गांव-गांव मिल रहा जनसमर्थन, पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल
श्योपुर, 22 फरवरी 2026
जिले की जीवनरेखा सीप नदी के संरक्षण के लिए निकली सीप संकल्प पदयात्रा तीसरे दिन मलपुरा पहुंच गई। पदयात्री नयागांव से यात्रा प्रारंभ कर फतेहपुर, जानपुरा और मऊ होते हुए रात्रि पड़ाव के लिए मलपुरा पहुंचे। यात्रा के दौरान पदयात्री सीप के गीत गाते हुए आगे बढ़ रहे हैं और ग्रामीणों को नदी संरक्षण व पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं।
यह पदयात्रा कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के तत्वावधान में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी से नदी पुनर्जीवन की भावना को मजबूत करना है।
रास्तेभर स्वागत, परंपराओं के साथ जुड़ रहा जनसमर्थन
यात्रा जहां-जहां पहुंच रही है, वहां ग्रामीण पारंपरिक तरीके से स्वागत कर रहे हैं। फतेहपुर, सेमल्दा और आसपास के गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने पदयात्रियों का अभिनंदन किया और अभियान को समर्थन दिया।
नायब तहसीलदार सहित विभिन्न अधिकारी भी यात्रा में शामिल होकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
अपर कलेक्टर भी हुए शामिल, दिया संरक्षण का संदेश
मऊ से मलपुरा तक यात्रा में अपर कलेक्टर #रूपेश उपाध्याय भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य केवल यात्रा करना नहीं, बल्कि समाज में नदियों और प्राचीन जलस्रोतों को सहेजने की चेतना जगाना है।
उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से संवाद करते हुए प्रकृति संरक्षण, बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
मानस मंडलों को भेंट की गई रामचरितमानस
ग्राम मऊ और मलपुरा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान मंदिरों में नियमित पाठ करने वाले मानस मंडलों को श्रीरामचरित मानस भेंट की गई। इसके माध्यम से सांस्कृतिक परंपरा और पर्यावरण चेतना को साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जागरूकता से जनभागीदारी तक — अभियान बन रहा आंदोलन
ग्रामीणों को समझाया गया कि
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नदी संरक्षण सीधे जीवन और कृषि से जुड़ा है,
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जल स्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है,
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स्वच्छता, वृक्षारोपण और जल बचत से ही नदी का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा।
मऊ में कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने पदयात्रियों को सम्मानपूर्वक मलपुरा के लिए विदा किया, जहां प्रवेश पर आत्मीय स्वागत हुआ।
25 फरवरी को त्रिवेणी संगम पर होगा समापन
सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों के नेतृत्व में जारी यह पदयात्रा 25 फरवरी को रामेश्वर त्रिवेणी संगम पर समापन के साथ एक बड़े सामूहिक संकल्प में परिवर्तित होगी।
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