14 गौरक्षकों की रिहाई की मांग तेज, अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ ने मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति को भेजा पत्र

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उम्रकैद पाए गौरक्षकों के मामले में मानवीय आधार पर राहत की अपील, निष्पक्ष पुनर्विचार और गौ तस्करी पर सख्त कार्रवाई की उठी मांग

दिनांक 25 जून 2026। http://CrimeNationalNews

भोपाल/नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के चर्चित शिवनी-नर्मदापुरम प्रकरण में उम्रकैद की सजा पाए 14 गौरक्षकों की रिहाई को लेकर अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ ने अभियान तेज कर दिया है। संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र भेजकर संवैधानिक प्रावधानों के तहत मानवीय आधार पर राहत देने की मांग की है। PresidentOfIndia

महासंघ के मध्यप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष नीरज जैन और मध्यप्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि गौरक्षा कार्यों से जुड़े 14 लोगों को सुनाई गई सजा के बाद उनके परिवारों और गौसेवा से जुड़े लोगों में गहरी चिंता और पीड़ा का माहौल है। संगठन का कहना है कि गौसेवा भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जीवदया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। MadhyaPradesh

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से दया याचिका पर विचार की अपील ChiefMinister

महासंघ ने अपने पत्र में कहा है कि वह न्यायपालिका और संविधान की गरिमा का पूर्ण सम्मान करता है। इसके बावजूद संगठन ने अनुरोध किया है कि यदि संविधान और कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों के अंतर्गत कोई राहत संभव हो तो संबंधित गौरक्षकों के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पुनर्विचार किया जाए।  GauRakshak

संगठन का कहना है कि ऐसा निर्णय प्रभावित परिवारों को संबल देगा और समाज में न्याय, दया तथा मानवीय मूल्यों का सकारात्मक संदेश जाएगा।

गौ तस्करी पर सख्त कार्रवाई की भी उठाई मांग

महासंघ ने अपने पत्र में गौ तस्करी पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता भी जताई है। संगठन का कहना है कि गौवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और गौ तस्करी के मामलों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। AllIndiaGauRakshaMahasangh

निष्पक्ष जांच की मांग, लगाए गंभीर आरोप

महासंघ ने यह भी दावा किया है कि संबंधित प्रकरण में गौरक्षकों को षड्यंत्रपूर्वक आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी। संगठन ने मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने और पूरे प्रकरण पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित मामले में न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय प्रभावी है। इस संबंध में राज्य सरकार या राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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