श्योपुर, 19 दिसंबर 2025
भारतीय जनता पार्टी से श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश शुक्ला आज जिले के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने सरकार के दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए “विकास, विश्वास और परिवर्तन” की नई गाथा का दावा किया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये गाथा वास्तव में नई है या पुरानी घोषणाओं का नया पैकेज?
दो साल में पहली पत्रकार वार्ता, सवालों से असहजता
सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर पहली बार आयोजित की गई पत्रकार वार्ता में जब पत्रकारों ने जमीनी हकीकत से जुड़े सवाल पूछे, तो एक समय प्रभारी मंत्री कुर्सी से उठकर जाने लगे। सवालों की बौछार बढ़ी तो वे वापस आकर कुर्सी पर बैठे।
यह दृश्य अपने आप में यह संकेत देने के लिए काफी था कि उपलब्धियों की सूची लंबी हो सकती है, लेकिन सवालों के जवाब कठिन हैं।
विडियो देखें
चंबल नहर परियोजना: उपलब्धि या अधूरी कहानी?
प्रभारी मंत्री ने चंबल नहर परियोजना को बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन किसानों की सच्चाई कुछ और कहती है।
किसानों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा। अगर नहर से पानी नहीं, तो फिर यह उपलब्धि किसके लिए?
सड़कें विकास की नहीं, बदहाली की तस्वीर
-
कराहल से पोहरी तक सड़कें गड्ढों में तब्दील
-
NH-552 हाईवे पहली बारिश में ही धंस गया
-
बरसात के बाद सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर मरम्मत
यह सवाल उठता है कि क्या सड़कें सिर्फ उद्घाटन के लिए बन रही हैं, चलने के लिए नहीं?
नालों का निर्माण या खुलेआम लापरवाही?
श्योपुर शहर में NH-552 के ठेकेदार द्वारा भरे पानी में रात के अंधेरे में गिट्टी-सीमेंट डालकर नाले बनाए जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
जब आम नागरिकों ने हड़ताल की चेतावनी दी, तब जाकर प्रशासन जागा और जांच का आश्वासन दिया।
लेकिन सवाल यह है—क्या जांच हुई? और अगर हुई तो रिपोर्ट कहां है?
पंचायतों में भ्रष्टाचार, RTI बेअसर
जिले की लगभग हर पंचायत पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
-
RTI लगाओ तो सचिव जानकारी नहीं देते
-
अपील करो तो जनपद CEO जवाब नहीं देते
-
कलेक्ट्रेट में रोज समीक्षा बैठक, लेकिन ज़मीन पर कार्रवाई शून्य
CM हेल्पलाइन: राहत नहीं, दबाव का हथियार
अगर कोई आम नागरिक CM हेल्पलाइन पर शिकायत करता है, तो
➡️ संबंधित विभाग उस पर दबाव बनाता है
➡️ शिकायत वापस लेने को मजबूर किया जाता है
➡️ अंत में शिकायत “संतोषजनक निराकरण” बताकर बंद
तो सवाल यह है—क्या CM हेल्पलाइन जनता के लिए है या विभागों की फाइलें साफ करने के लिए?
कलेक्टर सक्रिय, लेकिन सिस्टम कमजोर
वर्तमान कलेक्टर अर्पित वर्मा का जमीनी निरीक्षण और सक्रियता प्रशंसनीय है।
कई जगह उन्होंने मौके पर भोजन चखकर, निरीक्षण कर सख्त निर्देश भी दिए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या उनके आदेश नीचे तक पहुंच पाते हैं?
या फिर बीच के अधिकारी और कर्मचारी उन्हें गुमराह कर फाइलों में ही सब कुछ निपटा देते हैं?
घटिया भोजन, ठेकेदारों की मिलीभगत
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक समूह भोजन व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
बड़े ठेकेदारों की मिलीभगत से हर जगह घटिया गुणवत्ता का खाना पहुंचने की शिकायतें हैं।
आवाज़ उठाओ तो FIR
यदि विपक्ष या आम नागरिक प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने के लिए आवाज उठाता है, तो उस पर FIR दर्ज कर दी जाती है।
यह लोकतंत्र है या डर का तंत्र?
आरटीओ विभाग: दलालों के भरोसे सिस्टम
श्योपुर RTO विभाग पर आरोप है कि
-
बिना लेन-देन कोई काम नहीं
-
दलाल तय करते हैं किसका काम होगा
-
अधिकारी तीन जिलों का प्रभार बताकर जिम्मेदारी से बचते हैं
अब सवाल प्रभारी मंत्री से
ये सभी विषय प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला के अधिकार क्षेत्र में आते हैं—
❓ इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
❓ दोषियों पर सख्त कदम कब उठेंगे?
❓ जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं होती?
❓ क्या विकास सिर्फ फाइलों और मंचों तक सीमित है?
यह केवल एक सवाल नहीं, बल्कि श्योपुर जिले की बदकिस्मती पर एक गंभीर विचारणीय मुद्दा है।
