87 दिन तक अफसरों के चक्कर काटता रहा बुजुर्ग, न्याय नहीं मिला तो कलेक्ट्रेट में खा लिया जहर
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श्योपुर 28 मई 2026
जनसुनवाई में न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचे एक बुजुर्ग फरियादी की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। गणेश बाजार निवासी देवेंद्र गोयल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनहीनता, जनसुनवाई व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि देवेंद्र गोयल पिछले 87 दिनों से अपनी दुकान और सामान पर कथित कब्जे की शिकायत लेकर थाना, एसपी कार्यालय, एसडीएम और कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे थे। 2 मार्च से 26 मई तक उन्होंने कई आवेदन दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। न्याय नहीं मिलने से टूट चुके देवेंद्र आखिरकार जनसुनवाई में जहर खाकर गिर पड़े। #Sheopur
घटना क्रम की पूरी कहानी वीडियो में देखे
दुकान छीनी दुकान छीनी गई, फिर साइकिल पर बेचने पड़े गोली-बिस्किट MadhyaPradesh
देवेंद्र गोयल पहले अपनी छोटी दुकान से परिवार का पालन-पोषण करते थे। आरोप है कि हिस्से की दुकान पर छोटे भाई ने कब्जा कर उसे किराए पर दे दिया। इसके बाद देवेंद्र के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। उम्र बढ़ने के बावजूद वे भीषण गर्मी में साइकिल पर गोली-बिस्किट बेचकर परिवार चला रहे थे।
उनका एक बेटा जयपुर में नौकरी करता है, दूसरा भोपाल में पढ़ाई कर रहा है। दो बेटियों में से एक की शादी हो चुकी है। परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगी ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था।
“मैं कई बार आवेदन दे चुका हूं…” प्रशासनिक_संवेदनहीनता
मौत से पहले का वीडियो वायरल, कई नाम लेकर सुनाई अपनी पीड़ा
घटना से पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देवेंद्र गोयल बेहद टूटे और परेशान दिखाई दे रहे हैं। वे बार-बार कहते सुनाई दे रहे हैं कि, “मैं कई बार आवेदन दे चुका हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
वीडियो में देवेंद्र गोयल अपनी दुकान को लेकर चल रहे विवाद और कथित कब्जे की पूरी कहानी भी बताते नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने दुकान के टीन-शेड और सामान तक निकाल लिया। वीडियो में मनोज, साडू और गोलू ठेकेदार नाम सामने आ रहे हैं। देवेंद्र गोयल का आरोप था कि इन लोगों ने दुकान को अपनी बताते हुए कब्जा कर लिया, जबकि वे लगातार प्रशासन और पुलिस से न्याय की गुहार लगाते रहे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जहरीला पदार्थ खाने के बाद भी वे काफी देर तक तड़पते रहे। वायरल वीडियो में तहसीलदार मनीषा मिश्रा मौके पर मौजूद दिखाई दे रही हैं। लोगों का आरोप है कि समय रहते उपचार की व्यवस्था कराने की बजाय घटना का वीडियो बनाया जाता रहा।
इसी दौरान मौके पर मौजूद पत्रकार साथी मुन्ना राठौर ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल एम्बुलेंस बुलवाई और देवेंद्र गोयल को जिला चिकित्सालय भिजवाया। वहां डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब देवेंद्र गोयल की बेटी ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पहले भी शिकायत और रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। बेटी का आरोप है कि पुलिस की ओर से कहा गया कि “यहां आए तो जान से मार देंगे।”
घटना के बाद पूरे शहर में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि फरियादी की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लिया जाता और मानवीय संवेदनशीलता दिखाई जाती, तो शायद एक बुजुर्ग को इस तरह मौत को गले लगाने की नौबत नहीं आती।
“पिता की मौत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए”
बेटे ने उठाए प्रशासन पर सवाल JusticeForDevendra
मृतक के बड़े बेटे कन्हैया गोयल ने कहा कि अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन यह पता लगना जरूरी है कि आखिर वे इतना बड़ा कदम उठाने को मजबूर क्यों हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी।
कन्हैया ने कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो न्याय की उम्मीद में गई उनके पिता की जान व्यर्थ मानी जाएगी।
समाज से भी नहीं मिली मदद कलेक्ट्रेट_कांड
जानकारी के अनुसार देवेंद्र गोयल ने समाज स्तर पर भी मदद की गुहार लगाई थी। अग्रवाल समाज के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने मामले को पारिवारिक विवाद बताते हुए हस्तक्षेप से दूरी बना ली।
प्रशासन के खिलाफ आज प्रदर्शन तहसीलदार
देवेंद्र गोयल की मौत के विरोध में 27 मई बुधवार सुबह 9 बजे कोतवाली गुलंबर जयस्तम्भ चोक पर अग्रवाल वैश्य समाज और व्यापारियों के समर्थन से डेडबॉडी रख कर बसपा नेता बिहारी सिंह सोलंकी की अगुआई में धरना -प्रदर्शन किया । बसपा नेता और सच्चे जनसेवक बिहारी सिंह सोलंकी भी प्रदर्शन में शामिल रहे ।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो, मृतक परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए, दुकान से कब्जा हटाया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई में दम तोड़ती इंसानियत SaveDemocracy
श्योपुर कलेक्ट्रेट में हुई यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का कड़वा सच है जहां फरियादी न्याय की उम्मीद लेकर आता है और बदले में उसे उपेक्षा, संवेदनहीनता और निराशा मिलती है। PoliceNegligence
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जनसुनवाई में ही फरियादी सुरक्षित नहीं है, यदि उसकी पीड़ा सुनने की बजाय उसे नजरअंदाज किया जाएगा, तो फिर आम नागरिक न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे?
देवेंद्र गोयल की मौत अब पूरे जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक फरियादी इसी तरह व्यवस्था की बेरुखी के शिकार होते रहेंगे?
