दुकानें, बाबू उनके दफ्तरों में

सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह है कि
👉 दलालों की दुकानें पूरे बाजार में खुली हैं
👉 आरटीओ विभाग के बाबू दिनभर दलालों के ऑफिस में बैठे रहते हैं
👉 अगर कोई आम नागरिक आरटीओ ऑफिस पहुंच भी जाए, तो उसे सीधे दलाल का पता बताकर लौटा दिया जाता है

तो सवाल यह है—
क्या बाबुओं को सरकारी ऑफिस में बैठकर जनता का काम नहीं करना होता?

जनता पूछ रही है अंतिम सवाल

क्या शासन–प्रशासन की मिलीभगत से ही बाबू और दलाल पाले जा रहे हैं?
क्या श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा इस भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करेंगे,
या फिर जिलेभर में यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

आज जनता जवाब मांग रही है…
और सिस्टम की चुप्पी सबसे बड़ा आरोप बन चुकी है।

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