ओबीसी आरक्षण पर लंबित प्रकरणों के शीघ्र समाधान की मांग, अधिसूचना वापसी को बताया समस्या का हल
दिनांक 27/8/2025
श्योपुर। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27% आरक्षण देने के मुद्दे पर कांग्रेसियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को श्योपुर में कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन सौंपकर विवादित अधिसूचना तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यदि सरकार यह कदम उठाती है तो 90% समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी और ओबीसी वर्ग को विधिसम्मत लाभ मिल सकेगा।
2019 से चल रहा है विवाद
8 मार्च 2019 को राज्य सरकार ने अध्यादेश लाकर ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इसके खिलाफ एक छात्रा ने अदालत में याचिका दायर की थी। इसके बाद 14 अगस्त 2019 को विधानसभा से संशोधन अधिनियम पारित कर अधिसूचित किया गया, जिसे न तो हाईकोर्ट और न ही सुप्रीम कोर्ट ने अब तक स्थगित किया है। यही अधिनियम आज भी शिक्षा व रोजगार दोनों क्षेत्रों में प्रभावी है।
70 से अधिक याचिकाएं लंबित
जानकारी के अनुसार, इस मामले से जुड़ी लगभग 70 याचिकाएं वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार की अधिसूचना पारित कानून के विपरीत है और इसी कारण विवाद और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कई नेता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने पहुंचे नेताओं में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरगोविंद जौहरी, यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष राम भरत मीणा, प्रदेश सचिव योगेश जाट, ब्लॉक अध्यक्ष चीनी कुरैशी, हंसराज सेठ, प्रहलाद सेन, डॉ. शहजाद, पार्षद सुमेर सिंह, सलाउद्दीन, महावीर वाल्मीकि, इमरान खान, जसवंत मीणा, बृजेश सिंह, दारा सिंह मीणा, बागा सिंह, अरविंद जाट, साजिद अली, कृष्णा राठौर व मनवर बाई सहित अनेक नेता शामिल रहे।
सरकार से की त्वरित कार्रवाई की मांग
नेताओं ने एक सुर में कहा कि ओबीसी समाज के साथ हो रहे भेदभाव को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह अधिसूचना तुरंत वापस लेकर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करे और ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।
👉 कांग्रेस का साफ संदेश – अधिसूचना वापसी ही समाधान की कुंजी है।


