पीड़ित बच्चों को निःशुल्क कानूनी सहायता, त्वरित सुनवाई और NALSA योजना की दी जानकारी, न्यायिक अधिकारियों ने बढ़ाई विधिक जागरूकता
श्योपुर, 20 जुलाई 2026 CrimeNationalNews
बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और त्वरित न्याय व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिला न्यायालय परिसर स्थित पॉक्सो विशेष न्यायालय में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बीएल प्रजापति के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
शिविर में पॉक्सो अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act) के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि बच्चों के विरुद्ध लैंगिक अपराधों के मामलों में कानून बेहद सख्त है और पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए विशेष न्यायालयों में त्वरित सुनवाई की व्यवस्था की गई है।
पीड़ित बच्चों के अधिकारों पर विशेष जोर POCSOCourt
तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश बबीता होरा शर्मा ने पॉक्सो कानून के तहत पीड़ित बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता, चिकित्सीय सहायता, काउंसलिंग, संरक्षण और मामलों की शीघ्र सुनवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को भयमुक्त वातावरण में न्याय दिलाना न्याय व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। Sheopur
NALSA की बाल मैत्रीपूर्ण योजना से कराया अवगत
कार्यक्रम में NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) की “बच्चों के लिए मैत्रीपूर्ण विधिक सहायता योजना” पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य पीड़ित एवं जरूरतमंद बच्चों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कानूनी सहयोग, मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना किसी दबाव के न्याय प्राप्त कर सकें।
न्यायिक अधिकारियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनदीप कौर सेहमी, जिला विधिक सहायता अधिकारी अंकिता शांडिल्य, अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारी एवं अन्य पक्षकार उपस्थित रहे। शिविर के दौरान बाल अधिकारों की सुरक्षा, कानूनी जागरूकता और समाज की जिम्मेदारी पर भी विस्तार से चर्चा की गई। DistrictCourt
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध की जानकारी तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें और पीड़ित परिवारों को कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करें।
