782 करोड़ की मेगा पेयजल परियोजना से 385 गांवों के 8.23 लाख लोगों को मिलेगा शुद्ध पानी, महिला के सुरक्षित उतरने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
श्योपुर, 20 जुलाई 2026 CrimeNationalNews
जिले की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में शामिल चंबल मल्टी विलेज स्कीम के तहत वीरपुर तहसील के ग्राम श्यारदा में प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) के लिए आवंटित शासकीय भूमि से कब्जा हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान उस समय अप्रत्याशित स्थिति बन गई, जब एक महिला पास स्थित BSNL टावर पर चढ़ गई। इसके चलते कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को देखते हुए भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी।
जिला प्रशासन के अनुसार महिला के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद पीएचई विभाग को नियमानुसार भूमि का कब्जा सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
782 करोड़ की परियोजना बदलेगी श्योपुर की तस्वीर
करीब 782 करोड़ 11 लाख रुपये की लागत से तैयार की जा रही चंबल मल्टी विलेज स्कीम जिले की सबसे महत्वाकांक्षी पेयजल परियोजनाओं में शामिल है। योजना के पूरा होने पर जिले के 75 प्रतिशत क्षेत्र के 385 गांवों में रहने वाले 8 लाख 23 हजार 272 ग्रामीणों को शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही निर्माण एवं संचालन के दौरान 500 से 600 स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की भी संभावना है। Development
71.44 एमएलडी क्षमता का बनेगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
योजना के तहत ग्राम श्यारदा में 71.44 एमएलडी क्षमता का आधुनिक जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plant) बनाया जा रहा है। इसी संयंत्र के माध्यम से चंबल नदी के जल को शुद्ध कर बड़ी ग्रामीण आबादी तक पेयजल पहुंचाया जाएगा। JalJeevanMission
2025 में आवंटित हुई थी शासकीय भूमि
प्रशासन के अनुसार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए 7.420 हेक्टेयर शासकीय भूमि को 7 जनवरी 2025 को पीएचई विभाग को आवंटित किया गया था। भूमि पर कुछ लोगों का कब्जा होने के कारण राजस्व न्यायालय ने 19 मई 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। इसके बाद सीमांकन कर विभाग को भूमि का कब्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सीमांकन के दौरान बनी अप्रत्याशित स्थिति
प्रशासन के मुताबिक 19 जुलाई 2026 को एसडीएम, पुलिस प्रशासन, राजस्व अमले और पीएचई-जल जीवन मिशन के अधिकारियों की मौजूदगी में सीमांकन और भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही थी। इसी दौरान रमा रावत नामक महिला पास स्थित बीएसएनएल टावर पर चढ़ गई, जिससे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई तथा कार्रवाई रोकनी पड़ी।
प्रशासन का दावा—विवादित भूमि पर महिला का नहीं है स्वामित्व
राजस्व अभिलेखों के अनुसार संबंधित महिला अथवा उनके पति बाबूलाल रावत का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए आवंटित भूमि पर कोई स्वामित्व अथवा कब्जा दर्ज नहीं है। प्रशासन का कहना है कि उनका नाम अलग सर्वे नंबर 131 की एक हेक्टेयर भूमि पर दर्ज है। अधिकारियों ने महिला को समझाने और सुरक्षित नीचे उतारने के लगातार प्रयास किए, लेकिन उनके टावर पर बने रहने के कारण भूमि हस्तांतरण पूरा नहीं हो सका।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संबंधित विभाग को भूमि का विधिवत कब्जा सौंप दिया जाएगा, ताकि जिले की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना का निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके। DrinkingWater
