श्योपुर में अलनीनो का साया: कृषि विभाग ने जारी की खरीफ के लिए बड़ी चेतावनी, लापरवाही पड़ी तो तबाह हो सकती है फसल

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  •  श्योपुर कृषि परामर्श 2026, खरीफ फसल सलाह श्योपुर, अलनीनो प्रभाव खेती

  • Kharif Crop Alert: श्योपुर में अलनीनो का साया! कृषि विभाग की किसानों को दो टूक चेतावनी- बदलें खेती का ढर्रा वरना होगा भारी नुकसान
    1. Drought Threat 2026: कम बारिश और सूखे की आहट! उप संचालक जीके पचौरिया ने जारी की गाइडलाइन, समय रहते फसल बीमा कराने की अपील

    2. Agriculture News: खरीफ सीजन में सूखे से निपटने का मास्टर प्लान, श्योपुर प्रशासन ने किसानों के लिए जारी किया जरूरी परामर्श

  •  श्योपुर में अलनीनो के प्रभाव और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

श्योपुर, 16 जुलाई 2026   #CrimeNationalNews

 देशभर में चल रहे खरीफ मौसम 2026 के बीच श्योपुर के किसानों के लिए मौसम का मिजाज बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। मौसम विभाग की हालिया चेतावनी और अलनीनो (El Niño) के खतरनाक प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले में हाई अलर्ट जारी किया है। उप संचालक कृषि जीके पचौरिया ने किसानों के लिए एक विशेष कृषि परामर्श जारी करते हुए साफ किया है कि इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने या फिर लगातार बारिश के बीच लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बनने की पूरी आशंका है। ऐसे में पारंपरिक खेती के भरोसे रहना किसानों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का सबब बन सकता है।

सूखा-रोधी और कम समय में पकने वाली फसलों को दें प्राथमिकता

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे वर्तमान परिस्थितियों और खेतों में उपलब्ध नमी के आधार पर ही फसलों का चयन करें। कृषि वैज्ञानिक और विभाग के अधिकारियों ने सलाह दी है कि इस बार सामान्य बीजों के बजाय सूखा-रोधी (Drought Resistant) और कम अवधि में पकने वाली फसलों की किस्मों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्य फसलों के अलावा किसान बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, तिल, सोयाबीन और शीघ्र पकने वाली अरहर जैसी अनुशंसित फसलों की बुवाई करें, ताकि कम बारिश होने पर भी फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सके।

अगर बुवाई में हुई है देरी, तो तुरंत अपनाएं ये वैज्ञानिक तरीके

उप संचालक जीके पचौरिया ने तकनीकी खेती पर जोर देते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में मुख्य फसल की बुवाई में देरी हो चुकी है, वहां किसान तुरंत नमी संरक्षण के उपायों पर काम शुरू करें। खेतों में मेडबंदी करना, मल्चिंग पद्धति अपनाना, गहरी जुताई करना और वर्षा के पानी को सहेजने के लिए जल संरक्षण के उपाय करना अब बेहद जरूरी हो गया है। इसके अलावा फसलों में बिना सोचे-समझे खाद डालने के बजाय केवल संतुलित उर्वरकों का ही उपयोग करें।

माइक्रो इरिगेशन और फसल बीमा ही बचाएगा नुकसान से

 प्रशासन ने किसानों को सिंचाई के पुराने तरीकों को छोड़ आधुनिक तकनीकों को अपनाने की नसीहत दी है। सिंचाई की आवश्यकता पड़ने पर केवल ड्रिप और स्प्रिंकलर (फव्वारा) जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का उपयोग करने को कहा गया है, जिससे पानी की बर्बादी रोकी जा सके। इसके साथ ही, मौसम के किसी भी बड़े जोखिम और नुकसान की भरपाई के लिए किसानों से समय रहते अपनी फसलों का बीमा (Crop Insurance) कराने की सख्त अपील की गई है।

कृषि विभाग ने किसानों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी तरह के भ्रम में न रहें और अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सटीक सलाह पाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के मैदानी तकनीकी कर्मचारियों से लगातार संपर्क बनाए रखें।

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