प्रशासन के आंकड़ों में खाद भरपूर, फिर किसानों को लाइन में क्यों लगना पड़ रहा? ब्लैक की बात करो तो खाद तुरंत उपलब्ध!

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24,161 मैट्रिक टन खाद वितरण और 18,247 मैट्रिक टन स्टॉक का दावा, जमीनी हकीकत पर किसानों के सवाल गंभीर

विजयपुर में 10 अगस्त को 5 POS मशीनों से होगा वितरण, लेकिन बड़ा सवाल—खाद आखिर किसानों तक पहुंचने से पहले गायब कहां हो जाती है?

श्योपुर, 09 अगस्त 2026  CrimeNationalNews

श्योपुर। खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता को लेकर प्रशासन की ओर से लगातार पर्याप्त स्टॉक होने के आंकड़े सामने रखे जा रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार जिले में अब तक 24,161 मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में 18,247 मैट्रिक टन खाद उपलब्ध है।  SheopurNews

कागजों पर आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन खेतों में खड़े किसान इन आंकड़ों से अलग कहानी बयां कर रहे हैं। किसानों का सीधा सवाल है—अगर खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो खरीदारी के समय किसानों को परेशानी क्यों होती है?

यही सवाल अब खाद वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

प्रशासन कहता है खाद पर्याप्त, किसान पूछ रहे—मिलती क्यों नहीं?

जिला प्रशासन के मुताबिक किसानों की मांग के अनुसार लगातार उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है। खरीफ सीजन 2026 में अब तक यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एमओपी और एनपीके की बड़ी मात्रा किसानों को वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है।

लेकिन किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्र पर खाद लेने पहुंचने पर लाइन, इंतजार और उपलब्धता की समस्या सामने आती है, जबकि निजी स्तर पर अधिक कीमत पर खाद उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। मध्यप्रदेशसमाचार

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध खाद और किसान के हाथ में पहुंचने वाली खाद के बीच आखिर यह अंतर कहां पैदा हो रहा है?

ब्लैक की बात करो तो खाद की उपलब्धता का दावा क्यों बदल जाता है?

ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों द्वारा एक गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर खाद की उपलब्धता सामान्य दर पर सीमित बताई जाती है, लेकिन अधिक कीमत पर खाद उपलब्ध कराने की बात करने पर स्टॉक आसानी से मिलने की स्थिति बन जाती है।  शीला_दाहिमा 

एसी शिकयते कई बार आई है और प्रशासन ने भी कई बार कार्यवाही की है कई गोदाम शील भी किये है किन्तु कुझ समय बाद ही मामला गायब हो जाता है  ऐसी शिकायतें सही हैं तो यह खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं।

सवाल सीधा है—अगर स्टॉक वास्तव में उपलब्ध है तो वह सरकारी निर्धारित व्यवस्था में किसान को क्यों नहीं मिल रहा?  कालाबाजारी

ग्रामीण क्षेत्रों में निजी गोदामों को लेकर भी उठ रहे सवाल

किसानों के बीच यह भी चर्चा और आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ बड़े खाद विक्रेताओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में निजी गोदामों में खाद का स्टॉक रखा जाता है। आरोप है कि कुछ मामलों में किसानों के नाम पर पहले से खाद का आवंटन या स्टॉक दिखाकर उसे बाद में अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासन द्वारा भौतिक सत्यापन और स्टॉक मिलान किया जाना जरूरी है। किन्तु भोंतिक सत्यापन में ग्रामीण क्षेत्रों में बने गुप्त गोदामों तक प्रशासन नहीं पहुँच पाटा और ब्लेक मेलिंग गुप्त में  सुचारू रहती है  श्योपुर

यदि किसी व्यापारी के रिकॉर्ड में किसानों के नाम पर खाद का उठाव दर्ज है, लेकिन वास्तविक रूप से खाद उसके निजी गोदाम में जमा है, तो यह जांच का गंभीर विषय बन सकता है।

