
श्योपुर के झरेर में वृक्षारोपण क्षेत्र में गाय चराने को लेकर हुआ था विवाद; वन अपराध की कार्रवाई के बाद वनकर्मी से मारपीट का मामला, विशेष एससी-एसटी न्यायालय ने सुनाया फैसला
श्योपुर, 01 नवंबर 2026
शासकीय ड्यूटी कर रहे वनरक्षक के साथ मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में विशेष न्यायालय ने दो आरोपियों को सजा सुनाई है। न्यायालय ने चौन्या उर्फ चौनाराम गुर्जर और गिरधारी गुर्जर को दोषसिद्ध ठहराते हुए प्रत्येक को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,500-1,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। दोनों आरोपियों पर कुल 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर प्रत्येक को 20 दिन का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायालय, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, श्योपुर ने यह निर्णय 15 अक्टूबर 2026 को सुनाया। प्रकरण में न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 221 तथा धारा 121(1) के साथ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(va) के तहत आरोपियों को दोषसिद्ध किया।
वृक्षारोपण क्षेत्र में गाय चराने को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, घटना 2 फरवरी 2025 की सुबह लगभग 7:45 से 8:30 बजे के बीच ग्राम झरेर स्थित कक्ष क्रमांक आर.एफ. 472 के ग्रीन इंडिया मिशन वृक्षारोपण क्षेत्र की है। उस समय वनरक्षक मनोज आदिवासी अपने साथी वनकर्मियों के साथ शासकीय कार्य कर रहे थे।
इसी दौरान वृक्षारोपण क्षेत्र में गाय चराने को लेकर विवाद हो गया। आरोप था कि वन अपराध की कार्रवाई किए जाने के बाद आरोपियों ने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर वनरक्षक के साथ मारपीट की। इस घटना में वनरक्षक के शरीर पर चोटें आई थीं।
बरगवां थाने में दर्ज हुआ था मामला
घटना के संबंध में थाना बरगवां में अपराध क्रमांक 09/2025 दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई और अभियोजन की ओर से मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए।
कुछ आरोपों में दोषमुक्ति, शेष अपराधों में सजा
विशेष न्यायाधीश सुशील कुमार ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 132, 221 तथा धारा 121(1) सहपठित एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(va) के अंतर्गत दोषसिद्ध किया।
वहीं, न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं 3(1)(r) और 3(1)(va) के आरोपों से दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
शेष सिद्ध अपराधों के लिए प्रत्येक आरोपी को एक वर्ष का सश्रम कारावास और 1,500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों ने पहले न्यायिक अभिरक्षा में जितनी अवधि बिताई है, उसे उनकी कारावास की सजा में समायोजित किया जाएगा।
न्यायालय के इस फैसले से स्पष्ट है कि शासकीय कार्य के दौरान वनकर्मी के साथ मारपीट और कार्य में बाधा डालने के मामले में सुनवाई के बाद दोषसिद्ध आरोपियों को कारावास की सजा दी गई है।