श्योपुर, 16 सितंबर 2025
नगर पालिका ने पुलिस लाइन के सामने जिला पंचायत बंगले के बगल से होकर बनने NH 552 के नाले को लेकर वहां बनी गुमटियों को हटाने का अल्टीमेटम जारी कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि गुमटियां नाले के निर्माण में बाधा बन रही हैं, इसलिए इन्हें हटाना जरूरी है।



लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन दुकानदारों ने 25 जून 2002 से बाकायदा नगर पालिका के एग्रीमेंट पर किराए की दुकानें लीं, हर माह ₹100 से लेकर ₹1100 तक का किराया भरा, जो जुलाई 2025 तक नियमित जमा है, उन दुकानदारों को अब अचानक उजाड़ने की नौबत क्यों आई?



करीब 25 से 30 दुकानदार, जो पिछले 20 सालों से अपनी गुमटी या दुकान में बैठकर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं, अब बेरोजगारी और उजड़ने की कगार पर हैं। दुकानदारों का कहना है –
“नगर पालिका ने हमें दुकान किराए पर दी, किराया लिया, रसीद दी। अब जब हमें यहां से हटाया जाएगा तो हमारे बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा? हम कहां जाएंगे?”




प्रशासन की सख्ती के बीच दुकानदारों की बेबसी साफ झलक रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब नगर पालिका ने खुद किराया लिया और दुकानों का एग्रीमेंट किया, तो अब हटाने की कार्रवाई से इन परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
इधर, सीएमओ राधा रमण यादव ने सभी दुकानदारों को मीटिंग के लिए बुलाया है। अब देखना होगा कि इस बैठक से कोई ठोस समाधान निकलता है या फिर बुधवार से दर्जनों परिवार दर-दर भटकने को मजबूर हो जाएंगे।
👉 प्रशासन का अल्टीमेटम और दुकानदारों की बेबसी—यह टकराव अब शहर में बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है।