एनसीईआरटी एवं राज्य शिक्षा केन्द्र की पुस्तको का करें उपयोग-कलेक्टर अकादमिक सत्र शुरू होने से पहले सार्वजनिक करनी होगी स्कूल फीस की जानकारी कलेक्टर की अध्यक्षता में निजी विद्यालय संचालको की बैठक आयोजित

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श्योपुर, 06 -4-2024
कलेक्टर  लोकेश कुमार जांगिड ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयो का विनियमन) नियम 2020 के प्रावधानो से अवगत कराने हेतु आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी तथा एमपी बोर्ड स्कूलो में राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा निर्धारित पुस्तको का उपयोग किया जायें। उन्होंने कहा कि इन किताबो का बौद्धिक स्तर काफी बेहतर होता है तथा इन किताबो का चयन हाई लेबल कमेटी द्वारा किया जाता है, इसलिए अध्यापन में इनका उपयोग किया जायें। विशेष परिस्थितियों में किसी विषय हेतु एनसीईआरटी पुस्तको के अतिरिक्त अन्य पुस्तको का उपयोग करना बहुत ही आवश्यक हो तो केवल मानक प्रकाशको की उच्च गुणवत्तापूर्ण पुस्तको का उपयोग करें, जो अधिक से अधिक पुस्तक विक्रेताओं के पास उपलब्ध हों।
उन्होने कहा कि ऐसे स्कूल संचालक जिन्होंने किसी विशेष बुक सेलर से किसी भी प्रकार का कॉन्टेक्ट किया हुआ है, उनके विरूद्ध अधिनियम के तहत कार्यवाही की जायेगी। उन्होने कहा कि डीपीआई के पोर्टल पर इस प्रकार का शपथ पत्र भी देना होता है कि हमारा किसी भी बुक सैलर तथा पब्लिशर से किसी प्रकार का कोई संबंध नही है। बुक सैलर से किसी भी प्रकार का टायअप पाये जाने पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। नैतिकता के आधार पर भी निजी विद्यालय यह सुनिश्चित करे कि उनके स्कूल की किताबे मल्टीपल बुक स्टोर पर उपलब्ध रहें तथा अभिभावक अपनी स्वैच्छा से कोर्स क्रय कर सकें, इस पर किसी भी प्रकार का दबाव नही होना चाहिए।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड ने निर्देश दिये कि सभी निजी विद्यालय डीपीआई के पोर्टल पर फीस निर्धारण की जानकारी तथा स्कूल की सामान्य जानकारी अपलोड करेंगे। अकादमिक वर्ष शुरू होने से 90 दिन पहले विद्यालयो को फीस के बारे में जानकारी अपलोड करनी चाहिए अर्थात अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र के लिए फीस निर्धारण क्या रहेगा, इसकी जानकारी विद्यालयो को पिछले वर्ष के दिसंबर माह में अपलोड करनी होगी। इसमें ट्यूशन फीस, लाइब्रेरी, कोशन मनी, कम्प्युटर लैब फीस, कल्चर कार्यक्रम फीस, प्रोसपेक्ट फीस जो भी हो सभी को अपलोड करना होगा, यदि विद्यालय प्रबंधन फीस बढाते है तो 10 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि सीधे पोर्टल पर की जा सकती है, 15 प्रतिशत वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति से अनुमोदन लेना होगा और यदि 15 फीसदी से अधिक वृद्धि करनी है तो राज्य स्तरीय कमेटी से अनुमोदन लिया जाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिये कि सभी विद्यालय पिछले तीन वित्तीय वर्षो की चार्टड अकाउंटेन्ट के माध्यम से तैयार कराई गई बैलेस शीट भी अपलोड करेंगे। इसके साथ ही विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी फीस का विवरण प्रदर्शित किया जायें। निजी विद्यालय के संचालको को इन नियमो का सख्ती पालन करने के निर्देश दिये गये।
कलेक्टर  लोकेश कुमार जांगिड ने कहा कि कोई भी विद्यालय तीन साल तक की अवधि में यूनिफोर्म में परिवर्तन नही करेंगे। विद्यालय प्रबंधन द्वारा पुस्तके एवं अन्य सामग्री तथा यूनिफोर्म आदि खरीदने के लिए अभिभावको पर दबाव नही डाला जायेगा तथा विद्यालय से इस प्रकार की गतिविधियां भी नही करेगे, शिकायत मिलने अथवा स्वयं संज्ञान लेकर कमेटी विद्यालय परिसरो का निरीक्षण भी कर सकती है। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी  रविन्द्र सिंह तोमर, डीपीसी डॉ पीएस गोयल, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण  एमपी पिपरैया सहित बीईओ, बीआरसी तथा निजी विद्यालयो के संचालक उपस्थित थे।

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