भोपाल, 7 नवम्बर 2025
मध्यप्रदेश सरकार ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देशन में ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब हर साल 15 नवम्बर ‘राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस’ पर पात्र आजीवन कारावासियों को समय-पूर्व रिहाई मिलेगी।
राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देशन में मध्यप्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय लिया है। अब 15 नवम्बर, राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे पात्र बंदियों को समय-पूर्व रिहाई दी जाएगी। इस वर्ष 32 बंदियों, जिनमें 9 आदिवासी बंदी शामिल हैं, को रिहा किया जाएगा। इस संबंध में जेल विभाग मंत्रालय द्वारा 7 नवम्बर 2025 को आदेश जारी किया गया है।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर लिया गया यह निर्णय मध्यप्रदेश को देश का पहला ऐसा राज्य बना देता है, जहां वर्ष में पांच बार आजीवन कारावास के दंडित बंदियों को दिशा-निर्देशों के अनुसार सजा से छूट देकर रिहा किया जाएगा।
मध्यप्रदेश शासन के जेल विभाग मंत्रालय ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432, 433 और 433(क) (तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 473, 474 और 475) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, नई रिहाई नीति में 15 नवम्बर (राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस) को शामिल किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के इस एतिहासिक निर्णय ने 15 नवम्बर को राष्ट्रीय स्तर के चार प्रमुख दिवसों — स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), गांधी जयंती (2 अक्टूबर) और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) — के समकक्ष एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवस के रूप में स्थापित कर दिया है।
राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा के “स्वधर्म से स्वराज” के संघर्ष, जनजातीय अस्मिता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रतीक है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल के इस निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि यह दिवस केवल जनजातीय समाज का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का गौरव दिवस है — इसीलिए पात्रता के अनुसार हर वर्ग के 32 आजीवन कारावासियों को समय-पूर्व रिहाई दी जा रही है।
✍️ डॉ. दीपमाला रावत
विषय विशेषज्ञ, जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन
भोपाल, मध्यप्रदेश
