रिनोवेट हुई रायपुरा की बावड़ी, पूजन कर मनाया गया बावड़ी उत्सव प्राचीन जल संरचनाओं को सहेजने की भावना के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

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श्योपुर, 5 जून 2025

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल स्त्रोतों के संरक्षण और जीर्णोद्धार को जनभागीदारी से उत्सव का रूप देते हुए विश्व पर्यावरण दिवस एवं गंगा दशहरा के अवसर पर पूरे प्रदेश में बावड़ी उत्सव का आयोजन किया गया। इसी क्रम में ग्राम रायपुरा की रिनोवेट की गई प्राचीन बावड़ी पर विधिवत पूजन कर समारोहपूर्वक बावड़ी उत्सव मनाया गया।

यह आयोजन जन अभियान परिषद एवं जिला प्रशासन श्योपुर के तत्वावधान में, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत कन्यापूजन से हुई, तत्पश्चात बावड़ी के गर्भगृह स्थित कुएं का विधिवत पूजन किया गया। इस दौरान दीप जलाकर रोशनी की गई और अतिथियों का स्वागत साफा पहनाकर व माल्यार्पण के साथ किया गया।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष शंशाक भूषण, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र जाट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीरज जाट, भाजपा जिला उपाध्यक्ष दलवीर सिंह, नगर मंडल महामंत्री कौशल शर्मा, सरपंच रामलेखा, सरपंच प्रतिनिधि रामअवतार, डिप्टी कलेक्टर संजय जैन, जनपद सीईओ एसएस भटनागर, जन अभियान परिषद की जिला समन्वयक नेहा सिंह सहित अनेक अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

भाजपा जिला अध्यक्ष शंशाक भूषण ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्राचीन बावड़ियों और जल संरचनाओं का पुनर्जीवन कर उन्हें फिर से उपयोगी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “जल है तो जीवन है” को सार्थक करते हुए समुदाय को इन संरचनाओं के संरक्षण में भागीदारी निभानी चाहिए।

पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र जाट ने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए वर्षा जल संचयन और पौधरोपण को जरूरी बताया। वहीं, जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीरज जाट ने कहा कि “बावड़ी उत्सव” जैसे आयोजनों का उद्देश्य जनता को जल संरक्षण से जोड़ना है और जल स्त्रोतों की पूजा हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है।

कार्यक्रम का संचालन सीईओ एसएस भटनागर ने किया और आभार प्रदर्शन सरपंच प्रतिनिधि रामअवतार ने किया।

निखरा रायपुरा की बावड़ी का स्वरूप

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रायपुरा की ऐतिहासिक बावड़ी को साफ-सफाई व मरम्मत कर एक बार फिर उपयोगी और आकर्षक बनाया गया है। यह बावड़ी सन 1734 में गोड राजा इंदर सिंह के दीवान शिवनाथ जी कायस्थ गोड द्वारा बनवाई गई थी। शिलालेखों के अनुसार, उन्होंने इस गांव को अपने नाम पर शिवनाथपुर बसाया था, जो वर्तमान में रायपुरा के नाम से जाना जाता है।

श्योपुर जिले में कई ऐसी बावड़ियां मौजूद हैं, जिनका निर्माण 6वीं से 18वीं सदी के बीच हुआ। इनमें अधिकतर बावड़ियां नंदा शैली में बनी हैं, जिसमें आवागमन का एक ही मार्ग होता है। अब इन्हें फिर से सजाया-संवारा जा रहा है ताकि भावी पीढ़ी को जल संरक्षण की विरासत दी जा सके।

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