नई दिल्ली 24/10/2025
देशभर के सामुदायिक रेडियो स्टेशनों (CRS) के लिए बड़ी राहत की खबर है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने उनके सूचीबद्धीकरण (Empanelment) और सरकारी विज्ञापनों व प्रायोजित कार्यक्रमों के संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अब इन स्टेशनों को सरकारी विज्ञापनों की दरों में बढ़ोतरी का सीधा फायदा मिलेगा।
विज्ञापन दर में 42% की बढ़ोतरी
सरकार ने CRS के लिए विज्ञापन दर को ₹52 प्रति 10 सेकंड से बढ़ाकर ₹74 प्रति 10 सेकंड कर दिया है।
यह बढ़ोतरी 24 नवंबर 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन के तहत लागू हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला स्थानीय रेडियो माध्यमों को नई ऊर्जा देगा और गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं की पहुँच को मजबूत करेगा।
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540 से ज्यादा CRS कर रहे जनसेवा
देशभर में 540 से अधिक सामुदायिक रेडियो स्टेशन सक्रिय हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सांस्कृतिक विरासत जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने का काम करते हैं।
सरकार का मानना है कि ये रेडियो स्टेशन ग्रामीण आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में मजबूत भूमिका निभा रहे हैं।
सूचीबद्धीकरण (Empanelment) के नए मानदंड
DAVP/CBC/BOC के साथ सूचीबद्ध होने के लिए CRS को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:
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तीन महीने का निरंतर संचालन अनिवार्य।
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कम से कम दो घंटे का दैनिक प्रसारण पिछले तीन महीनों से लगातार होना चाहिए।
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WOL समाप्त CRS को मिली राहत
जिन स्टेशनों का वायरलेस ऑपरेटिंग लाइसेंस (WOL) समाप्त हो गया है, उन्हें छह महीने का अस्थायी सूचीबद्धीकरण (Provisional Empanelment) मिल सकेगा, बशर्ते वे WOL नवीनीकरण के लिए आवेदन की प्रति और नोटरीकृत अंडरटेकिंग जमा करें।
प्रायोजित कार्यक्रमों पर भी स्पष्ट गाइडलाइन
सरकारी मंत्रालय और विभाग CRS पर 30 मिनट तक के प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित करा सकेंगे।
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सामग्री सीमा: कुल प्रसारण समय का 50% तक प्रायोजित कंटेंट।
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उदाहरण दर: एक वर्ष में 90 कार्यक्रमों के लिए ₹4000 प्रति आधा घंटा।
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भुगतान और पारदर्शिता पर जोर
CRS को विज्ञापन अभियान पूरा होने के 30 दिनों के भीतर स्व-प्रमाणित ब्रॉडकास्ट सर्टिफिकेट के साथ बिल जमा करना होगा।
फर्जी प्रमाणपत्र देने या दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर स्टेशन को सूची से हटाया जा सकता है।
जमीनी आवाज़ को मिलेगा और बल
इन दिशा-निर्देशों से सामुदायिक रेडियो अब न सिर्फ सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाएंगे बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने का सशक्त माध्यम बनेंगे।
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सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के लिए यह फैसला एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
सरकारी समर्थन और बढ़ी हुई विज्ञापन दरों से यह स्थानीय रेडियो माध्यम अब और सशक्त होकर जनता की सच्ची आवाज़ बन सकेंगे।
