श्योपुर, 18 फरवरी 2026
श्योपुर जिले की कराहल तहसील अंतर्गत सूंसवाड़ा ग्राम पंचायत के रजपुरा गांव में हालात ऐसे हैं कि लोग सरकारी योजनाओं के कागजी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच पिसने को मजबूर हैं। यहां गरीब आदिवासी परिवार पिछले करीब छह महीने से पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार दीपावली के समय खराब हुई पेयजल मोटर आज तक ठीक नहीं कराई गई। मोटर पानी की टंकी के पास ही बाहर पड़ी है, लेकिन उसे सुधारने की दिशा में पंचायत ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पाइपलाइन भी जर्जर हालत में है, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है।
विडंबना देखिए—
रहते मध्यप्रदेश में हैं, लेकिन पानी पीने के लिए राजस्थान जाना पड़ रहा है।
ग्रामीण रोजाना सीमा पार जाकर पानी भरते हैं। वहां भी उन्हें ताने सुनने पड़ते हैं—
“अपनी मोटर ठीक नहीं करा सकते और हमारे यहां पानी लेने आ जाते हो।”
गांव के लोगों का सवाल है कि क्या गरीब होना ही उनकी सबसे बड़ी सजा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत सचिव सुरेश जोशी को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। न मोटर सुधरी, न पाइपलाइन बदली, न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
एक ओर सरकार जल जीवन मिशन के माध्यम से “हर घर नल से जल” का दावा कर रही है, वहीं रजपुरा के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
यहां विकास के नल नहीं, बल्कि लापरवाही की पाइपलाइन बह रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मोटर मरम्मत, पाइपलाइन सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
दो से चार दिन में मोटर निकलवाकर मागवता हु और ठीक करके व्यवस्था कर देता हूँ
पंचायत सचिव सुरेश जोषी
Crime National News – जमीनी सच
कागजों में बहता पानी और जमीन पर सूखी प्यास—
योजनाएं तब तक अधूरी हैं, जब तक आखिरी गांव तक पानी नहीं पहुंचता।
रजपुरा की प्यास आज सिस्टम से जवाब मांग रही है।
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