मध्यप्रदेश: कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार ‘भारत-जन्मी’ मादा चीता ने दी पाँच शावकों को जन्म — चीता प्रजनन में इतिहास रचा

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श्योपुर, 20 नवंबर 2025

आज 20/11/25 को भारत में ही जन्मी चीता  मुखी ने दिया 5 शावको को जन्म 

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मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान में एक बेहद अहम सफलता देखने को मिली है। यहां पर 33 महीने की उम्र की मादा चीता मुखी ने पाँच शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया है। यह उस परियोजना के लिए बेहद गर्व का क्षण है जिससे देश में चीता पुनर्स्थापन (रिइंट्रोडक्शन) का सपना साकार हो रहा है।

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मुखी, जो खुद ही इस उद्यान में पैदा हुई पहली मादा चीता है, अब भारत में जन्मी पहली मादा चीता बन चुकी है जिसने प्रजनन किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि इन बड़ी पसन्दीदा वन्यजीवों का भारत के प्राकृतिक आवास में अनुकूलन संभव हुआ है।

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माँ और उसके पाँच शावक स्वस्थ हैं, तथा पूरे उद्यान में विभागीय निगरानी तथा पशु-चिकित्सा टीम द्वारा उनकी देखभाल की जा रही है।

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यह कदम सिर्फ एक प्रजनन सफलता नहीं है — बल्कि यह भारत में इस प्रजाति को आनुवंशिक रूप से विविध तथा दीर्घकालिक रूप से स्थायी आबादी में बदलने की दिशा में एक मील का पत्थर है। इस सफलता ने देश के संरक्षण लक्ष्यों को भी सुदृढ़ किया है।

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अब भारत में चीता संख्या हुई 32 

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस उपलब्धि के साथ ही भारत में चीता आबादी 32 हो गई है — जिनमें से 11 वयस्क हैं और बाकी 21 शावक। यह संख्या देश के लिए आशाजनक संकेत देती है कि आगे विस्तार और स्थायित्व संभव है।

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क्या मायने रखता है यह सफलता

  • इस सफलता से यह स्पष्ट हुआ कि कूनो जैसे संरक्षित क्षेत्र में चीता के लिए उपयुक्त आवास तैयार किया जा सकता है, जहाँ उनका शिकार, आवास और संरक्षण योग्य हैं।

  • भारत-जन्मी चीता द्वारा प्रसव यह दिखाती है कि यह प्रजाति अब आयातित अवस्था (अनुवांशिक स्रोत से) बाहर निकल कर देश में स्वयं अपने पैर जमा रही है।

  • यह एक सकारात्मक संकेत है कि भारत में चीता पुनर्स्थापन की दिशा में ‘आत्मनिर्भर’ बनने की ओर कदम बढ़ रहा है, जहाँ आनुवांशिक विविधता और स्थानीय उत्पादन (शावक जन्म) संभव है।

  • इस सफलता ने न केवल कूनो उद्यान को बल दिया है, बल्कि अन्य संभावित स्थल-व्यवस्थाओं को भी प्रेरणा दी है कि वे भी इस दिशा में आगे बढ़ें।


आगे क्या करना होगा

  • शावकों की वृद्धि दर, उनकी स्वास्थ्य स्थिति, जीने की संभावना और जंगली परिस्थितियों में उनका अनुकूलन निरंतर मॉनिटर करना होगा।

  • आनुवांशिक विविधता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा—जिसके लिए समय-समय पर नए वयस्क चीते तथा अन्य स्थानों पर पुनर्स्थापन की व्यवस्था करनी होगी।

  • कूनो के बाद अन्य क्षेत्र (उदाहरण स्वरूप अन्य राष्ट्रीय उद्यान/संरक्षित क्षेत्र) में भी इसकी सफल प्रतिलिपि बनाना चाहिए ताकि एक देशव्यापी स्थायी आबादी विकसित हो सके।

  • स्थानीय समुदायों, वनरक्षकों एवं शोध संस्थानों के बीच समन्वय और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक होगा — क्योंकि इस तरह की बड़े स्तरीय परियोजनाएँ सिर्फ जीव विज्ञान की दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक-प्रशासनिक दृष्टि से भी जटिल होती हैं।


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