श्योपुर, 28 सितंबर 2025
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर पराली प्रबंधन को लेकर जिलेभर में अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अधिकारियों की टीम गांव-गांव जाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और वैकल्पिक उपायों की जानकारी दे रही है।
आज दलारना कलां, मलारना, इचनाखेड़ी, सूसवाडा और बड़ौदाराम ग्रामों में अधिकारियों ने चौपाल लगाकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभाव बताए।
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पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है।
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खेत का तापमान बढ़कर मित्र जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
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गेहूं की बुवाई लेट होती है और उत्पादन पर असर पड़ता है।
सुपर सीडर और बेलर पर जोर
अधिकारियों ने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर सबसे कारगर विकल्प है।
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इसकी खरीद पर सरकार ₹1.20 लाख का अनुदान दे रही है।
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किसान मात्र ₹1.30 लाख खर्च कर सुपर सीडर ले सकते हैं।
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यह पराली को काटकर खेत में मिला देता है, जिससे जैविक खाद तैयार होती है और सीधे बोवनी भी हो जाती है।
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कम बीज में गेहूं की बुवाई समय पर संभव हो जाती है और उत्पादन भी बढ़ता है।
इसके अलावा बेलर मशीन से पराली के बंडल तैयार कर किसान इसे ₹200 प्रति क्विंटल के हिसाब से जिले में मौजूद बायोफ्यूल प्लांट को बेच सकते हैं।
सूसवाडा में लाइव डेमो
ग्राम सूसवाडा में किसानों को सुपर सीडर का लाइव डेमो दिखाया गया। किसान बंजरग आदिवासी के खेत में मशीन चलाकर इसकी कार्यप्रणाली समझाई गई। इस अवसर पर जनपद पंचायत कराहल के सीईओ राकेश शर्मा, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी राजू जाटव, कृषि विस्तार अधिकारी सचिन बिरला, सुपर सीडर कंपनी के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
