55 मिनट इंतजार के बाद फूटा पत्रकारों का गुस्सा

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एसपी की प्रेसवार्ता का बहिष्कार, बोले पत्रकार — “समय का सम्मान नहीं तो कवरेज भी नहीं”

श्योपुर  5 मई 2026  CrimeNationalNews 

श्योपुर में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर मंगलवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। पुलिस कंट्रोल रूम में शाम 5 बजे प्रस्तावित पुलिस अधीक्षक की प्रेसवार्ता तय समय पर शुरू नहीं होने से पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। करीब 55 मिनट तक इंतजार कराने के बाद भी जब प्रेसवार्ता शुरू नहीं हुई तो मौजूद पत्रकारों ने सामूहिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया। Sheopur

वीडियो देखें 

“पत्रकारों का समय क्या बेकार है?” SudhirAgarwal

पत्रकारों का कहना था कि प्रेसवार्ता का समय पुलिस विभाग खुद तय करता है और उसी के अनुसार मीडिया को बुलाया जाता है। इसके बावजूद निर्धारित समय पर कार्यक्रम शुरू न करना पत्रकारों के समय और पेशे का अपमान है। SPSheopur 

मौके पर मौजूद पत्रकारों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे खबर कवर करने पहुंचे थे, घंटों इंतजार करने नहीं। उनका कहना था कि यदि पुलिस प्रशासन खुद समय की अहमियत नहीं समझता तो दूसरों से अनुशासन और समय पालन की उम्मीद कैसे कर सकता है।  FourthPillar 

कंट्रोल रूम में दिखा विरोध, एक-एक कर लौटे पत्रकार

शाम 5 बजे बुलाई गई प्रेसवार्ता रात में बदलती नजर आई, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। इंतजार से नाराज पत्रकारों ने इसे पुलिस की घोर लापरवाही और पत्रकार विरोधी रवैया बताते हुए प्रेसवार्ता का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया।

करीब 5:55 बजे तक भी कार्यक्रम शुरू न होने पर पत्रकार एक-एक कर कंट्रोल रूम से बाहर निकल गए और अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।

पुलिस प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल  TimeManagement

घटना के बाद पत्रकारों के बीच पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी चर्चा होती रही। कई पत्रकारों ने इसे “अकड़ भरा रवैया” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है।  PressConference

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुलिस विभाग मीडिया समन्वय को गंभीरता से नहीं ले रहा? और क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक सही सूचना और समय प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं पहुंच रही? SPSheopur 

“सम्मान चाहिए तो समय का सम्मान करें” MPPolice

पत्रकारों ने साफ संदेश दिया कि मीडिया का काम सिर्फ कवरेज करना नहीं, बल्कि जनता तक सच्चाई पहुंचाना है। ऐसे में पत्रकारों को घंटों इंतजार कराना न सिर्फ असम्मानजनक है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का भी उदाहरण है।

श्योपुर में हुई यह घटना अब पुलिस और मीडिया के रिश्तों को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है।l

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