पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरण से ही संभव है मन रूपी कंस का वध – साध्वी मेरुदेवा भारती

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श्योपुर 30/12/25

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 25 से 31 दिसंबर 2025 तक पुलिस स्टेशन ग्राउंड (कथा स्थल), बड़ोदा, जिला श्योपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस पर भागवताचार्या महामनस्विनी साध्वी मेरुदेवा भारती ने “कंस वध” प्रसंग का आध्यात्मिक रहस्य उद्घाटित किया।

साध्वी जी ने कहा कि कंस पाप, अधर्म और बुराई का प्रतीक है, जिसका वास्तविक वध तभी संभव हुआ जब भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा में पदार्पण हुआ। आज के समाज में बढ़ते पाप और भ्रष्टाचार का मूल भी मन है। मन के अधीन होकर ही व्यक्ति पाप की ओर अग्रसर होता है। बाहरी उपाय और कानून भी तब तक प्रभावी नहीं हो सकते, जब तक मन का परिष्कार न हो।

उन्होंने कबीर के दोहे के माध्यम से मन की शुद्धि पर बल देते हुए कहा कि धर्म की स्थापना पहले भीतर होती है, तभी बाहर संभव हो पाती है। जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ब्रह्मज्ञान देकर पहले उसके भीतर के विकारों का नाश किया, तत्पश्चात वह धर्म युद्ध में विजयी हुआ।

साध्वी मेरुदेवा भारती ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को एक पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु की आवश्यकता है, जो ईश्वर का साक्षात्कार कराकर मन को सही दिशा दे सके। महात्मा बुद्ध द्वारा अंगुलिमाल का परिवर्तन और गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से तिहाड़ जेल के कैदियों का सत्संग के माध्यम से जीवन परिवर्तन इसके सशक्त उदाहरण हैं।

उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि वासनाओं और विकारों से ग्रस्त मन को केवल ब्रह्मज्ञान ही शांत कर सकता है। पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु की शरण में जाने से ही मन रूपी कंस का वास्तविक वध संभव है।

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