अमिता सिंह 48 घंटे से अधिक हिरासत में, जमानत पर 1 अप्रैल को सुनवाई संभव

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श्योपुर दिनांक 28/3/26

CrimeNationalNews बाढ़ राहत घोटाले की आरोपी तत्कालीन बड़ौदा तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी को शनिवार शाम 48 घंटे पूरे हो गए हैं। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के अनुसार, किसी भी शासकीय अधिकारी के 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने पर उसे स्वतः निलंबित माना जाता है। ऐसे में अमिता सिंह तोमर के निलंबन की स्थिति बन गई है।

Shivpuri  अमिता सिंह तोमर को 26 मार्च को ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया था। 27 मार्च को रामनवमी के अवकाश के चलते जमानत आवेदन प्रस्तुत नहीं हो सका। शनिवार को आवेदन देने का प्रयास किया गया, लेकिन केस डायरी उपलब्ध न होने के कारण तत्काल सुनवाई संभव नहीं हो पाई। इसके बाद रविवार और सोमवार (महावीर जयंती) के अवकाश के कारण प्रक्रिया और टल गई। अब जमानत आवेदन पर सुनवाई 1 अप्रैल को होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कलेक्टर कार्यालय द्वारा शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम निलंबन आदेश राजस्व विभाग द्वारा जारी किया जाएगा।  Gwalior

जेल पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत, घर का खाना मांगा

TehsildarCase गिरफ्तारी के बाद अमिता सिंह ने शिवपुरी सर्किल जेल की महिला सेल में शुक्रवार-शनिवार की रात बिताई। जेलर रमेश आर्य के अनुसार, जेल में प्रवेश करते ही उन्हें चक्कर आने की शिकायत हुई। उन्होंने जेल का खाना खाने से इनकार करते हुए घर से भोजन मंगाने की मांग की। इस पर जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बाहरी खाना अनुमति के बिना अंदर नहीं लाया जा सकता और उन्हें जेल नियमों का पालन करना होगा। वर्तमान में अमिता सिंह अन्य 27 महिला बंदियों के साथ सेल में रह रही हैं।

AmitasinghTomar 2.57 करोड़ गबन मामला: कार्रवाई पर उठे सवाल

  FloodReliefScam  बाढ़ राहत घोटाले में लगभग 2.57 करोड़ रुपए के गबन के मामले में अब तक 110 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें पटवारी, उनके परिजन और तहसीलदार शामिल हैं। हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार तीन पटवारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि कई अन्य आरोपी अभी भी सेवा में बने हुए हैं। समान आरोपों के बावजूद अलग-अलग कार्रवाई से पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू: जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष जल्दबाजी BreakingNews

CorruptionCase  पूर्व शासकीय अधिवक्ता व्हीके शर्मा के अनुसार, किसी भी प्रकरण में सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं होती। जमानत के दौरान न्यायालय केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका का प्रारंभिक आकलन करता है। इसमें यह देखा जाता है कि कौन आरोपी प्रत्यक्ष रूप से शामिल है और कौन परोक्ष रूप से। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आरोप पत्र प्रस्तुत होने के बाद ही सामने आता है। इसलिए वर्तमान स्थिति में किसी भी आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निर्णय देना जल्दबाजी होगी।

 

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