डिलेवरी प्वांइट पर जननी एक्सप्रेस की व्यवस्था सुनिश्चित की जायें-डीएम जिला चिकित्सालय में नेत्र सहायक की व्यवस्था करने के निर्देश कलेक्टर ने की स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा

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श्योपुर, 28 फरवरी 2025
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने कहा है कि सेंसईपुरा, आवदा, गोरस एवं कालीतलाई डिलेवरी प्वांइट पर जननी एक्सप्रेस की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायें, जिससे प्रसव के दौरान इमरजेन्सी पर प्रसूताओं को तत्काल जिला चिकित्सालय अथवा नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शिफ्ट किया जा सकें। इसके साथ ही उन्होने कहा कि जिला चिकित्सालय श्योपुर में रिक्त नेत्र सहायक के पद पर अन्यत्र चिकित्सालय से व्यवस्था सुनिश्चित की जायें। वे आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा कर रहे थे।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने निर्देश दिये कि गत 6 माह में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं पर हुई डिलेवरी की जानकारी अगली बैठक में प्रदान की जायें, इसके साथ ही डिलेवरी के केस जहां से अधिक रैफरल हो रहे है, उसकी समीक्षा की जाये। रैफरल केसो में यह सुनिश्चित किया जाये कि जिस संस्था से रैफर किया गया है, वहां महिला को प्रारंभिक उपचार दिया गया है।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत शून्य से 18 वर्ष तक की आयुवर्ग के बच्चों एवं किशोरो को उपचार उपलब्ध कराया जाये तथा इसके लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाये। उन्होने कहा कि कटे फटे होठ के ऑपरेशन, क्लबफुट, हद्यरोग, कॉकलियर इम्प्लांट आदि मामलों में ऑपरेशन कराये जाये। इसके साथ ही उन्होने सिविल सर्जन डॉ आरबी गोयल को निर्देश दिये कि आंखो की जांच एवं उपचार के साथ ही आवश्यकतानुसार रोगियों को निशुल्क रूप से चश्मे उपलब्ध कराये जाये। गर्भवती महिलाओं का एएनसी रजिस्ट्रेशन अनमोल पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज किया जाये। उन्होने निर्देश दिये कि अनमोल पोर्टल पर सही जानकारी फीड न करने से जननी सुरक्षा योजना एवं प्रसुती सहायता योजना में लाभ मिलने में विलम्ब होता है। गलत फीडिंग करने वाले एएनएम को चिन्हित कर कार्यवाही की जाये। इसके साथ ही उन्होने कहा कि गर्भवती महिलाओं की एनीमिक जांच नियमित रूप से की जाये तथा आयरन टेबलेट के साथ ही आयरन शुक्रोज लगाया जाये। नियमित रूप से फॉलोअप किया जाये तथा सुमन हेल्पडेस्क के माध्यम से हाइरिस्क गर्भवती महिलाओं का फॉलोअप किया जाये। हाइरिस्क गर्भवती महिलाओं को वर्थ वेटिंग कक्ष में रखकर उचित देखभाल की जाये।
इस अवसर पर दस्तक अभियान, एनसीडी, आरबीएसके, क्षय रोग नियंत्रण, कुष्ठ उन्मुलन, मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम, मेडिकल मोबाइल यूनिट आदि कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।

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