पोषण पर लापरवाही नहीं चलेगी, गांव-गांव चलेगा गुटखा छोड़ने का अभियान : कलेक्टर

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श्योपुर में पोषण और स्वास्थ्य विभाग की बैठक में कलेक्टर शीला दाहिमा
स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त बैठक को संबोधित करतीं कलेक्टर शीला दाहिमा।
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गर्भवती महिलाओं की सेहत से लेकर बच्चों के वजन तक होगी निगरानी, मॉनीटरिंग में लापरवाही पर डीएचओ को नोटिस के निर्देश

श्योपुर, 28 सितंबर 2026  CrimeNationalNews

महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण को लेकर श्योपुर प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। कलेक्टर शीला दाहिमा ने स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि समुदाय के बीच पोषण शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए। महिलाओं को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के साथ गुटखा और तंबाकूयुक्त पुड़िया छोड़ने के लिए गांव-गांव अभियान चलाया जाएगा।

जिला पंचायत सभागार में सोमवार को आयोजित स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त बैठक में कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, एनीमिया की स्थिति, आंगनबाड़ी की गतिविधियों और बच्चों के पोषण की विस्तृत समीक्षा की। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की रिपोर्टिंग समय पर नहीं होने पर डीएचओ डॉ. जेएन सक्सेना को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।

गुटखा-पुड़िया छोड़ने के लिए गांवों में चलेगा जागरूकता अभियान

कलेक्टर ने कहा कि तंबाकूयुक्त गुटखा और पुड़िया का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं में इसकी आदत होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। महिलाओं और पुरुषों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए ग्राम स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

इस अभियान में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), जन अभियान परिषद और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। नुक्कड़ नाटकों और सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से तंबाकू सेवन के नुकसान बताए जाएंगे। कलेक्टर ने नशामुक्ति की पहल को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण से जोड़ते हुए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।  शीला दाहिमा,

गर्भवती महिलाओं की जांच और हाईरिस्क मामलों पर रहेगी नजर

बैठक में महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच, गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल, एएनसी पंजीयन, टीकाकरण और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गर्भवती और हाईरिस्क महिलाओं की समय पर पहचान कर उनकी रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए।

जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित होने वाले शिविरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को उपचार और स्वास्थ्य निगरानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। हीमोग्लोबिन जांच में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए।

15 दिन में ब्लॉक स्तर पर होगी समीक्षा बैठक

कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग को निर्देश दिए कि दोनों विभाग आपसी समन्वय से काम करें। ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति की नियमित निगरानी करते हुए पात्र महिलाओं और बच्चों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने प्रत्येक 15 दिन में ब्लॉक स्तर पर बैठक आयोजित करने तथा हर महीने जिला स्तर पर समीक्षा बैठक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का नियमित वजन, कमजोर बच्चों की पहचान, गर्भवती माताओं को टीएचआर वितरण और पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से उपचार की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

व्हाट्सएप ग्रुप से होगी मैदानी गतिविधियों की निगरानी

जिला पंचायत सीईओ कार्तिकेय जायसवाल ने ग्राम स्तर पर निगरानी के लिए स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग का संयुक्त व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का सुझाव दिया। इसमें बीएमओ, आशा सुपरवाइजर, सीएचओ, सीडीपीओ और आंगनबाड़ी सुपरवाइजर को शामिल कर प्रतिदिन की गतिविधियां साझा करने के निर्देश दिए गए।  गर्भवती महिलाएं,

उन्होंने कहा कि मैदानी अमला समुदाय के साथ नियमित संवाद रखे और टीकाकरण, पोषण, एएनसी पंजीयन तथा आयरन की गोलियों के नियमित सेवन के प्रति महिलाओं को जागरूक करे। महात्मा गांधी सेवा आश्रम के प्रतिनिधि जय सिंह जादौन ने भी बैठक में सुझाव दिए।

महिलाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

कलेक्टर ने एनआरएलएम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का काम जारी रखा जाए। जो महिलाएं अभी तक समूहों से नहीं जुड़ी हैं, उन्हें भी समूहों में शामिल किया जाए।

पशुपालक किसानों के परिवारों की महिलाओं को भी समूहों से जोड़कर पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। सीईओ जिला पंचायत ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय कर समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में काम किया जाए।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर विकसित होंगी पोषण वाटिकाएं  महिला एवं बाल विकास

कलेक्टर ने जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका विकसित करने के निर्देश दिए। इनमें सहजन, नींबू और मीठा नीम जैसे पौधे लगाने के साथ लौकी, तोरई और सेम जैसी बेलदार सब्जियां उगाने का सुझाव दिया गया। इससे स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ कार्तिकेय जायसवाल, सीएमएचओ डॉ. दिलीप सिकरवार, महिला बाल विकास अधिकारी श्यामबाबू खरे, सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण राकेश गुप्ता, जन अभियान परिषद, एनआरएलएम, आकांक्षी विकासखंड के अधिकारी और विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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