आरटीओ विभाग द्वारा इतने दलाल पैदाकर दिये गए हैं की आम नागरिक परेशान है
श्योपुर 11 दिसम्बर 2025
आरटीओ विभाग श्योपुर में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम नागरिक रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशान हो रहा है। विभाग में दलालों का दबदबा इस कदर बढ़ चुका है कि बिना रिश्वत दिए किसी भी फाइल का आगे बढ़ना मुश्किल बताया जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महावीर सिंह गौड़ ने इस पूरे मामले पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
गौड़ ने कहा कि बाबू संतोष माहौर करीब 15–20 साल से यहीं जमे हुए हैं और पूरे विभाग में दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। कई बार पैसों के लेनदेन को लेकर दलालों की झड़पों के वीडियो भी वायरल हो चुके हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीओ अधिकारी रंजना मैडम के पास दो से तीन जिलों का प्रभार है, जिससे वे श्योपुर में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहतीं।
“जब शिवपुरी वाले पूछते हैं, तो श्योपुर का बोल देती हैं और जब श्योपुर वाले पूछते हैं तो शिवपुरी का — ऐसे में आमजन की परेशानी बढ़ती ही जा रही है।” – महावीर गौड़
अधिकारी के न होने का फायदा उठाकर बाबू और दलाल मनमानी कर रहे हैं। गौड़ का कहना है कि दलाल तय रकम लेने के बाद ही फाइलें अप्रूव करवाते हैं।
बाहर से एनओसी लाकर वाहन का रजिस्ट्रेशन कराने वालों से 6% टैक्स की रसीद तो कटती ही है, ऊपर से 10,000 से 20,000 रुपए तक की रिश्वत वसूली जा रही है।

जिनकी ‘रिस्क रकम’ पूरी नहीं होती, उनकी फाइलों को ‘एंड कैंन’ में डालकर रोक दिया जाता है।
आईटी अधिकारी को कागजों की कमी पर नोट लगाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। कई फाइलें बिना कारण बताए पेंडिंग रख दी जाती हैं।
महावीर गौड़ ने कहा कि जब श्योपुर में इतना बड़ा आरटीओ ऑफिस बना है, तो अधिकारी को जिले में ही नियमित रूप से 10 दिन का निश्चित समय देना चाहिए, ताकि आमजन अपनी समस्याएं सीधे अधिकारी के सामने रख सकें और उनका समाधान हो सके।
अब बड़ा सवाल खड़ा है—
क्या जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान देकर आम जनता को राहत दिलाने के लिए कदम उठाएगा?
