श्योपुर, 07 मार्च 2025
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के उपलक्ष्य में भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिले की दो ऐसी शख्सियतों को भी इस कार्यक्रम के माध्यम से सम्मानित होने का अवसर मिल रहा है, जिन्होने अपनी मेहनत और कार्यो से लोगों को प्रेरणा दी है। एक है किन्नर कोमल गुरू जिन्हें इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाजसेवा पुरस्कार से नवाजा जायेगा। दूसरी एनआरएलएम अंतर्गत स्वसहायता समूहो से जुडी श्रीमती सुनीता आदिवासी है, जिन्होंने कडे परिश्रम और व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाते हुए अपने परिवार को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का न केवल कार्य किया, बल्कि समूह से जुडी हजारो महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी बन गई है। श्रीमती सुनीता आदिवासी को उक्त कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष शासन, प्रशासन के सहयोेग से आर्थिक रूप से निर्भर होने की सफलता के संबंध में अपने अनुभव शेयर करने का आमंत्रण मिला है।
राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होंगी किन्नर कोमल गुरू
श्योपुर जिले की निवासी किन्नर कोमल गुरू को राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2023 के राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाजसेवा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव उन्हें यह सम्मान देंगे। श्योपुर जिले के लिए यह बडे गौरव की बात है, जब यहां की किसी शख्सियत को इस राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।
जिला प्रशासन एवं महिला बाल विकास विभाग द्वारा किन्नर कोमल गुरू के सामाजिक कार्यो को उचित मंच पर प्रदर्शित करते हुए राज्य सरकार को उक्त पुरस्कार के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।
उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यो के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान वाली किन्नर कोमल गुरू को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित करने की पहल जिला प्रशासन द्वारा की गई थी। श्रीराम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं संगीतमयी रामकथा के आयोजन के साथ ही गरीब बेटियों के विवाह के लिए भी ईश्वर की प्रेरणा से कार्य करने वाली कोमल अब तक कई बेटियों के विवाह संपन्न करा चुकी है। इसके अलावा न केवल गरीब बच्चो को पढाई में मदद करती है बल्कि जरूरत मंद महिलाओं को रोजगार दिलवाने में भी सहायता कर रही है। फक्कड़ चौराहे पर स्थित अपने आश्रम में जरूरतमंदो को भोजन आदि की सुविधाएं भी उनके द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।
महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान का आईकॉन बनी सुनीता

आदिवासी अंचल के ग्राम गोरस की निवासी श्रीमती सुनीता आदिवासी जनजाति सहरिया समुदाय से आती है, कभी बेहद गरीबी में जीवन यापन करने वाली सुनीता आदिवासी समाज की उन गिनी चुनी महिलाओ में से एक थी, जो कक्षा 10 तक पढी हुई थी। पढाई के प्रति अपनी लगन के चलते उन्होने अपनी शादी के बाद इंटर मीडियेट परीक्षा पास की और सहरिया समाज की बालिकाओं को पढने के लिए प्रोत्साहित किया। एनआरएलएम अंतर्गत संचालित दुर्गा स्वसहायता समूह से जुडकर उन्होने अपने सामाजिक जीवन की शुरूआत की। समाज में नशे के खिलाफ अलख जगाने वाली सुनीता तब चर्चा में आई जब उन्होने गांव की महिलाओं को एकत्रित कर गांव में शराब बंदी के लिए अभियान चलाया। उनके इस कार्य को देखते हुए उन्हें 30 गांव के संकुल स्तरीय संगठन का अध्यक्ष बनाया गया। अपने व्यवसायिक दृष्टिकोण के आधार पर उन्होने न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का कार्य किया, बल्कि समूह से जुडी महिलाओं को भी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए दिशा प्रदान की। शासन के सहयोग से उन्होने सिलाई कार्य, वनोपज संग्रहण, आटा चक्की, कस्टम हायरिंग सेंटर, फसल उत्पादन आदि से जुडकर अपने परिवार की वार्षिक आय को 10 लाख रूपये तक पहुंचा दिया। आज वे समता सखी, राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर के साथ ही संभाग स्तर पर गठित एक मात्र महिला आजीविका औद्योगिक सहकारी संस्था शिवपुरी की उपाध्यक्ष भी है। उनके द्वारा शासन के सहयोग से ऋण लेकर आजीविका एक्सप्रेस का सफल संचालन भी किया जा रहा है। अपने बच्चों को पढा लिखाकर काबिल बनाने की दिशा में भी उन्होने कार्य किया। उनका एक पुत्र पोस्टमैन की नौकरी में है
