414.79 करोड़ की परियोजना से 11,575 हेक्टेयर जमीन को मिलेगा पानी, एक लाख लोगों के लिए पेयजल की भी होगी व्यवस्था
श्योपुर, 10 अगस्त 2026 CrimeNationalNews
मूंझरी बांध निर्माण परियोजना को लेकर किसानों की चिंताओं और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सोमवार को श्योपुर में अहम बैठक हुई। कलेक्टर शीला दाहिमा की अध्यक्षता में एनआईसी कक्ष में आयोजित बैठक में मूंझरी क्षेत्र के किसानों के साथ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने परियोजना को लेकर खुलकर चर्चा की। बैठक में किसानों के हितों, निजी भूमि अधिग्रहण और बांध निर्माण की आगामी प्रक्रिया को लेकर सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई।
किसानों की जमीन पर कलेक्टर का भरोसा—हितों का रखा जाएगा पूरा ध्यान
बैठक में कलेक्टर शीला दाहिमा ने मूंझरी बांध निर्माण की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि परियोजना के लिए स्टेज-1 की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि स्टेज-2 के अंतर्गत वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट की तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। श्योपुर_न्यूज
किसानों के लिए सबसे अहम मुद्दा निजी भूमि अधिग्रहण रहा। कलेक्टर ने बताया कि मूंझरी बांध निर्माण के लिए करीब 99 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा विषय भी सामने है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के हितों का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा।
बैठक से ही प्रमुख सचिव वन विभाग से की बात
परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने को लेकर कलेक्टर शीला दाहिमा ने बैठक के दौरान ही प्रमुख सचिव, वन विभाग से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने स्टेज-2 से संबंधित प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई पर बातचीत की।
कलेक्टर की इस पहल से यह स्पष्ट हुआ कि मूंझरी बांध परियोजना की स्वीकृतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर निर्माण कार्य को गति देने पर प्रशासन का जोर है।
740.159 हेक्टेयर वन भूमि की स्टेज-1 मंजूरी पहले ही जारी
बैठक में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन चैतन्य चौहान ने परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूंझरी वृहद सिंचाई परियोजना के तहत बांध निर्माण के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 22 जुलाई 2026 को स्वीकृति जारी की जा चुकी है। मूंझरी_सिंचाई_परियोजना
परियोजना के अंतर्गत आने वाली 740.159 हेक्टेयर वन भूमि की स्टेज-1 की सैद्धांतिक स्वीकृति 15 अप्रैल 2026 को जारी हो चुकी है। वर्तमान में स्टेज-2 की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
अधिकारियों के अनुसार स्टेज-2 की प्रक्रिया पूरी होते ही अनुबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा बांध निर्माण का कार्य शुरू किया जा सकेगा।
414.79 करोड़ की परियोजना बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
मूंझरी के पास अहेली नदी पर 414.79 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित यह बांध परियोजना श्योपुर जिले के लिए बड़ी सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं में शामिल है।
परियोजना पूरी होने के बाद बड़ौदा और कराहल तहसील क्षेत्र के 11,575 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
एक लाख लोगों के लिए पेयजल का भी इंतजाम
मूंझरी बांध परियोजना सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है। परियोजना में 4.56 मिलियन घन मीटर पानी पेयजल के लिए आरक्षित रखा जाएगा। इससे करीब एक लाख लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। जल_संसाधन
यानी परियोजना के मूर्त रूप लेने के बाद एक तरफ खेतों को पानी मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बड़ी आबादी की पेयजल जरूरत भी पूरी करने में मदद मिलेगी।
किसानों और प्रशासन के बीच संवाद से आगे बढ़ी परियोजना
बैठक में मौजूद किसानों के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा सबसे संवेदनशील विषय है। ऐसे में प्रशासन द्वारा किसानों के साथ सीधे संवाद कर उनकी चिंताओं को सुनना परियोजना की आगे की राह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में डीएफओ सामान्य केएस रंधा, भाजपा जिला अध्यक्ष शशांक भूषण, पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय, भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य महावीर सिंह सिसौदिया, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र जाट, भाजपा जिला महामंत्री संजय अकोदिया, भाजपा किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष गौरीशंकर मीणा, पूर्व अध्यक्ष महावीर मीणा, गिर्राज चौधरी, ईई जल संसाधन चैतन्य चौहान सहित मूंझरी क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।
अब स्टेज-2 की मंजूरी पर टिकी निगाहें
मूंझरी बांध परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति और वन भूमि की स्टेज-1 प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब स्टेज-2 की कार्रवाई पूरी होना सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके बाद निर्माण एजेंसी के मौके पर उतरने का रास्ता साफ होगा।
414.79 करोड़ रुपये की लागत, 11,575 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र और करीब एक लाख लोगों के लिए पेयजल सुविधा वाली यह परियोजना श्योपुर के कृषि और जल प्रबंधन की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। अब किसानों की निगाहें प्रशासन के आश्वासन और स्टेज-2 की मंजूरी के बाद शुरू होने वाले निर्माण कार्य पर टिकी हैं।
