रासायनिक हथियार निषेध संगठन की एशिया क्षेत्रीय बैठक नई दिल्ली में संपन्न: एशियाई देशों के बीच सहयोग को नई गति

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नई दिल्ली, 03 जुलाई 2025
भारत की राजधानी दिल्ली में 1 से 3 जुलाई 2025 तक रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) की एशिया क्षेत्रीय बैठक का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। वाणिज्य भवन में आयोजित इस तीन दिवसीय बैठक की मेजबानी भारत के नेशनल अथॉरिटी केमिकल वेपन्स कन्वेंशन (NACWC) द्वारा की गई। यह 23वीं क्षेत्रीय बैठक थी, जिसमें एशिया के 24 सदस्य देशों के 38 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक का उद्देश्य रासायनिक हथियार सम्मेलन (CWC) के कार्यान्वयन से जुड़े अनुभव, सर्वोत्तम प्रथाएं और चुनौतियां साझा करना था, साथ ही क्षेत्रीय और द्विपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा देना रहा। इस सम्मेलन में OPCW, संयुक्त राष्ट्र क्षेत्रीय निरस्त्रीकरण केंद्र (UNRCPD), भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मुख्य चर्चा बिंदु:

  • राष्ट्रीय विधायी ढांचे को सुदृढ़ करने की रणनीतियाँ

  • रासायनिक सुरक्षा एवं सुरक्षा प्रबंधन

  • रासायनिक उद्योग की भूमिका

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का रासायनिक हथियारों की निगरानी में संभावित उपयोग

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 के अनुपालन में समन्वय

  • OPCW के मेंटरशिप/पार्टनरशिप कार्यक्रम की आगामी योजनाएँ

भारत, जो CWC का एक मूल हस्ताक्षरकर्ता देश है, ने हाल ही में केन्या की राष्ट्रीय प्राधिकरण को सफलतापूर्वक OPCW मेंटरशिप कार्यक्रम के अंतर्गत मार्गदर्शन देकर वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत किया है।

इसके अतिरिक्त, भारत के भारतीय रासायनिक परिषद (ICC) को रासायनिक सुरक्षा, अनुपालन और उद्योग-व्यापी सुरक्षा प्रथाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए OPCW-द हेग पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। यह पहली बार है जब किसी रासायनिक उद्योग निकाय को यह वैश्विक प्रतिष्ठा मिली है।

सम्मेलन का निष्कर्ष
इस बैठक के माध्यम से एशियाई देशों के बीच संवाद और सहयोग की एक नई शुरुआत हुई है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रूप से रासायनिक हथियारों के पूर्ण उन्मूलन और CWC के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

ओपीसीडब्ल्यू द्वारा आयोजित इस प्रकार की क्षेत्रीय बैठकें न केवल तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देती हैं, बल्कि शांति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साझा लक्ष्यों को भी सुदृढ़ करती हैं।

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