नवजात मिले तो तुरंत अस्पताल पहुँचाएँ, मदद करने वाले को नहीं होगी कोई कानूनी परेशानी
श्योपुर, 21 फरवरी 2026
जिले में नवजात शिशुओं को झाड़ियों, सुनसान स्थानों और खुले में छोड़ने की घटनाओं पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट #अर्पित वर्मा ने इसे समाज और मानवता के लिए गंभीर चिंता बताते हुए कहा है कि प्रत्येक शिशु का जीवन, सुरक्षा और संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
डीएम ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं कोई नवजात शिशु परित्यक्त अवस्था में मिले तो सबसे पहले उसे नजदीकी अस्पताल पहुँचाकर मानव धर्म निभाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चे को अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, इसलिए लोग डरें नहीं बल्कि आगे आकर जीवन बचाने में सहयोग करें।
पालन-पोषण में असमर्थ हैं तो सुरक्षित विकल्प अपनाएँ
महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी कारणवश माता-पिता बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं, तो उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ना दण्डनीय अपराध है।
ऐसी स्थिति में शिशु को निम्न सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा सकता है—
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वन स्टॉप सेंटर
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जिला अस्पताल
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सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र
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पुलिस थाना या डायल 112 के माध्यम से सूचना
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1098 चाइल्ड हेल्पलाइन
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बाल कल्याण समिति को जानकारी
पहचान रहेगी पूरी तरह गोपनीय
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षित स्थान पर शिशु छोड़ने वाले व्यक्ति या संभावित माता-पिता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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बच्चे को तुरंत स्वास्थ्य परीक्षण व देखभाल दी जाएगी।
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24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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अभिभावक द्वारा नहीं अपनाने की स्थिति में बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण हेतु मुक्त घोषित किया जाएगा।
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विशेषज्ञ शिशु गृह में उसका पालन-पोषण किया जाएगा और वैधानिक प्रक्रिया से गोद दिलाया जाएगा।
“अमानवीय त्याग नहीं, सुरक्षित जीवन का विकल्प चुनें”
जिला प्रशासन ने दो टूक कहा है कि बच्चे को असुरक्षित स्थान पर छोड़ना न केवल अमानवीय है बल्कि कानूनन अपराध भी है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर बच्चे को सौंपना उसे नया जीवन देने और खतरे से बचाने का संवेदनशील व जिम्मेदार तरीका है।
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