सीप नदी पर व्याख्यान माला, मंच पर ‘संस्कृति’ की बात… जमीनी हकीकत में गंदगी और बदहाली! बंजारा डैम बना नशेड़ियों का अड्डा

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  • 👉 “मंच पर सीप नदी की महिमा, जमीनी हकीकत में बदहाली”

  • 👉 “करोड़ों का बंजारा डैम बना नशेड़ियों का अड्डा”

  • 👉 “भाषणों में संस्कृति, हकीकत में गंदगी और लापरवाही”

श्योपुर, 05 अप्रैल 2026

CrimeNationalNews  एक तरफ श्योपुर में सीप नदी को “जीवन रेखा” बताकर उसके आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर नदी और उससे जुड़े पर्यटन स्थल बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं

कलेक्टर अर्पित वर्मा के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पीएम श्री महाविद्यालय में सीप नदी पर व्याख्यान माला आयोजित की गई, जहां अधिकारियों और वक्ताओं ने नदी की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया।


मंच से बोले बड़े-बड़े शब्द

कार्यक्रम में अपर कलेक्टर रूपेश उपाध्याय ने सीप नदी के किनारे प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के दर्शन होने की बात कही।
नगरपालिका उपाध्यक्ष संजय महाना ने इसे धार्मिक आस्था का केंद्र बताया, वहीं अन्य वक्ताओं ने भी नदी संरक्षण और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया।

👉 कार्यक्रम के दौरान निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए।


 लेकिन सच्चाई कुछ और ही है…SheopurNews

जहां मंच पर नदी के संरक्षण और सौंदर्य की बातें हो रही थीं, वहीं बंजारा डैम की हालत प्रशासन की पोल खोल रही है।

👉 स्थानीय लोगों के मुताबिक— GroundReality 

  • बंजारा डैम पूरी तरह गंदगी में डूबा हुआ है
  • दूर-दूर से आने वाले लोग हालत देखकर निराश लौट जाते हैं
  • करोड़ों रुपए से बना बोट क्लब अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है
  • अंदर शराबखोरी, जुआ और गंदगी का अंबार
  • कमरे तक शौचालय की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं
  • WaterConservation

SeepRiver करोड़ों खर्च, लेकिन देखरेख शून्य

स्थानीय निवासियों का कहना है कि—
👉 प्रशासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर बोट क्लब और डैम का निर्माण कराया,
👉 लेकिन अब देखरेख पूरी तरह बंद है

कई बार शिकायत और खबरों के बावजूद प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया


 पुरानी योजना भी ठंडे बस्ते में DevelopmentVsReality

पूर्व कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा
👉 नदी के किनारे पौधारोपण
👉 सौंदर्यीकरण योजना

शुरू की गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद
👉 यह योजना फाइलों में दबकर रह गई


BreakingNews ‘जीवन रेखा’ या उपेक्षा का प्रतीक?

सीप नदी को भले ही श्योपुर की जीवन रेखा कहा जा रहा हो,
👉 लेकिन जमीनी सच्चाई में यह उपेक्षा और लापरवाही का शिकार नजर आ रही है।

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