हजारों टन खाद का स्टॉक—निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल  

यदि ग्रामीण क्षेत्रों में निजी गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद जमा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो प्रशासन को केवल सरकारी डबल लॉक केंद्रों का स्टॉक देखने के बजाय निजी विक्रेताओं के गोदाम, बिक्री रजिस्टर, POS रिकॉर्ड और वास्तविक भौतिक स्टॉक का भी मिलान करना चाहिए।

यही जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि खाद वास्तव में किसानों तक पहुंची या बीच में कहीं स्टॉक रोककर रखी गई।  ब्लैकमेंखाद 

विजयपुर में 5 POS मशीनों से बढ़ेंगे काउंटर

खाद वितरण में किसानों की परेशानी कम करने के लिए विजयपुर में 10 अगस्त को मार्कफेड के डबल लॉक केंद्र पर विशेष व्यवस्था की गई है। जिला विपणन अधिकारी मार्कफेड सतेन्द्र सिंह के अनुसार यहां 5 POS मशीनें लगाई जाएंगी, जिससे अधिक काउंटर बनाकर किसानों को सुविधाजनक तरीके से खाद वितरित की जा सके।

उन्होंने बताया कि खाद वितरण के दौरान वे स्वयं विजयपुर केंद्र पर मौजूद रहेंगे।

यह व्यवस्था किसानों के लिए राहत दे सकती है, लेकिन इसके साथ ही स्टॉक से लेकर अंतिम बिक्री तक पारदर्शी निगरानी भी जरूरी होगी।

यूरिया से लेकर NPK तक इतना स्टॉक, फिर संकट क्यों?

उप संचालक कृषि जीके पचौरिया के अनुसार खरीफ सीजन में अब तक—

  • यूरिया: 12,573 मैट्रिक टन वितरण
  • डीएपी: 4,899 मैट्रिक टन वितरण
  • एसएसपी: 3,318 मैट्रिक टन वितरण
  • एमओपी: 37 मैट्रिक टन वितरण
  • एनपीके: 3,334 मैट्रिक टन वितरण

वर्तमान उपलब्धता के अनुसार—

  • यूरिया: 8,749 मैट्रिक टन
  • डीएपी: 1,569 मैट्रिक टन
  • एसएसपी: 2,516 मैट्रिक टन
  • एमओपी: 70 मैट्रिक टन
  • एनपीके: 5,343 मैट्रिक टन

प्रशासन के आंकड़े यदि वास्तविक जमीनी स्टॉक से मेल खाते हैं तो किसानों को खाद की उपलब्धता में परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में शिकायतों की स्थिति सामने आने पर स्टॉक से बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन की जांच जरूरी हो जाती है।

किसानों की मांग—सिर्फ आंकड़े नहीं, जमीन पर हो जांच

किसानों की मांग है कि प्रशासन खाद की उपलब्धता के आंकड़े जारी करने के साथ-साथ खाद विक्रेताओं के निजी गोदामों की अचानक जांच, POS मशीन के रिकॉर्ड का भौतिक स्टॉक से मिलान और किसानों के नाम पर हुए उठाव का सत्यापन करे।

साथ ही यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने, स्टॉक रोकने या कालाबाजारी की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

बड़ा सवाल: खाद सरकारी रिकॉर्ड से निकलकर किसान तक पहुंची या बीच में कहीं अटक गई?

फिलहाल प्रशासन की ओर से जिले में पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा किया गया है। दूसरी ओर किसानों की शिकायतें वितरण व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़े कर रही हैं।

अब निगाह इस बात पर है कि सरकारी आंकड़ों और किसानों के अनुभव के बीच का अंतर प्रशासन कैसे खत्म करता है।

क्योंकि किसान के लिए खाद का आंकड़ा नहीं, समय पर उचित कीमत पर खाद का मिलना ही असली उपलब्धता है।

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