🔥 चीता दिवस पर कूनो में हुआ कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का शुभारंभ 🔥
श्योपुर 4 दिसम्बर 2025
दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता वीरा ने फरवरी 2025 में दो स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। करीब नौ माह की उम्र पूरी कर चुके ये दोनों शावक अब अपनी माँ के साथ खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा इन्हें रिलीज किए जाने के बाद जंगल में मौजूद चीतों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।
खुले जंगल में पहले 16 चीते थे, वहीं वीरा और उसके दो शावकों के शामिल होने के बाद यह संख्या 19 हो गई है।
कूनो में अब कुल 29 चीते — 8 वयस्क, 21 शावक
कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 29 चीते मौजूद हैं, जिनमें
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8 वयस्क चीते
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21 शावक शामिल हैं।
इसके अलावा गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते संरक्षित किए जा रहे हैं।
पर्यटन को मिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा
चीता प्रोजेक्ट की सफलता के साथ कूनो अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यहाँ बढ़ती पर्यटक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं को भी बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।
प्रधानमंत्री के प्रति आभार
हम सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आभारी हैं कि चीतों को पुनर्जीवित करने के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश की पवित्र धरती — कूनो — को चुना। यह फैसला आज पूरी दुनिया में संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है।

चीता दिवस पर ऐतिहासिक आयोजन
चीता दिवस के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया—
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CM द्वारा वर्ष 2025 का विशेष चीता कैलेंडर जारी किया गया।
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‘क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीता इन कूनो नेशनल पार्क’ पुस्तक का विमोचन।
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कूनो शोवेनियर शॉप का लोकार्पण, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
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चीता कैलेंडर, शोवेनियर शॉप व पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा तीन महत्वपूर्ण लोकार्पण किए गए—
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कूनो नेशनल पार्क का विशेष चीता कैलेंडर 2025 जारी किया गया।
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कूनो शोवेनियर शॉप का लोकार्पण, जिसमें चीता-थीम आधारित सामग्री उपलब्ध रहेगी।
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‘क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-राइजिंग चीता इन कूनो नेशनल पार्क’ पुस्तक का विमोचन, जिसमें कूनो में चीतों के संरक्षण व प्रबंधन का विस्तृत विवरण शामिल है।
कैलेंडर के सभी पृष्ठों पर कूनो के विभिन्न चीतों की आकर्षक तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं, जो पार्क की जैव-विविधता का शानदार प्रतिबिंब हैं।
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आज का दिन संरक्षण इतिहास में दर्ज
कूनो में विस्तार पाता चीता परिवार न सिर्फ जैव विविधता का प्रतीक है, बल्कि भारत की सफल वन्यजीव नीति और संरक्षण क्षमता को भी दर्शाता है।
आज का दिन चीता संरक्षण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।
