विशेष जेल लोक अदालत का ग्वालियर से शुभारंभ, बंदियों को मिला त्वरित न्याय

0
7
Spread the love

 

ग्वालियर, 26 अप्रैल 2026
माननीय न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक के दूरदर्शी नेतृत्व तथा माननीय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में राज्य में पहली बार विशेष जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया।

इस अभिनव पहल का शुभारंभ केंद्रीय जेल, ग्वालियर में मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा द्वारा किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति आनंद पाठक सहित उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण भी उपस्थित रहे।

मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति सचदेवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, बल्कि परिस्थितियाँ उसे उस दिशा में ले जाती हैं। उन्होंने बंदियों को आत्ममंथन, सुधार और नए कौशल अर्जित कर समाज में पुनः सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत केवल विवाद निपटान का माध्यम नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर है।

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने कहा कि यह पहल बंदियों को जेल परिसर में ही सुलभ न्याय प्रदान करती है और इसका उद्देश्य केवल प्रकरणों का निराकरण नहीं, बल्कि विवादों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने वर्ष 2047 तक विवाद-मुक्त समाज के निर्माण का लक्ष्य भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण, न्यायिक अधिकारी, जेल एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि राज्य के विभिन्न जिलों से अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

महत्वपूर्ण प्रकरणों का निराकरण

विशेष जेल लोक अदालत में कई उल्लेखनीय मामलों का समाधान किया गया—

  • वर्ष 2016 से लंबित एक प्रकरण में फरियादी ने जेल परिसर में ही समझौता किया, जिससे आरोपी की तत्काल रिहाई हुई।
  • एक अन्य मामले में, जहाँ दोनों पक्ष जेल में ही निरुद्ध थे, संवाद के माध्यम से विवाद का समाधान कर आरोपी को दोषमुक्त किया गया।
  • एक रेलवे प्रकरण में 30 माह से निरुद्ध आरोपी को प्ली बार्गेनिंग के जरिए रिहा किया गया।

विभिन्न प्रकरणों का निपटान

लोक अदालत में प्ली बार्गेनिंग, आपराधिक सामंजस्य योग्य प्रकरण, लघु अपराध, सारांश प्रकरण, दीवानी एवं वैवाहिक मामलों सहित विभिन्न श्रेणियों के मामलों का निराकरण किया गया। इससे लंबित प्रकरणों में कमी आई और कई बंदियों को राहत मिली।

न्याय प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम

यह पहल न्याय को जेल परिसर तक ले जाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे बंदियों को अदालतों तक आए बिना ही न्याय मिल सका। इससे त्वरित न्याय, सुलह-सामंजस्य और वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली में विश्वास और अधिक मजबूत हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here