जेल पहुंचते ही बदला तेवर: ‘जूनियर मजिस्ट्रेट’ बताकर पहचान छुपाई, घर का खाना मांगा; 48 घंटे हिरासत के बाद नौकरी पर संकट

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दिनांक 29/3/26
CrimeNationalNews  श्योपुर/शिवपुरी। बाढ़ राहत घोटाले में गिरफ्तार तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का जेल पहुंचते ही अलग ही रवैया देखने को मिला। शिवपुरी की महिला जेल में दाखिल होते वक्त उन्होंने अपनी असली पहचान छुपाते हुए खुद को सिर्फ “जूनियर मजिस्ट्रेट” बताया। लेकिन कुछ ही देर में उनके तेवर सामने आ गए। HindiNews
ShivpuriJail  जेल सूत्रों के मुताबिक, अमिता सिंह ने जेल का खाना खाने से साफ इनकार कर दिया और घर से भोजन मंगाने की जिद पर अड़ गईं। इस पर जेल प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जेल मैन्युअल के तहत बाहरी खाना अंदर नहीं लाया जा सकता और हर बंदी को समान नियमों का पालन करना होगा।


AmitasinghTomar  गौरतलब है कि गिरफ्तारी के बाद पहले ही उनका एक वीडियो वायरल हो चुका है, जिसमें वे मीडिया कर्मियों पर भड़कती नजर आईं और कथित तौर पर कहती सुनी गईं—“तुम्हारी पत्रकारिता निकाल दूंगी।” इस व्यवहार ने उनके खिलाफ जनाक्रोश को और बढ़ा दिया है।  FloodScam 
उधर, मामला अब सिर्फ घोटाले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी नौकरी पर भी तलवार लटक गई है। सेवा नियमों के अनुसार 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रहने वाले शासकीय अधिकारी को स्वतः निलंबित माना जाता है। ऐसे में अमिता सिंह तोमर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
Corruption  बाढ़ राहत जैसे संवेदनशील मुद्दे में कथित गड़बड़ी और फिर जेल में इस तरह का रवैया—यह पूरा प्रकरण प्रशासनिक ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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