
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को बाल अधिकार, लैंगिक हिंसा, ऑनलाइन उत्पीड़न और कानूनी संरक्षण की दी जानकारी; न्यायिक अधिकारियों ने किया जागरूक
श्योपुर, 01 नवंबर 2026
बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की भी सामूहिक जवाबदेही है। इसी उद्देश्य से श्योपुर के सांदीपनि (सीएम राइज) विद्यालय में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय ‘उड़ान’ कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, पॉक्सो अधिनियम-2012, साइबर सुरक्षा और किशोरों के स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का मार्गदर्शन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बी.एल. प्रजापति ने किया। राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम माननीय कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की उपस्थिति में ऑनलाइन यू-ट्यूब के माध्यम से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से की गई।
न्यायिक अधिकारियों ने किया कार्यशाला का शुभारंभ
राज्य स्तरीय ऑनलाइन कार्यक्रम के बाद सांदीपनि विद्यालय में स्थानीय कार्यशाला का शुभारंभ प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रतिष्ठा अवस्थी तथा द्वितीय सिविल न्यायाधीश वरिष्ठ खंड अमोघ अग्रवाल ने किया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बच्चों की सुरक्षा और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
पॉक्सो कानून और शिकायत प्रक्रिया समझाई
कार्यशाला में तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश बबीता होरा शर्मा तथा तृतीय सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ खंड मंदीप कौर सहमी ने बच्चों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम और पॉक्सो अधिनियम-2012 के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बच्चों के साथ होने वाले अपराधों के मामलों में शिकायत और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जा सकती है।
सोशल मीडिया पर सावधानी, साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताए
डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। सहायक उपनिरीक्षक एवं प्रभारी साइबर सेल श्योपुर संजय यादव ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन जोखिम और साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए। उन्होंने उपलब्ध कानूनी उपचारों के बारे में भी जानकारी दी।
करियर से लेकर आधुनिक कृषि व्यवसाय तक मार्गदर्शन
शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के उच्चतर माध्यमिक शिक्षक सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने करियर मार्गदर्शन और भविष्य की तैयारी पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों, जरूरी कौशल, लक्ष्य निर्धारण, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक अवसरों के बारे में बताया। साथ ही आधुनिक तकनीक आधारित कृषि व्यवसाय की संभावनाओं पर भी मार्गदर्शन दिया।
किशोरों के स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती पर जोर
इस्कॉन के बृजेन्द्र कृष्ण दास ने ऑनलाइन माध्यम से किशोरों के समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, पोषण, अच्छी जीवनशैली, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य, पर्याप्त नींद, व्यायाम और डिजिटल संतुलन के महत्व को समझाया।
जिला विधिक सहायता अधिकारी अंकिता शांडिल्य ने किशोर स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण विषय पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने तनाव, मित्रों के दबाव, आत्मविश्वास, शारीरिक छवि, भावनात्मक मजबूती, संवाद और लैंगिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर चर्चा की।
समूह गतिविधियों से समझाए संवेदनशील मुद्दे
कार्यशाला में समूह कार्य और रोल प्ले गतिविधियों के माध्यम से लैंगिक हिंसा, बुलिंग तथा ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे गंभीर विषयों को समझाया गया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियों की पहचान करने, सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य अशोक खण्डेलवाल, शिक्षकगण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्योपुर के कर्मचारी उपस्थित रहे।
सुरक्षित बचपन अभियान का संदेश स्पष्ट है—बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी, सुरक्षित वातावरण और समय पर कानूनी सहायता मिले, ताकि वे भयमुक्त होकर अपना भविष्य संवार सकें।