श्योपुर 20 फरवरी 2026
ग्रामीण अंचल की सादगी भरी धरती पर उस समय एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब श्योपुर जिले के जेदा गांव में दूल्हा हेलीकॉप्टर से बारात लेकर रवाना हुआ। यह केवल एक शादी नहीं थी, बल्कि एक पिता के सपने, परिवार की खुशियों और परंपराओं के सम्मान का संगम बन गई।
दूल्हे के पिता राम सिंह मीणा की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि उनके बेटे की बारात कुछ अलग हो—ऐसी जिसे लोग याद रखें, और जिसमें बेटे की नई जिंदगी की शुरुआत आसमान की ऊंचाइयों जितनी शुभ मानी जाए। पुत्र अजय के विवाह पर परिवार ने इस सपने को साकार किया। जैसे ही हेलीकॉप्टर गांव में उतरा, खेत-खलिहानों से लोग दौड़ पड़े। बच्चों की आंखों में कौतूहल था, बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान, और माहौल में उत्सव की सजीव धड़कन।
प्रशासन भी इस विशेष आयोजन में पूरी तरह सजग रहा। सुरक्षा व्यवस्था, आवश्यक प्रबंधन और एहतियातन दमकल दस्ता मौके पर तैनात किया गया, ताकि खुशी के इस अवसर में कोई व्यवधान न आए। इसके बाद दूल्हा हेलीकॉप्टर में सवार होकर बारात सहित राजपुरा के लिए रवाना हुआ—एक ऐसा दृश्य जिसे देखने लोग देर तक आसमान निहारते रहे।
दुल्हन पक्ष ने भी सादगी और संस्कारों की मिसाल पेश की।
दुल्हन पक्ष की ओर से बड़ौदा क्षेत्र में सम्मान और सादगी से जीवन जीने वाले परम्परागत पटेल भेरूलाल जी का परिवार सामाजिक आदर्श के रूप में जाना जाता है। भेरूलाल जी सदैव बिना दिखावे के, गांव और समाज के हित को प्राथमिकता देने वाले व्यक्तित्व रहे हैं। उनका परिवार संपन्न होते हुए भी सरल जीवन और परम्पराओं के पालन के लिए क्षेत्र में विशेष सम्मान रखता है। यही विश्वास और सामाजिक सेवा की विरासत आगे बढ़ाते हुए ग्रामवासियों ने उनके पुत्र शिवराज सिंह को सरपंच पद पर विजय दिलाई, जो आज भी उसी सादगी और जिम्मेदारी के साथ गांव के विकास और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वर्तमान सरपंच शिवराज मीणा के परिवार ने पूरे समारोह को परंपरागत रीति-रिवाजों और आत्मीयता के साथ संपन्न कराया। परिवार अपनी सादगी, सामाजिक सम्मान और बिना दिखावे के जीवन के लिए क्षेत्र में जाना जाता है। यही कारण रहा कि आधुनिकता के इस अनोखे माध्यम के बावजूद विवाह की आत्मा पूरी तरह भारतीय संस्कारों में रची-बसी रही।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले दिन सुबह हेलीकॉप्टर द्वारा गणेश जी मंदिर, श्योपुर तथा चंद्रसागर तालाब महादेव मंदिर पर पुष्प वर्षा की गई। यह दृश्य आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम बन गया—मानो आशीर्वाद स्वयं आकाश से बरस रहा हो।
विदाई का क्षण भावुक कर देने वाला था। परिजनों की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे खुशी से दमक रहे थे। दूल्हा-दुल्हन अपने माता-पिता के साथ हेलीकॉप्टर से वापस श्योपुर क्षेत्र स्थित अपने गृह ग्राम लौटे। गांव में उनके स्वागत के लिए लोग पहले से इंतजार कर रहे थे—जैसे कोई उत्सव फिर से लौट आया हो।
यह विवाह केवल एक अनूठी बारात नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि आधुनिक साधनों को अपनाते हुए भी अपनी जड़ों, संस्कारों और सादगी को संजोकर रखा जा सकता है। ग्रामीण जीवन की आत्मीयता और नई सोच का यह संगम लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।
